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प्रह्लादपुरी मंदिर, मुल्तान

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प्रह्लादपुरी मंदिरپرَہْلادْپُورِی مندر Prahladpuri Temple View.jpg प्रहलादपुरी मंदिर के अवशेष Pakistan 30 11 52 N 71 28 11 E type:landmark inline,title 250 मुल्तान, पंजाब पाकिस्तान पाकिस्तान प्रह्लाद हिंदू मंदिर पाकिस्तान हिंदू परिषद http://www.pakistanhinducouncil.org/ प्रह्लादपुरी मंदिर पाकिस्तान में पंजाब प्रांत के मुल्तान शहर में स्थित एक प्राचीन हिन्दू मंदिर है जिसे पहले 'कश्यपपुर' के नाम से जाना जाता था। हिंदू देवता नरसिंह को समर्पित इस मंदिर का नाम प्रह्लाद के नाम पर रखा गया है। कहा जाता है कि प्रह्लादपुरी के मंदिर का निर्माण भगवान नरसिंह के सम्मान में प्रह्लाद ने करवाया था। मंदिर को मुल्तान किले के अंदर एक उच्च मंच पर बनाया गया था। मंदिर हज़रत बहाउल हक़ ज़करिया की कब्र से निकट है। हालांकि, परंपराओं का दावा है कि मूल मंदिर एक स्तंभ संरचना थी और दोनों छत और इसका समर्थन करने वाले स्तंभ शुद्ध सोने से बने थे। इतिहास प्रह्लादपुरी के मूल मन्दिर का निर्माण हिरण्यकश्यपु के पुत्र प्रह्लाद द्वारा किया गया था।The early history of Multan Syad Muhammad Latif 1963 3,54 Kasyapa, is believed, according to the Sanscrit texts, to have founded Kashyapa-pura (otherwise known as MultanGazetteer of the Multan District, 1923-24 Sir Edward Maclagan, Punjab (Pakistan) 1926 276–77 https://books.google.com/books?ei=ThCET-SAF9DRrQf8jM3fBg&id=LBBDAAAAYAAJ&dq=multan+prahlad&q=+prahlad#search_anchor 17 दिसंबर 2019 https://web.archive.org/web/20170307202705/https://books.google.com/books?ei=ThCET-SAF9DRrQf8jM3fBg&id=LBBDAAAAYAAJ&dq=multan+prahlad&q=+prahlad#search_anchor 7 मार्च 2017 liveImperial rule in Punjab: the conquest and administration of Multan, 1818-1881 by J. Royal Roseberry 243, 263 https://books.google.com/books?ei=pwWET5_hHs6qrAf2183eBg&id=swwNAAAAIAAJ&dq=MULTAN+PRAHLAD&q=TEMPLE#search_anchor 17 दिसंबर 2019 https://web.archive.org/web/20170308020052/https://books.google.com/books?ei=pwWET5_hHs6qrAf2183eBg&id=swwNAAAAIAAJ&dq=MULTAN+PRAHLAD&q=TEMPLE#search_anchor 8 मार्च 2017 liveAll the year round , Volume 51 1883 Charles Dickens https://books.google.com/books?id=AtURAAAAYAAJ&q=MULTAN+PRAHLADPURI+RIOT&dq=MULTAN+PRAHLADPURI+RIOT&hl=en&sa=X&ei=VQaET9Aag66sB9q04a0G&ved=0CE4Q6AEwBA 17 दिसंबर 2019 https://web.archive.org/web/20170308010554/https://books.google.com/books?id=AtURAAAAYAAJ&q=MULTAN+PRAHLADPURI+RIOT&dq=MULTAN+PRAHLADPURI+RIOT&hl=en&sa=X&ei=VQaET9Aag66sB9q04a0G&ved=0CE4Q6AEwBA 8 मार्च 2017 livehttp://multan.uniconconsulting.com/monument/index/TEMPLE_OF_PRAHLADPURI.html Archived copy 2015-01-07 dead https://web.archive.org/web/20150107231623/http://multan.uniconconsulting.com/monument/index/TEMPLE_OF_PRAHLADPURI.html 2015-01-07 Survey & Studies for Conservation of Historical Monuments of Multan. Department of Archeology & Museums, Ministry of Culture, Government of Pakistan कहा जाता है कि मन्दिर उस स्थान पर स्थित है जहाँ मूल मन्दिर का निर्माण प्रह्लाद ने स्वयं किया था और साथ में यह भी कहा जाता है कि यह वह स्थान है जहाँ भगवान नरसिंह ने हिरण्यकशिपु से प्रह्लाद को बचाने के लिए स्तम्भ के बाहर प्रकट हुए थे।http://www.thefridaytimes.com/15042011/page16.shtml संग्रहीत प्रति 17 दिसंबर 2019 https://web.archive.org/web/20131211101834/http://www.thefridaytimes.com/15042011/page16.shtml 11 दिसंबर 2013 dead इसलिए, हिन्दुओं का मानना है कि होली की प्रारम्भ इसी मन्दिर से हुआ है। मुल्तान के सूर्य मन्दिर की तरह प्रह्लादपुरी मन्दिर भी मुल्तान के मुस्लिम विजय के बाद नष्ट किया गया था। डॉ॰ A N खान का कहना है कि 1810 के दशक में मन्दिर का पुनर्निर्माण किया गया था, जब यह क्षेत्र सिखों के शासन में था। हालाँकि, 1831 में मन्दिर का दौरा करने वाले अलेक्जेण्डर बर्नेस ने कहा कि उन्होंने इसे बिना छत के सूनसान पाया था। पाकिस्तान के निर्माण के बाद, अधिकांश हिन्दू भारत चले गए और तब से मन्दिर का प्रबन्धन नगर के अल्पसङ्ख्यक हिन्दुओं द्वारा किया जाता है। किन्तु भारत में बाबरी मस्जिद को ढहाने के बाद पाकिस्तान में कई हिन्दू मन्दिरों को मुसलमानों द्वारा ढहा दिया गया, जिनमें से यह मन्दिर भी था। अब इस मन्दिर में रखी भगवान नरसिंह की मूर्ति हरिद्वार में है जिसे 1947 में विभाजन के समय प्रसिद्ध वयोवृद्ध सन्त बाबा नारायण दास बत्रा मुल्तान से भारत लाये थे। फिल्म उल्लेख महावतार नरसिंह फिल्म के निर्माताओं ने कथानक को आकार देने हेतु विभिन्न ऐतिहासिक और शास्त्रीय सन्दर्भों को सम्मिलित किया है—विशेषतः प्रह्लादपुरी मंदिर के खंडहर, हम्पी में स्थित पुनःस्थापित जली हुई धर्मस्थली, और अहोबिला नव नरसिंह स्वामी मंदिरोंhttps://www.youtube.com/shorts/Q83ZSgrPktM जैसे पुरातात्विक स्थलों के अतिरिक्त विष्णु पुराण, नरसिंह पुराण, वराह पुराण तथा श्रीमद्भागवत पुराण जैसे पवित्र ग्रंथों से प्रेरणा ली गई है। फिल्म की सफलता और दर्शकों से इसका गहरा जुड़ाव लेखक की पवित्र ग्रंथों के प्रति उसकी अटूट निष्ठा का प्रतिफल है। किंवदन्ती लोग बढ़ी दृढता के साथ यह कहते हैं कि 15 शताब्दी के आसपास जब थक कि शेरशाह ने इस मन्दिर को तुड़वाकर एक मस्जिद नहीं बनवा दी थी तब तक यहाँ पर एक मन्दिर था जिसका स्तम्भ तथा छत सोने की बनी थी। वर्तमान मन्दिर का तब निर्माण हुआ जब यहाँ पर मस्जिद ढह गयी थी। कलकत्ता रिव्यू (1891) भी इसी ओर इशारा करती है कि यहाँ पर एक मन्दिर था जो अज्ञात कारणों से ध्वस्त हो गया था। सन्दर्भ श्रेणी:पाकिस्तान