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यक़ीन का सफ़र
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यक़ीन का सफ़र (उर्दू: یقین کا سفر, शाब्दिक अर्थ: विश्वास की यात्रा) एक पाकिस्तानी टेलीविज़न धारावाहिक है, जिसका निर्माण मोमिना दुरैद द्वारा एम. डी. प्रोडक्शन्स के अंतर्गत हम टीवी के लिए किया गया था।https://images.dawn.com/news/1179488 47% of our readers believe Yaqeen Ka Safar deserves to be on Netflix 2018-02-20 Images 2018-05-02 en-US इसका प्रसारण मूलतः १९ अप्रैल २०१७ से १ नवम्बर २०१७ तक हुआ, जिसमें कुल २९ कड़ियाँ शामिल थीं। यह धारावाहिक फ़रहत इशिताक़ द्वारा लिखित उपन्यास "वो यक़ीन का नया सफ़र" पर आधारित है तथा इसका निर्देशन शहज़ाद कश्मीरी ने किया।
यह कथा दो प्रमुख पात्रों — अस्फ़न्द और ज़ुबिया — की जीवन यात्रा को दर्शाती है, जो विभिन्न संघर्षों और कठिनाइयों से गुज़रते हुए आत्मविकास की ओर अग्रसर होते हैं। यह धारावाहिक उन्हीं रचनाकारों द्वारा लिखा और निर्मित किया गया है, जिन्होंने हमसफ़र, मात-ए-जान है तू, दियार-ए-दिल, उदारी और बिन रोये जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों का निर्माण किया।
इसकी प्रमुख भूमिकाओं में अहद रज़ा मीर (डॉ. असफंद यार), सजल अली (डॉ. ज़ुबिया), शाज़ ख़ान (दानियाल), हिरा मानी (गैती) और सोहाई अबरो (नूरी) शामिल हैं। इस धारावाहिक का एक साथ प्रसारण पाकिस्तान, संयुक्त राज्य अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, आयरलैंड, और ब्रिटेन में किया गया। इसकी प्रारंभिक कहानी कराची में स्थित है, जबकि बाद के भाग नीलम वैली में चित्रित किए गए हैं।
"यक़ीन का सफ़र" वर्ष २०१७ में प्रसारित होने वाले सबसे लोकप्रिय और उच्च रेटिंग वाले धारावाहिकों में से एक था।
कथानक
"यक़ीन का सफ़र" की कहानी आरंभ में तीन समानांतर कथाओं के माध्यम से प्रस्तुत होती है:
१. ज़ुबिया खलील की कहानी
ज़ुबिया खलील एक युवा छात्रा है, जिसकी माँ की अचानक मृत्यु उसके शारीरिक रूप से हिंसक पिता के हाथों हो जाती है। ज़ुबिया को एक सहेली के घर से व्याख्यान नोट्स लेने जाना था, और उसने अपनी माँ से अनुरोध किया कि वह उसके साथ चलें, जबकि उसके पिता ने माँ को अकेले बाहर जाने से मना किया था। जब खलील (ज़ुबिया का पिता) को यह ज्ञात हुआ कि उनकी पत्नी ने उनकी आज्ञा का उल्लंघन किया है, तो उन्होंने उन्हें ज़ोर से थप्पड़ मारा, जिससे वह गिर पड़ीं और बिस्तर के कोने से टकरा कर तत्काल मृत्यु को प्राप्त हुईं। माहजबीन खाला, ज़ुबिया की मौसी, उसे सांत्वना देती हैं। ज़ुबिया उन्हें सच्चाई बताती है, किन्तु खलील पूरे परिवार को धमकी देता है कि वे माँ की मृत्यु के असली कारण के विषय में किसी को कुछ न बताएँ।
२. दानियाल और असफंद यार का परिवार
दूसरी कहानी इस्लामाबाद में एक प्रतिष्ठित परिवार से संबंधित है, जहाँ दानियाल का विवाह उसकी चचेरी बहन गैती आरा से हो रहा है। दानियाल एक युवा वकील है, जिसने हाल ही में लंदन से स्नातक की उपाधि प्राप्त की है। वह निर्भीक, आत्मविश्वासी, साहसी और ईमानदार स्वभाव का व्यक्ति है।
उसका छोटा भाई असफंद यार जल्द ही कराची जाकर अपनी चिकित्सा शिक्षा पूरी करेगा। दोनों के पिता, उस्मान, एक प्रसिद्ध वकील हैं और परिवार का समाज में महत्वपूर्ण स्थान है। असफंद की सगाई अपने चाचा रिज़वान की बेटी फरयाल से हुई है।
३. नूरी की कहानी
तीसरी कथा सिंध के एक ग्रामीण क्षेत्र (रब नवाज़ गाँव) की लड़की नूरी की है, जिसे एक मंत्री के बेटे जहाँगीर शाह और उसके दो मित्रों द्वारा सामूहिक बलात्कार का शिकार बनाया जाता है। जब पुलिस नूरी से पूछताछ करती है, तो वे उससे अत्यंत असंगत और अपमानजनक प्रश्न करते हैं। नूरी का छोटा भाई उसका समर्थन करता है, लेकिन माता-पिता गरीबी के कारण मौन रहते हैं।
पुलिस द्वारा धमकाए जाने और गांव में अपमान सहने के बाद नूरी अपना घर छोड़ देती है। कराची की एक ग़ैर-सरकारी संस्था (NGO) की महिला कार्यकर्ता रूमाना उसे ढूँढ कर अपने साथ ले जाती हैं। रूमाना इस घटना की सूचना दानियाल को देती हैं।
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
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आधिकारिक जालस्थल https://web.archive.org/web/20190927164859/https://www.hum.tv/dramas/yakeen-ka-safar/ 27 सितंबर 2019
श्रेणी:पाकिस्तानी नाट्य धारावाहिक