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तबे एकला चलो रे
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अंगूठाकार|रबीन्द्रनाथ ठाकुर (१९०५-०६ में)
एकला चलो रे देशभक्ति परक संगीत सितम्बर 1905 रवींद्र संगीत बंगाली रबीन्द्रनाथ ठाकुर रबीन्द्रनाथ ठाकुर संगीत क्रमांक 3, "स्वदेश", गीताबितनस्वरबितन 46इंदिरा देवी चौधुरानी द्वारा किए गए अंकन Ekla Chalo Re.ogg एकला चलो रे
"जदि तोर डाक शुने केउ ना आसे तबे एकला चलो रे" (bn যদি তোর ডাক শুনে কেউ না আসে তবে একলা চলো রে ) "यदि आपकी पुकार सुनने कोई न आए तो अकेले चले जाना" सोम रेबा Rabindranath Tagore: The Singer and His Song https://archive.org/details/rabindranathtago0000shom रबीन्द्रनाथ टैगोर: गायक और उनके सफल गीत प्रथम 2009 पेंगुइन बुक्स इण्डिया नई दिल्ली 978-0-670-08248-3 254 अंग्रेज़ी), सामान्यतः इसे एकला चलो रे से जाना जाता है, एक बंगाली देशभक्ति गीत है जिसे १९०५ में रबीन्द्रनाथ ठाकुर ने लिखा था।
गीत के बोल
बांग्ला लिपि में देवनागरी मेंযদি তোর ডাক শুনে কেউ না আসে তবে একলা চলো রে। একলা চলো, একলা চলো, একলা চলো, একলা চলো রে॥
যদি কেউ কথা না কয়, ওরে ওরে ও অভাগা,যদি সবাই থাকে মুখ ফিরায়ে সবাই করে ভয়—তবে পরান খুলেও তুই মুখ ফুটে তোর মনের কথা একলা বলো রে॥
যদি সবাই ফিরে যায়, ওরে ওরে ও অভাগা,যদি গহন পথে যাবার কালে কেউ ফিরে না চায়—তবে পথের কাঁটাও তুই রক্তমাখা চরণতলে একলা দলো রে॥
যদি আলো না ধরে, ওরে ওরে ও অভাগা,যদি ঝড়-বাদলে আঁধার রাতে দুয়ার দেয় ঘরে- তবে বজ্রানলে আপন বুকের পাঁজর জ্বালিয়ে নিয়ে একলা জ্বলো রে।। जोदि तोर डाक शुने केउ ना आशे तौबे ऐकला चौलो रे।
ऐकला चौलो, ऐकला चौलो, ऐकला चौलो, ऐकला चौलो रे!
जोदि केउ कौथा ना कौय, ओरे ओरे ओ औभागा,
जोदि शौबाई थाके मुख फिराये शौबाई कौरे भौय
तौबे पौरान खुले ओ तुई, मुखफुटे तोर मोनेर कौथा ऐकला बौलो रे!
जोदि शौबाई फिरे जाय, ओरे ओरे ओ औभागा,
जोदि गौहोन पौथे जाबार काले केउ फिरे न चाय
तौबे पौथेर काँटा ओ तुई, रौक्तोमाखा चौरोण तौले ऐकला दौलो रे!
जोदि आलो ना धौरे, ओरे ओरे ओ औभागा,
जोदि झौड़ बादोले आंधार राते दुयार दैय घौरे
तौबे बौज्रानौले, आपोन बुकेर पांजोर ज्वालिये निये ऐकला ज्वौलो रे!
हिन्दी अनुवाद
<blockquote><span style="font-size:140%;">
तेरी आवाज़ पे कोई ना आये तो फिर चल अकेला रे
फिर चल अकेला चल अकेला चल अकेला चल अकेला रे
ओ तू चल अकेला चल अकेला चल अकेला चल अकेला रे
तेरी आवाज़ पे कोई ना आये तो फिर चल अकेला रे
फिर चल अकेला चल अकेला चल अकेला चल अकेला रे
यदि कोई भी ना बोले ओरे ओ रे ओ अभागे कोई भी ना बोले
यदि सभी मुख मोड़ रहे सब डरा करे
तब डरे बिना ओ तू मुक्तकंठ अपनी बात बोल अकेला रे
ओ तू मुक्तकंठ अपनी बात बोल अकेला रे
तेरी आवाज़ पे कोई ना आये तो फिर चल अकेला रेयदि लौट सब चले ओरे ओ रे ओ अभागे लौट सब चले
यदि रात गहरी चलती कोई गौर ना करे
तब पथ के कांटे ओ तू लहू लोहित चरण तल चल अकेला रे
तेरी आवाज़ पे कोई ना आये तो फिर चल अकेला रे
यदि दिया ना जले ओरे ओ रे ओ अभागे दिया ना जले
यदि बदरी आंधी रात में द्वार बंद सब करे
तब वज्र शिखा से तू हृदय पंजर जला और जल अकेला रे
ओ तू हृदय पंजर चला और जल अकेला रे
तेरी आवाज़ पे कोई ना आये तो फिर चल अकेला रे
फिर चल अकेला चल अकेला चल अकेला चल अकेला रे
ओ तू चल अकेला चल अकेला चल अकेला चल अकेला रे
सन्दर्भ
श्रेणी:बांग्ला साहित्य