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अनुच्छेद 14 (भारत का संविधान)
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अनुच्छेद 14 भारत के संविधान का एक अनुच्छेद है। यह संविधान के भाग 3 में शामिल है जो मौलिक अधिकार का वर्णन करता है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 भारत के क्षेत्र के भीतर सभी व्यक्तियों को कानून के समक्ष समानता और कानूनों की समान सुरक्षा की गारंटी देता है।"राज्य किसी भी व्यक्ति को कानून के समक्ष समानता या भारत के क्षेत्र के भीतर कानूनों के समान संरक्षण से इनकार नहीं करेगा । "
== पृष्ठभूमि ==
भारत के संविधान 1950 का अनुच्छेद 14, 1948 के मसौदा संविधान में एक स्वतंत्र प्रावधान नहीं था। इसे शुरू में मसौदा अनुच्छेद 15 (अनुच्छेद 21) में शामिल किया गया था जो इस प्रकार पढ़ा जाता था:"जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा और कानून के समक्ष समानता - किसी भी व्यक्ति को कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही उसके जीवन या स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जाएगा, और न ही किसी व्यक्ति को भारत के क्षेत्र के भीतर कानून के समक्ष समानता या कानून के समान संरक्षण से वंचित किया जाएगा।"मसौदा अनुच्छेद 15 पर 6 और 13 दिसंबर 1948 को चर्चा की गई। इन दो दिनों में हुई चर्चा पहले भाग "जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा" के इर्द-गिर्द घूमती थी, जबकि दूसरे भाग - "कानून के समक्ष समानता" पर बिल्कुल भी बहस नहीं हुई।
संविधान सभा के अध्यक्ष को 3 नवंबर 1949 को लिखे अपने पत्र में, अपने संशोधित मसौदा संविधान को प्रस्तुत करते हुए, प्रारूप समिति ने उल्लेख किया कि - "हमने इस अनुच्छेद को दो भागों में विभाजित करना और 'कानून के समक्ष समानता' से संबंधित इस अनुच्छेद के उत्तरार्द्ध को एक नए अनुच्छेद 14 में 'समानता के अधिकार' शीर्षक के तहत स्थानांतरित करना अधिक उपयुक्त माना है।" इस प्रकार अनुच्छेद 14 को भारत के संविधान 1950 में शामिल किया गया था।
== मूल पाठ ==
== सन्दर्भ ==
== टिप्पणी ==
== बाहरी कड़ियाँ ==