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फरीदा अल-शोबाशी
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फरीदा अल-शोबाशी فريدة الشوباشي 1938 ई॰ काहिरा, मिस्र मिस्री राजनीतिज्ञ, पत्रकार, लेखिका, वकील अली अल-शोबाशी इस्लाम 2021 ई॰ में मिस्र की संसद के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करने वाली पहली महिला
फरीदा अल-शोबाशी (अरबी: فريدة الشوباشي; जन्म: 1938 ई॰) एक अत्यंत प्रख्यात और सम्मानित मिस्री राजनीतिज्ञ, पत्रकार, लेखिका और महिला अधिकारों की प्रबल समर्थक हैं। वे मिस्र के समकालीन राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में एक अत्यंत प्रभावशाली और सशक्त आवाज़ मानी जाती हैं। अपने सुदीर्घ और संघर्षपूर्ण करियर में, उन्होंने न केवल पत्रकारिता और वकालत के क्षेत्र में अपनी एक विशिष्ट पहचान स्थापित की है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। जनवरी 2021 ई॰ में, वे मिस्र की संसद (प्रतिनिधि सभा) के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करने वाली पिछले 42 वर्षों के इतिहास में पहली महिला बनीं। उनका यह अभूतपूर्व कदम मिस्र और संपूर्ण अरब जगत में महिला सशक्तिकरण का एक जीवंत प्रतीक बन गया।https://news.trust.org/item/20210113191714-kel0h New face of Egypt's parliament: An 83-year-old woman news.trust.org 2026-03-21
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
फरीदा अल-शोबाशी का जन्म 1938 ई॰ में मिस्र की राजधानी काहिरा (Cairo) के एक ईसाई परिवार में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा काहिरा में ही संपन्न हुई। बचपन से ही उनके भीतर सामाजिक न्याय, समानता और राष्ट्रीय सरोकारों के प्रति एक अत्यंत गहरी संवेदनशीलता थी। उन्होंने प्रतिष्ठित काहिरा विश्वविद्यालय (Cairo University) से कानून (Law) की पढ़ाई की और वकालत की डिग्री प्राप्त की। एक वकील के रूप में अपने शुरुआती करियर के दौरान, उन्होंने समाज के शोषित और वंचित वर्गों के कानूनी अधिकारों के लिए लंबी लड़ाइयाँ लड़ीं।
बाद के वर्षों में, उन्होंने गहन बौद्धिक अध्ययन और व्यक्तिगत चिंतन के पश्चात ईसाई धर्म त्यागकर इस्लाम धर्म अपना लिया। वे अक्सर सार्वजनिक मंचों पर इस बात का स्पष्ट उल्लेख करती हैं कि उनका यह धर्म परिवर्तन किसी बाहरी दबाव का परिणाम नहीं था, बल्कि यह पूरी तरह से उनका एक स्वतंत्र, सचेत और बौद्धिक निर्णय था।
राजनीतिक करियर और संसद में ऐतिहासिक भूमिका
फरीदा अल-शोबाशी का राजनीतिक सफर उनके जीवन का सबसे प्रेरणादायक अध्याय है। वे हमेशा से एक धर्मनिरपेक्ष (Secular) और लोकतांत्रिक मिस्र की मुखर हिमायती रही हैं। 2020 ई॰ के मिस्र के संसदीय चुनावों में, उन्होंने अत्यंत सक्रिय रूप से भाग लिया और भारी जनसमर्थन के साथ प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) की मानद सदस्य (सांसद) के रूप में निर्वाचित हुईं।
12 जनवरी 2021 ई॰ को उनके जीवन और मिस्र के संसदीय इतिहास में एक गौरवशाली क्षण आया। मिस्र के संविधान और संसदीय नियमों के अनुसार, नई चुनी गई संसद के पहले और उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता सदन के सबसे उम्रदराज़ (वरिष्ठतम) सदस्य को करनी होती है। 83 वर्ष की आयु में, फरीदा अल-शोबाशी ने इस सर्वोच्च पद को सुशोभित किया। इस प्रकार, वे 1979 ई॰ के बाद मिस्र की संसद के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करने वाली पहली महिला बन गईं। इस ऐतिहासिक घटना ने पूरे विश्व के मीडिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया और इसे मिस्र में महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी के एक बहुत बड़े मील के पत्थर के रूप में मान्यता मिली।http://thearabweekly.com/farida-el-choubachy-egyptian-mp-making-womens-voices-heard Farida El Choubachy, Egyptian MP making women's voices heard AW en 2026-03-21
महिला अधिकारों की वकालत और विचारधारा
फरीदा अल-शोबाशी को संपूर्ण मध्य पूर्व में महिला सशक्तिकरण की एक निडर और मुखर आवाज़ के रूप में जाना जाता है। उन्होंने मिस्र के समाज में महिलाओं के खिलाफ होने वाले भेदभाव, घरेलू हिंसा और पितृसत्तात्मक (Patriarchal) व्यवस्था का हमेशा कड़ा विरोध किया है।
उन्होंने 'मुस्लिम ब्रदरहुड' (Muslim Brotherhood) और अन्य चरमपंथी धार्मिक विचारधाराओं के खिलाफ हमेशा स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाया है, क्योंकि उनका दृढ़ विश्वास है कि राजनीतिक इस्लाम महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और देश के समग्र लोकतांत्रिक विकास के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है। वे महिलाओं की आधुनिक शिक्षा, उनके पूर्ण आर्थिक स्वावलंबन और राजनीति में उनके समान प्रतिनिधित्व की सबसे बड़ी समर्थकों में से एक रही हैं।http://thearabweekly.com/farida-el-choubachy-egyptian-mp-making-womens-voices-heard Farida El Choubachy, Egyptian MP making women's voices heard AW en 2026-03-21
व्यक्तिगत जीवन
फरीदा का विवाह मिस्र के एक अत्यंत प्रख्यात वामपंथी (Leftist) विचारक, प्रखर लेखक और राजनीतिक कार्यकर्ता अली अल-शोबाशी (Ali El Choubachy) के साथ हुआ था। उनके पति ने मिस्र के राजनीतिक और श्रमिक आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई थी, जिसके कारण तत्कालीन सरकारों द्वारा उन्हें कई बार जेल की कड़ी सजा भी दी गई थी। फरीदा ने हर कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में अपने पति का पूरा साथ दिया और उनके वैचारिक संघर्षों में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहीं। अली अल-शोबाशी के निधन के बाद भी, फरीदा ने उनके प्रगतिशील और मानवीय विचारों को जीवित रखा है और आज भी वे पूरी ऊर्जा के साथ राष्ट्र सेवा के कार्यों में निरंतर जुटी हुई हैं।
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
विकिडाटा पर फरीदा अल-शोबाशी
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श्रेणी:काहिरा विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र