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भीमसेन विद्यालंकार
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भीमसेन विद्यालंकार (१४ मार्च, १९१४ -- ) भारत के एक लेखक, निर्भीक पत्रकार, स्वतन्त्र विचारक तथ देश की स्वतन्त्रता प्राप्ति के लिए चलाए गए राष्ट्रीय आन्दोलन के सेनानी तथा उसमें भाग लेने वाले ध्येयनिष्ठ एंव कर्मठ व्यक्ति थे। इन्होंने अध्यापन, लेखन तथा पत्रकारिता द्वारा राष्ट्रीयता का प्रचार किया। उन्होने सत्यवादी नामक पत्र का सम्पादन किया। वे पंजाब हिन्दी साहित्य सम्मेलन के प्रधानमन्त्री रहे। इनकी स्मृति में प्रतिवर्ष हिन्दी भवन द्वारा हिन्दी रत्न सम्मान प्रदान किया जाता है।
लाला लाजपत राय द्वारा स्थापित नेशनल कालेज में भाई परमान्द जी के आग्रह पर अध्यापन कार्य किया। वहां सरदार भगतसिंह, सुखदेव, भगवतीचरण वर्मा, यशपाल आदि इनके छात्र रहे। पराधाीनता युग में भीमसेन जी ने देश की जनता में सोए हुए स्वाभिमान को जागृत करने के उदेश्य से उच्च कोटि के ऐतिहासिक महत्व के ग्रन्थ- वीर मराठे, वीर शिवाजी, महाभारत के वीर, आर्य समाज के सिद्धान्त, आर्य प्रतिनिधि सभा पंजाब का सचित्र इतिहास, स्वर्गीय लाला लाजपतराय जी की आत्मकथा भाग - 1, आदि लिखे।
भीमसेन विद्यालंकार का जन्म 14 मार्च 1914 को हरियाणा में हुआ था। उनके पिता का नाम चौधरी शिवकरण था।
इन्हें भी देखें
हिन्दी रत्न सम्मान
श्रेणी:भारतीय पत्रकार