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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

कपिलवस्तु

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नेपाल स्थित वर्तमान नगरपालिका कपिलवस्तु नगरपालिका right|thumb|300px|पिपरहवा का स्तूप कपिलवस्तु, शाक्य गण की राजधानी थी जिसका नाम शाक्यों के गुरू कपिल के नाम पर रखा गया था। गौतम बुद्ध के जीवन के प्रारम्भिक काल खण्ड यहीं पर व्यतीत हुआ था। भगवान बुद्ध का जन्म इस स्थान से १० किमी पूर्व में लुंबिनी में हुआ था। आर्कियोलाजिक खुदाई और प्राचीन यात्रीयों के विवरण अनुसार अधिकतर विद्वान्‌ कपिलवस्तु नेपाल के तिलौराकोट को मानते हैं जो नेपाल की तराई के नगर तौलिहवा से दो मील उत्तर की ओर हैं।जनपद गोरखपुर District Gorakhpur 20 March 2018 https://gorakhpur.nic.in/hi/tourist-place/%E0%A4%95%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%81/ hi 28 July 2024 विंसेंट स्मिथ के मत से यह उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले का पिपरहवा नामक स्थान है जहाँ एक स्तूप पाया गया है। बुद्ध, शाक्य गण के राजा शुद्धोदन और महामाया के पुत्र थे। उनका जन्म लुंबिनी वन में हुआ जिसे अब रुम्मिनदेई कहते हैं। रुम्मिनदेई तिलौराकोट (कपिलवस्तु) से १० मील पूर्व और भगवानपुर से दो मील उत्तर है। यहाँ अशोक का एक स्तंभलेख मिला है जिसका आशय है कि भगवान्‌ बुद्ध के इस जन्मस्थान पर आकर अशोक ने पूजा की और स्तंभ खड़ा किया तथा "लुम्मिनीग्राम' के कर हलके किए। नेपाल की कपिलवस्तु में पायी गई सील पर लिखा हैhttps://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.499827/page/n25/mode/1up 9 In the issue of the Times of India dated the 25th January 1976, another writer and after him Sri Srivastava also published in the "Illustrated Weekly" certain photographs taken from the excavation of Padaria as Kapilavastu The seal scribed with "OM DEVAPUTRA BIHARA KAPILAVASTU BHIKSHU SANKASA" alleged to have been recovered from that place relates to 5th century Because the BHIKSHUS kept it concealed m such an inaccessible place after the original birth place was damaged. The Real Birth Place Of Buddha Mahapatra Chakradhar : "ॐ देवपुत्र बिहार कपिलवस्तु भिक्षु संकसा" जो 5वीं सदी की बताई गई है। जिसे शाक्य भिक्षु (महासम्मतिया सम्प्रदाय) संकसा (भारत) से ले गये थे। गौतम बुद्ध ने बाल्य व यौवन के सुख का उपभोग कर २९ वर्ष की अवस्था में कपिलवस्तु से महाभिनिष्क्रमण किया।अतुल्य भारत Incredible India V2 https://www.incredibleindia.org/content/incredible-india-v2/hi/destinations/ayodhya/kapilvastu.html hi 28 July 2024 बुद्धत्वप्राप्ति के दूसरे वर्ष वे शुद्धोदन के निमंत्रण पर कपिलवस्तु गए। इसी प्रकार १५ वाँ चातुर्मास भी उन्होंने कपिलवस्तु में न्यग्रोधाराम में बिताया। यहाँ रहते हुए उन्होंने अनेक सूत्रों का उपदेश किया, ५०० शाक्यों के साथ अपने पुत्र राहुल और वैमात्र भाई नंद को प्रवज्जा दी तथा शाक्यों और कोलियों का झगड़ा निपटाया। बुद्ध से घनिष्ठ संबंध होने के कारण इस नगर का बौद्ध साहित्य और कला में चित्रण प्रचुरता से हुआ है। इसे बुद्धचरित काव्य में "कपिलस्य वस्तु' तथा ललितविस्तर और त्रिपिटक में "कपिलपुर' भी कहा है। दिव्यावदान ने स्पष्टत: इस नगर का संबंध कपिल से बताया है। ललितविस्तर के अनुसार कपिलवस्तु बहुत बड़ा, समृद्ध, धनधान्य और जन से पूर्ण महानगर था जिसकी चार दिशाओं में चार द्वार थे। नगर सात प्रकारों और परिखाओं से घिरा था। यह वन, आराम, उद्यान और पुष्करिणियों से सुशोभित था और इसमें अनेक चौराहे, सड़कें, बाजार, तोरणद्वार, हर्म्य, कूटागार तथा प्रासाद थे। यहाँ के निवासी गुणी और विद्वान्‌ थे। सौंदरानंद काव्य के अनुसार यहाँ के अमात्य मेधावी थे। पालि त्रिपिटक के अनुसार शाक्य क्षत्रिय थे और राजकार्य "संथागार https://web.archive.org/web/20240603150537/https://www.santhagaar.com/2023/11/blog-post.html 3 जून 2024 " में एकत्र होकर करते थे। उनकी शिक्षा और संस्कृति का स्तर ऊँचा था। भिक्षुणीसंघ की स्थापना का श्रेय शाक्य स्त्रियों को है। फ़ाहियान के समय तक कपिलवस्तु में थोड़ी आबादी बची थी पर युआन्च्वाङ के समय में नगर वीरान और खँडहर हो चुका था, किंतु बुद्ध के जीवन के घटनास्थलों पर चैत्य, विहार और स्तूप १,००० से अधिक संख्या में खड़े थे। सन्दर्भ श्रेणी:बौद्ध तीर्थ स्थल