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जीएनयू जनरल पब्लिक लाइसेंस

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सितंबर 2026 जीएनयू जनरल पब्लिक लाइसेंस (GNU General Public License, संक्षिप्त रूप में GNU GPL या GPL) एक मुक्त सॉफ्टवेयर लाइसेंस और कॉपीलेफ्ट लाइसेंस है। इसका उद्देश्य सॉफ्टवेयर के उपयोगकर्ताओं को सॉफ्टवेयर चलाने, उसके स्रोत कोड का अध्ययन और उसमें परिवर्तन करने तथा मूल या संशोधित संस्करणों को साझा करने की स्वतंत्रता प्रदान करना है। GPL के अंतर्गत वितरित सॉफ्टवेयर को वितरित करते समय लाइसेंस की निर्धारित शर्तों का पालन करना पड़ता है, जिससे संबंधित स्वतंत्रताएँ आगे के उपयोगकर्ताओं तक भी बनी रहें। इतिहास GNU GPL का विकास GNU परियोजना और मुक्त सॉफ्टवेयर आंदोलन के संदर्भ में हुआ। GPL का पहला संस्करण फरवरी 1989 में प्रकाशित हुआ था। इससे पहले GNU परियोजना के विभिन्न कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग कॉपीलेफ्ट लाइसेंसों का उपयोग किया जाता था। GPL ने इन प्रयासों के लिए एक सामान्य लाइसेंस ढाँचा उपलब्ध कराया। GPL का दूसरा संस्करण (GPLv2) जून 1991 में प्रकाशित हुआ। यह लंबे समय तक व्यापक रूप से प्रयुक्त हुआ और कई मुक्त सॉफ्टवेयर परियोजनाओं ने इसे अपनाया। लिनक्स के कर्नेल को भी 1992 से GPLv2 के अंतर्गत वितरित किया गया। GPL का तीसरा और वर्तमान प्रमुख संस्करण (GPLv3) 29 जून 2007 को प्रकाशित हुआ। इसके विकास में सार्वजनिक परामर्श, कई मसौदे और बड़ी संख्या में टिप्पणियाँ शामिल थीं। GPLv3 ने डिजिटल अधिकार प्रबंधन, पेटेंट और कुछ प्रकार के हार्डवेयर प्रतिबंधों जैसी नई तकनीकी और कानूनी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए GPL के प्रावधानों को अद्यतन किया। मूल सिद्धांत GPL का आधार मुक्त सॉफ्टवेयर की स्वतंत्रताओं की रक्षा करना है। GNU Project के अनुसार इन स्वतंत्रताओं में सॉफ्टवेयर को किसी भी उद्देश्य के लिए चलाने, उसके स्रोत कोड का अध्ययन और उसमें परिवर्तन करने, प्रतियाँ साझा करने तथा संशोधित संस्करणों को वितरित करने की स्वतंत्रता शामिल है। यहाँ "मुक्त" का अर्थ कीमत से नहीं बल्कि उपयोगकर्ता की स्वतंत्रता से है। GPL इन स्वतंत्रताओं को केवल मूल प्राप्तकर्ता तक सीमित नहीं रखता। इसका कॉपीलेफ्ट मॉडल यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि GPL के अंतर्गत आने वाले सॉफ्टवेयर के वितरित संशोधित संस्करण भी संबंधित लाइसेंस की शर्तों के अधीन रहें। इसी कारण GPL को एक मजबूत कॉपीलेफ्ट लाइसेंस माना जाता है। प्रमुख विशेषताएँ स्रोत कोड और संशोधन GPL के अंतर्गत सॉफ्टवेयर वितरित करने पर लाइसेंस की शर्तों के अनुसार संबंधित स्रोत कोड उपलब्ध कराने की व्यवस्था होती है। इससे उपयोगकर्ता सॉफ्टवेयर का अध्ययन कर सकते हैं और उसमें संशोधन कर सकते हैं। GPLv3 में स्रोत उपलब्ध कराने से संबंधित नियमों को अधिक स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। पुनर्वितरण GPL उपयोगकर्ताओं को सॉफ्टवेयर की प्रतियाँ साझा करने की अनुमति देता है। किसी वितरक को GPL द्वारा निर्धारित कॉपीराइट और लाइसेंस संबंधी सूचनाओं तथा अन्य लागू शर्तों को बनाए रखना होता है। GPL के अंतर्गत सॉफ्टवेयर की प्रतियों के लिए शुल्क लेना अपने आप में निषिद्ध नहीं है; लाइसेंस सॉफ्टवेयर की स्वतंत्रता को कीमत से अलग अवधारणा के रूप में देखता है। कॉपीलेफ्ट GPL का सबसे महत्वपूर्ण गुण इसका कॉपीलेफ्ट मॉडल है। सामान्य कॉपीराइट व्यवस्था का उपयोग जहाँ किसी कार्य की प्रतिलिपि और संशोधन को नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है, वहीं कॉपीलेफ्ट का उद्देश्य उन्हीं कानूनी अधिकारों का उपयोग करके उपयोगकर्ताओं की सॉफ्टवेयर स्वतंत्रता को बनाए रखना है। GPL के अंतर्गत आने वाले संशोधित और वितरित कार्यों पर लाइसेंस की शर्तें लागू हो सकती हैं। पेटेंट GPLv3 में पेटेंट से संबंधित प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसका उद्देश्य GPL के अंतर्गत सॉफ्टवेयर प्राप्त करने वाले उपयोगकर्ताओं को ऐसे पेटेंट दावों से संबंधित अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करना है जो लाइसेंस प्राप्त कार्य से जुड़े हो सकते हैं। GPLv3 के विकास में पेटेंट संबंधी भेदभावपूर्ण समझौतों को भी एक महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में देखा गया था। हार्डवेयर और "टिवोआइज़ेशन" GPLv3 ने ऐसे उपकरणों से संबंधित स्थिति को भी संबोधित किया जिसमें किसी डिवाइस में GPL सॉफ्टवेयर को संशोधित करने की अनुमति तो लाइसेंस के तहत हो, लेकिन निर्माता तकनीकी साधनों द्वारा उस संशोधित सॉफ्टवेयर को उसी डिवाइस पर चलाने से रोक दे। इस समस्या को सामान्यतः "टिवोआइज़ेशन" कहा जाता है। GPLv3 ने कुछ परिस्थितियों में उपयोगकर्ता को आवश्यक जानकारी और साधन उपलब्ध कराने से संबंधित अतिरिक्त प्रावधान जोड़े। डिजिटल प्रतिबंध GPLv3 के विकास के दौरान डिजिटल अधिकार प्रबंधन (DRM) से संबंधित कानूनों और तकनीकी प्रतिबंधों को भी ध्यान में रखा गया। लाइसेंस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कानूनी या तकनीकी उपाय GPL द्वारा प्रदान की गई सॉफ्टवेयर स्वतंत्रताओं को अनावश्यक रूप से निष्प्रभावी न कर दें। GPL के संस्करण GNU GPL के प्रमुख संस्करण निम्न हैं: GPLv1 — फरवरी 1989 में प्रकाशित पहला संस्करण। GPLv2 — जून 1991 में प्रकाशित दूसरा संस्करण। GPLv3 — 29 जून 2007 को प्रकाशित तीसरा और वर्तमान संस्करण। GPLv2 और GPLv3 को समान नहीं माना जाता। FSF के अनुसार GPLv3, GPLv2 के साथ स्वतः संगत नहीं है; हालाँकि GPLv2 के अंतर्गत जारी कई परियोजनाएँ अपने लाइसेंस में बाद के संस्करणों का विकल्प देती हैं। इसलिए किसी परियोजना के लाइसेंस की वास्तविक शर्तों को अलग से देखना आवश्यक होता है। अन्य GNU लाइसेंसों से संबंध GNU GPL के अतिरिक्त GNU LGPL और GNU AGPL जैसे अन्य GNU लाइसेंस भी हैं। LGPL का उद्देश्य कुछ परिस्थितियों में GPL की तुलना में अधिक लचीले ढंग से लाइब्रेरी को अन्य सॉफ्टवेयर के साथ उपयोग करने की अनुमति देना है। AGPLv3, GPLv3 पर आधारित है और नेटवर्क के माध्यम से उपयोग किए जाने वाले संशोधित सॉफ्टवेयर के स्रोत उपलब्ध कराने से संबंधित अतिरिक्त प्रावधान रखता है। उपयोग GNU GPL का उपयोग अनेक मुक्त सॉफ्टवेयर परियोजनाओं में किया जाता है। GNU Project के अनुसार GPL GNU कार्यक्रमों में व्यापक रूप से प्रयुक्त लाइसेंस है और इसका उपयोग बड़ी संख्या में अन्य मुक्त सॉफ्टवेयर पैकेजों में भी होता है। Linux कर्नेल GPLv2 के अंतर्गत लाइसेंस प्राप्त एक प्रमुख उदाहरण है। GPL के अंतर्गत सॉफ्टवेयर विकसित करने वाले व्यक्ति या संगठन को लाइसेंस के संस्करण और उसकी शर्तों का चयन परियोजना की आवश्यकताओं के अनुसार करना होता है। GPL के साथ काम करते समय स्रोत कोड उपलब्ध कराने, कॉपीराइट और लाइसेंस सूचनाएँ बनाए रखने तथा संशोधित संस्करणों के वितरण से संबंधित शर्तों का पालन करना आवश्यक हो सकता है। आलोचना और सीमाएँ GPL का कॉपीलेफ्ट मॉडल उन डेवलपरों और परियोजनाओं के लिए उपयुक्त हो सकता है जो अपने संशोधित सॉफ्टवेयर की स्वतंत्रता को बनाए रखना चाहते हैं। दूसरी ओर, ऐसे प्रोजेक्ट जिनका उद्देश्य संशोधित संस्करणों को मालिकाना लाइसेंस के अंतर्गत वितरित करना है, उनके लिए GPL की शर्तें उपयुक्त नहीं हो सकतीं। FSF स्वयं बताता है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में अधिक अनुमतिपरक (permissive) लाइसेंस बेहतर विकल्प हो सकते हैं। GPL की व्याख्या और अनुपालन विशेष परिस्थितियों में जटिल हो सकता है, विशेषकर तब जब किसी परियोजना में अलग-अलग लाइसेंसों वाले सॉफ्टवेयर को संयोजित किया जा रहा हो। इसलिए केवल "मुक्त सॉफ्टवेयर" होना पर्याप्त नहीं है; उपयोग किए गए प्रत्येक घटक के लाइसेंस और उनकी संगतता की जाँच करना आवश्यक है। यह भी देखें मुक्त सॉफ्टवेयर कॉपीलेफ्ट GNU परियोजना मुक्त स्रोत GNU Lesser General Public License GNU Affero General Public License सॉफ्टवेयर लाइसेंस संदर्भ जीएनयू जीपीएल का पहला संस्करण फरवरी 1989 में जारी किया गया था।GNU General Public License, Version 1 https://web.archive.org/web/20260914213606/https://www.gnu.org/licenses/old-licenses/gpl-1.0-standalone.html 14 सितंबर 2026 , GNU Project.