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411 समाचार
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जूनो (अंतरिक्ष यान)

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thumb|240px|बृहस्पति के आगे जूनो शोध यान का काल्पनिक चित्र जूनो (अंग्रेज़ी: Juno) अमेरिकी अंतरिक्ष अनुसन्धान परिषद्, नासा, द्वारा हमारे सौर मंडल के पाँचवे ग्रह, बृहस्पति, पर अध्ययन करने के लिए पृथ्वी से ५ अगस्त २०११ को छोड़ा गया एक अंतरिक्ष शोध यान है। लगभग ५ वर्ष लंबी यात्रा के बाद ५ जुलाई २०१६ को यह बृहस्पति तक पहुँचने में सफल रहा।http://khabar.ndtv.com/news/zara-hatke/juno-enters-jupiters-orbit-and-google-puts-it-on-homepage-1428145 ग्रहों के राजा बृहस्पति की कक्षा में पहुंचा नासा का अंतरिक्षयान जूनो ५ जुलाई २०१६ ५ जुलाई २०१६ https://web.archive.org/web/20160706154324/http://khabar.ndtv.com/news/zara-hatke/juno-enters-jupiters-orbit-and-google-puts-it-on-homepage-1428145 6 जुलाई 2016 dead इस अभियान पर लगभग १.१ अरब डॉलर की लागत का अनुमान है। यान यात्रा और शोध योजना इसे पृथ्वी से बृहस्पति पहुँचने में लगभग ५ साल लगे और ५ जुलाई २०१६ में बृहस्पति के इर्द-गिर्द ऐसी परिक्रमा कक्षा में स्थान ले लिया जो इसे उस ग्रह के ध्रुवों के ऊपर से ले जाया करेगी। वैज्ञानिक इसे बृहस्पति के ३७ चक्कर लगवाएँगे, जिन्हें पूरा करने में इसे फ़रवरी २०१८ तक का समय लग जाएगा। इस समय में यह यान उस ग्रह की बनावट, चुम्बकीय क्षेत्र और (कुछ हद तक) मौसम के बारे में जानकारी बटोरकर पृथ्वी की ओर प्रसारित करता रहेगा। बृहस्पति एक गैस दानव ग्रह है और जूनो यान यह पता लगाने की कोशिश करेगा की उस हज़ारों मील मोटी गैस की परत के नीचे कोई पत्थरीला केंद्र है भी कि नहीं। वातावरण में आक्सीजन और हाइड्रोजन की मात्राओं का अध्ययन करके पानी की मात्रा का भी अंदाज़ा लगाने का प्रयास किया जाएगा। फरवरी २०१८ में, ग्रह की ३७ परिक्रमाएँ पूरी होने पर इस यान को धीमा कर के बृहस्पति के वायुमंडल में घुसाकर ध्वस्त कर दिया जाएगा।Juno - Mission Info https://web.archive.org/web/20110802041313/http://www.nasa.gov/mission_pages/juno/main/index.html 2 अगस्त 2011 Accesses April 18th, 2011 सौर उर्जा का प्रयोग बृहस्पति सूरज से दूर है और वहाँ सूरज की रोशनी बहुत मंद दिखती है, जिस से वहाँ पर पहुँचे हुए यानों में सौर उर्जा का प्रयोग संभव नहीं रहा है। उसकी बजाये सारे यानों ने परमाणु ऊर्जा इस्तेमाल की जाती रही है। लेकिन सौर प्रौद्योगिकी में तरक्की होने से अब ऐसे उपकरण बन गएँ हैं जो इस धीमी रोशनी में भी बिजली बना सकते हैं। जूनो बृहस्पति जाने वाला पहला यान होगा जो सौर ऊर्जा का प्रयोग करेगा। इस पर बड़े-बड़े सौर पैनल लगे हुए हैं जिनका कुल क्षेत्रफल ६५० वर्ग फ़ुट से भी अधिक है और जो हर समय लगभग ४५० वाट बिजली पैदा करेंगे। नामकरण इस यान का नामकरण यूनानी किंवदंतियों की एक देवी जूनो के नाम पर किया गया है जो कि बृहस्पति की पत्नी थी। बृहस्पति का मुख धुंध व बादलों से आच्छादित था। अतः कोई उसे देख नहीं पाता था। जूनो ने पहली बार धुंध को हटाकर बृहस्पति का चेहरा देखा था। गौरतलब है कि इस उपग्रह से भी यही अपेक्षित है कि बृहस्पति ग्रह के गैसीय वातावरण को भेदकर उसकी भौगोलिक संरचना का पता लगाया जा सके। इन्हें भी देखें बृहस्पति (ग्रह) सन्दर्भ Juno (spacecraft) जूनो (अंतरिक्ष यान) श्रेणी:अंतरिक्ष शोध यान श्रेणी:बृहस्पति के अंतरिक्ष यान श्रेणी:अमेरिका के अंतरिक्ष यान श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना