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411 समाचार
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जम्मू और कश्मीर का संविधान

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जम्मू और कश्मीर का संविधान वह विधिक संविधान था जिसने भारतीय राज्य जम्मू और कश्मीर की राज्य सरकार के ढांचे को स्थापित किया।https://ceojk.nic.in/PDF/Extracts%20from%20the%20Constitution%20of%20Jammu%20and%20Kashmir.pdf March 2022 यह संविधान 17 नवंबर 1956 को अंगीकृत किया गया और 26 जनवरी 1957 को प्रभाव में आया। 5 अगस्त 2019 को भारत के राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित एक आदेश के माध्यम से इसे निरर्थक घोषित कर दिया गया और इस तिथि से यह लागू नहीं रहा। इसमें लद्दाख भी शामिल था। भारतीय संविधान ने जम्मू और कश्मीर को भारतीय राज्यों के बीच विशेष दर्जा प्रदान किया था, और यह भारत का एकमात्र राज्य था जिसका अलग संविधान था। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत, भारतीय संसद और संघीय सरकार का अधिकार क्षेत्र जम्मू और कश्मीर राज्य पर केवल सीमित मामलों में ही लागू होता था, और अन्य सभी मामलों में, जो संघीय सरकार को विशेष रूप से नहीं दिए गए थे, राज्य की विधानमंडल का समर्थन आवश्यक होता था। इसके अलावा, अन्य राज्यों के विपरीत, शेष शक्तियां राज्य सरकार के पास निहित थीं। इन संवैधानिक प्रावधानों के कारण, जम्मू और कश्मीर राज्य को भारतीय संविधान के भाग इक्कीस में उल्लेखित एक विशेष लेकिन अस्थायी स्वायत्तता प्राप्त थी। अन्य राज्यों से स्पष्ट और दृष्टिगत अंतर यह था कि 1965 तक जम्मू और कश्मीर में राज्य प्रमुख को "सदर-ए-रियासत" (राज्य प्रमुख) कहा जाता था, जबकि अन्य राज्यों में इस पद को "राज्यपाल" कहा जाता था। इसी प्रकार, राज्य सरकार के प्रमुख को "प्रधानमंत्री" कहा जाता था, जबकि अन्य राज्यों में इसे "मुख्यमंत्री" कहा जाता था। 5 अगस्त 2019 को भारत के राष्ट्रपति ने अनुच्छेद 370 के तहत "संविधान (जम्मू और कश्मीर पर लागू) आदेश, 2019 (सी.ओ. 272)"https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/special-status-of-jk-revoked-full-text-of-the-notification-on-kashmir/articleshow/70531782.cms Union territory of Jammu and Kashmir: Special status of J&K revoked: Full text of the notification on Kashmir The Economic Times जारी किया, जिसके माध्यम से भारतीय संविधान के सभी प्रावधान जम्मू और कश्मीर राज्य पर लागू कर दिए गए। इस आदेश ने जम्मू और कश्मीर के संविधान को उस तिथि से निरर्थक बना दिया। अब जम्मू और कश्मीर में भारतीय संविधान अन्य सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तरह लागू है। ऐतिहासिक पहलू भारत ने 15 अगस्त 1947 की आधी रात को ब्रिटेन से स्वतंत्रता प्राप्त की, और इसके साथ ही भारत के विभाजन के परिणामस्वरूप पाकिस्तान एक नए देश के रूप में अस्तित्व में आया। जम्मू और कश्मीर, जो उस समय एक रियासत था और ब्रिटिश सम्राट के अधीनस्थ था, महाराजा हरि सिंह के अधीन शासित था। स्वतंत्रता के समय महाराजा ने अपने राज्य को भारत या पाकिस्तान में विलय करने से बचने की कोशिश की (हालांकि भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के तहत यह विकल्प उपलब्ध नहीं था)। महाराजा हरि सिंह ने पाकिस्तान के साथ एक "स्टैंडस्टिल एग्रीमेंट" पर हस्ताक्षर किए। हालांकि, 6 अक्टूबर 1947 को, पाकिस्तान सरकार के समर्थन से पश्तो जनजातियों ने जम्मू और कश्मीर पर हमला कर दिया ताकि इसे बलपूर्वक पाकिस्तान में शामिल किया जा सके। महाराजा हरि सिंह ने भारत से सहायता की मांग की, और भारत ने जब विलय पत्र (इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन) पर हस्ताक्षर करने को कहा, तो महाराजा ने इस पर हस्ताक्षर कर दिए ताकि भारत उनकी रक्षा कर सके। विलय पत्र (इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन) ने भारत सरकार को केवल तीन विषयों - विदेश मामले, रक्षा, और संचार - पर सीमित अधिकार दिए। यह अन्य सैकड़ों रियासतों के विलय पत्रों के समान था, जो भारत सरकार और अन्य रियासतों के बीच हस्ताक्षरित हुए थे। हालांकि अन्य रियासतों ने बाद में विलय समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जम्मू और कश्मीर का भारत संघ के साथ संबंध विशेष परिस्थितियों से निर्धारित था। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संविधान में अनुच्छेद 370 शामिल किया गया। जम्मू और कश्मीर के संविधान को 1957 में तत्कालीन महाराजा (बाद में सद्र-ए-रियासत) डॉ. करण सिंह ने कानून के रूप में लागू किया।https://timesofindia.indiatimes.com/india/integral-review-of-article-370-overdue-but-needs-cooperation-not-confrontation-congress-leader-karan-singh/articleshow/35733023.cms Article 370: Integral review of Article 370 overdue, but needs cooperation not confrontation: Congress leader Karan Singh | India News - Times of India The Times of India 29 May 2014 http://middleeast.com/od/pakistan/a/kashmir-history-backgrounder.htm History and Background of the Kashmir Conflict 28 May 2014 10 July 2014 https://web.archive.org/web/20140710122014/http://middleeast.com/od/pakistan/a/kashmir-history-backgrounder.htm dead मुख्य विशेषताएं 2002 तक, भारतीय संविधान में 29 संशोधन किए गए थे।http://jklegislativeassembly.nic.in/Costitution_of_J%26K.pdf "Constitution of Jammu and Kashmir" 27 July 2020 https://web.archive.org/web/20140903234618/http://jklegislativeassembly.nic.in/Costitution_of_J%26K.pdf 3 September 2014 dead उस समय तक संविधान में 158 अनुच्छेद थे, जिन्हें 13 भागों और 7 अनुसूचियों में विभाजित किया गया था। अनुच्छेदों का विभाजन इस प्रकार था। प्रत्येक भाग के अंत में ब्रैकेट में दिए गए नंबर उस भाग में शामिल अनुच्छेदों को दर्शाते हैं। भाग I: प्रारंभिक (1-2) भाग II: राज्य सरकार (3-5) भाग III: स्थायी निवासी (6-10) भाग IV: राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांत (11-25) भाग V: कार्यपालिका (26-45) राज्यपाल (26-34) मंत्रिपरिषद (35-41) महाधिवक्ता (42) सरकारी कार्य का संचालन (43-45) भाग VI: राज्य विधानमंडल (46-92) राज्य विधानमंडल की संरचना (46-50) सामान्य प्रावधान (51-56) राज्य विधानमंडल के अधिकारी (57-63) कार्य संचालन (64-67) सदस्यों की अयोग्यता (68-71) राज्य विधानमंडल और उसके सदस्यों की शक्तियां, विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां (72-73) विधायी प्रक्रिया (74-78) वित्तीय मामलों में प्रक्रिया (79-84) सामान्य प्रक्रिया (85-90) राज्यपाल की विधायी शक्ति (91) संवैधानिक तंत्र का विघटन (92) भाग VII उच्च न्यायालय (93-113) अधीनस्थ न्यायालय (109-113) भाग VIII: वित्त, संपत्ति और अनुबंध (114-123) भाग IX: लोक सेवाएँ (124-137) लोक सेवा आयोग (128-137) भाग X: चुनाव (138-142) भाग XI: विविध प्रावधान (143-146) भाग XII: संविधान संशोधन (147) भाग XIII: ट्रांसमोनल मुद्दे (153-158) भाग XIII में अनुच्छेद 148 से 152 को हटा दिया गया है। अनुसूचियों: अनुसूची I: निकाल दिया गया (निरस्त) अनुसूची II: राज्यपाल की उपलब्धियाँ, भत्ते और विशेषाधिकार अनुसूची III: विधान सभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष तथा विधान परिषद के सभापति और उपसभापति के वेतन और भत्ते अनुसूची IV: उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन, भत्ते और सेवा की अन्य शर्तें। अनुसूची V: शपथ या प्रतिज्ञान के प्रारूप अनुसूची VI: क्षेत्रीय भाषाएँ अनुसूची VII: दलबदल के आधार पर अयोग्यता के संबंध में प्रावधान यद्यपि भारत में एकात्मक नागरिकता है, जम्मू और कश्मीर के संविधान में भाग III में स्थायी निवास (परमानेंट रेजीडेंसी) की अवधारणा को परिभाषित किया गया है। हुर्रियत अक्सर स्थायी निवास की इस अवधारणा पर झूठ फैलाता है और गलत तरीके से दावा करता है कि जम्मू और कश्मीर के लोग दोहरी नागरिकता (ड्यूल सिटिजनशिप) का आनंद लेते हैं। हालांकि, इस पर सुप्रीम कोर्ट का रुख बहुत स्पष्ट है। इसके शब्दों में: "हम यह भी जोड़ सकते हैं कि जम्मू और कश्मीर के स्थायी निवासी भारत के नागरिक हैं, और यहां दोहरी नागरिकता नहीं है जैसा कि दुनिया के अन्य संघीय संविधानों में कहीं-कहीं देखा जाता है।"https://www.thehindu.com/news/national/JK-has-no-sovereignty-SC/article16897124.ece J&K has no sovereignty: SC Ashiq Peerzada 2016-12-18 The Hindu 2019-04-03 en-IN 0971-751X --भारत का सर्वोच्च न्यायालय''' उद्देशिका जम्मू और कश्मीर के संविधान की उद्देशिका इस प्रकार है: "हम, जम्मू और कश्मीर राज्य के लोग, 26 अक्टूबर, 1947 को भारत संघ में इस राज्य के प्रवेश के अनुसरण में, इस राज्य और भारत संघ के बीच मौजूदा संबंध को एक अभिन्न अंग के रूप में परिभाषित करने का संकल्प लेते हुए, और अपने लिए यह सुनिश्चित करने हेतु— न्याय, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक; स्वतंत्रता, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की; समानता, स्थिति और अवसर की; और हम सभी के बीच भाईचारा, जो व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता सुनिश्चित करता है; अपनी संविधान सभा में, इस सत्रहवें दिन, नवंबर, 1956 को, हम इसे अपनाते हैं, अधिनियमित करते हैं, और इसे अपने लिए लागू करते हैं।" — जम्मू और कश्मीर के संविधान की उद्देशिका। यह प्रस्तावना, भारतीय संविधान की उद्देशिका से लगभग शब्दशः मिलती-जुलती है। संसद का अधिकार क्षेत्र भारतीय संविधान के भाग इक्कीस, जो "अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष प्रावधानों" से संबंधित है, के तहत जम्मू और कश्मीर राज्य को अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जा प्रदान किया गया था। हालांकि इसे प्रथम अनुसूची में 15वें राज्य के रूप में शामिल किया गया था, लेकिन संविधान के सभी प्रावधान, जो अन्य राज्यों पर लागू होते हैं, जम्मू और कश्मीर पर लागू नहीं थे।http://jklaw.nic.in/central_acts.pdf Central acts applicable to J&K state 23 August 2014 22 जून 2014 https://web.archive.org/web/20140622181256/http://jklaw.nic.in/central_acts.pdf dead भारत सरकार जम्मू और कश्मीर में आपातकाल की घोषणा कर सकती थी और विशेष परिस्थितियों में राज्यपाल शासन लागू कर सकती थी। रक्षा, विदेश संबंध, संचार और वित्त से संबंधित मामलों का अधिकार भारतीय संविधान के अंतर्गत था। जम्मू और कश्मीर के संबंध में संघीय विधायिका का अधिकार अन्य राज्यों की तुलना में बहुत सीमित था। 1963 तक, संसद केवल संघ सूची में शामिल विषयों पर कानून बना सकती थी, लेकिन समवर्ती सूची (7वीं अनुसूची के तहत) के मामलों में उसका कोई अधिकार नहीं था। संसद को राज्य के लिए प्रिवेंटिव डिटेंशन (निवारक निरोध) कानून बनाने की शक्ति नहीं थी; यह अधिकार केवल राज्य विधायिका के पास था। आपातकालीन प्रावधान भारत संघ को अनुच्छेद 360 के तहत किसी राज्य में वित्तीय आपातकाल घोषित करने का अधिकार नहीं है। संघ केवल युद्ध या बाहरी आक्रमण की स्थिति में ही राज्य में आपातकाल घोषित कर सकता है। आंतरिक गड़बड़ी या उसके आसन्न खतरे के आधार पर घोषित किया गया कोई भी आपातकालीन उद्घोष राज्य पर तब तक लागू नहीं होगा जब तक: 1. वह राज्य सरकार के अनुरोध पर या उसकी सहमति से नहीं किया गया हो, या 2. यदि ऐसा नहीं किया गया हो, तो उसे राष्ट्रपति द्वारा उस राज्य में राज्य सरकार के अनुरोध या सहमति के बाद लागू न किया गया हो। दिसंबर 1964 में, अनुच्छेद 356 और 357 को राज्य तक विस्तारित किया गया। मौलिक कर्तव्य, नीति निर्देशक सिद्धांत और मौलिक अधिकार भारत के संविधान का भाग IV, अनुच्छेद 36-51 (राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत) और भाग IVA, अनुच्छेद 51A (मौलिक कर्तव्य) जम्मू और कश्मीर पर लागू नहीं होते थे। अन्य मौलिक अधिकारों के अलावा, संविधान के अनुच्छेद 19(1)(f) और 31(2) अभी भी जम्मू और कश्मीर पर लागू थे; इसलिए इस राज्य में संपत्ति का मौलिक अधिकार अभी भी संरक्षित था। यह एकमात्र राज्य था जिसे राज्य में आने वाले धन और उसके उपयोग का विस्तृत विवरण देने की आवश्यकता नहीं थी। भारतीय संवैधानिक इतिहास में अब तक केवल एक मौलिक अधिकार जोड़ा गया है, जो है शिक्षा का अधिकार अधिनियम। यह अधिकार भी जम्मू और कश्मीर में लागू नहीं किया गया था। राजभाषा संविधान के भाग XVII के प्रावधान जम्मू और कश्मीर पर केवल उन मामलों में लागू होते हैं, जो (i) संघ की राजभाषा, (ii) एक राज्य और दूसरे राज्य या राज्य और संघ के बीच संचार के लिए राजभाषा, और (iii) सर्वोच्च न्यायालय में कार्यवाही की भाषा से संबंधित हैं। उर्दू राज्य की आधिकारिक भाषा है, लेकिन अंग्रेजी का उपयोग भी आधिकारिक उद्देश्यों के लिए तब तक किया जा सकता है जब तक राज्य विधानमंडल अन्यथा प्रावधान न करे। भारत सरकार के साथ संबंध जम्मू और कश्मीर के संविधान के भाग 2 में अनुच्छेद 3 में कहा गया था: "भारत संघ के साथ राज्य का संबंध: जम्मू और कश्मीर राज्य भारत संघ का हिस्सा है और रहेगा।"Constitution of Jammu and Kashmir http://jklegislativeassembly.nic.in/Costitution_of_J&K.pdf Official Website of J & K Legislative Assembly 6 May 2015 3 Read page 3 of the document or page 21 of pdf format. https://web.archive.org/web/20140903234618/http://jklegislativeassembly.nic.in/Costitution_of_J%26K.pdf 3 September 2014 deadhttps://indianexpress.com/article/india/sc-rejects-hc-ruling-no-sovereignty-for-jk-outside-constitution-of-india-4431380/ Supreme Court rejects HC ruling: No sovereignty for J-K outside Constitution of India 17 December 2016 भाग 2 का अनुच्छेद 5 "कार्यपालिका" और "विधानमंडल" की शक्तियों के दायरे के बारे में था। इसमें उल्लेख किया गया था: "जम्मू और कश्मीर विधानसभा के पास उन सभी मामलों पर कार्यपालिका और विधायी शक्ति है, जिन पर भारत के संविधान के प्रावधानों के तहत भारत की संसद को राज्य के लिए कानून बनाने का अधिकार नहीं है।" जिन क्षेत्रों में भारत सरकार जम्मू और कश्मीर के लिए कानून बना सकती थी, उनमें रक्षा, विदेश मामले, वित्त और संचार शामिल थे।Inside "Indian held Kashmir". http://tribune.com.pk/story/843534/inside-indian-held-kashmir/ 7 May 2015 The Express Tribune 25 February 2015 भाग 12 का अनुच्छेद 147 जम्मू और कश्मीर के संविधान में संशोधन से संबंधित था। इसमें यह कहा गया था: "राज्य विधानसभा में कोई भी विधेयक उन अनुच्छेद 3 और 5 में संशोधन या परिवर्तन के लिए प्रस्तुत या प्रस्तावित नहीं किया जाएगा।"Article 147 of Constitution of Jammu and Kashmir http://jklegislativeassembly.nic.in/Costitution_of_J&K.pdf Official Website of Jammu and Kashmir Legislative Assembly 7 May 2015 67 Document page 67, PDF page 85. https://web.archive.org/web/20140903234618/http://jklegislativeassembly.nic.in/Costitution_of_J%26K.pdf 3 September 2014 dead पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के साथ संबंध जम्मू और कश्मीर के संविधान के भाग VI के अनुच्छेद 48 में पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर को "पाकिस्तान अधिग्रहित क्षेत्र" (पीओके) के रूप में परिभाषित किया गया है।Article 48 of Constitution of Jammu and Kashmir http://jklegislativeassembly.nic.in/Costitution_of_J&K.pdf Official Website of Jammu and Kashmir Legislative Assembly 7 May 2015 16 Page 16 of document and page 34 of pdf https://web.archive.org/web/20140903234618/http://jklegislativeassembly.nic.in/Costitution_of_J%26K.pdf 3 September 2014 dead जम्मू और कश्मीर की राज्य विधान सभा में कुल 111 सीटें थीं। इनमें से 24 सीटें पाकिस्तान-प्रशासित कश्मीर के प्रतिनिधियों के लिए आरक्षित थीं, जो तब तक खाली रहने वाली थीं जब तक पाकिस्तान कश्मीर पर कब्जा समाप्त नहीं करता।Article 48 of Constitution of Jammu and Kashmir http://jklegislativeassembly.nic.in/Costitution_of_J&K.pdf Official Website of Jammu and Kashmir Legislative Assembly 7 May 2015 17 Page 17 of document and page 35 of pdf https://web.archive.org/web/20140903234618/http://jklegislativeassembly.nic.in/Costitution_of_J%26K.pdf 3 September 2014 dead मिश्रित जम्मू और कश्मीर के स्थायी निवासियों को राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली रोजगार, राज्य में अचल संपत्ति अधिग्रहण, राज्य में बसने, और छात्रवृत्ति व अन्य प्रकार की सहायता के संबंध में विशेष अधिकार दिए गए थे। पांचवीं अनुसूची, जो अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण से संबंधित है, और छठी अनुसूची, जो जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित है, जम्मू और कश्मीर राज्य पर लागू नहीं होती थी। राज्य के संविधान के प्रावधानों (संघ के साथ राज्य के संबंधों से संबंधित प्रावधानों को छोड़कर) को राज्य विधानसभा के दो-तिहाई बहुमत से पारित अधिनियम द्वारा संशोधित किया जा सकता था। यदि ऐसा संशोधन राज्यपाल या निर्वाचन आयोग को प्रभावित करता है, तो इसे प्रभावी होने के लिए राष्ट्रपति की सहमति आवश्यक होती थी। भारत के संविधान का कोई भी संशोधन जम्मू और कश्मीर पर लागू नहीं हो सकता था जब तक कि इसे अनुच्छेद 370(1) के तहत जम्मू और कश्मीर के राष्ट्रपति द्वारा आदेश के माध्यम से विस्तारित न किया जाए।http://www.thehindu.com/opinion/editorial/the-importance-of-article-370/article7762192.ece The importance of Article 370 The Hindu 2017-05-06 en कोई भी विधेयक या संशोधन विधानमंडल के किसी भी सदन में प्रस्तुत या प्रस्तावित नहीं किया जा सकता था जो निम्नलिखित प्रावधानों में कोई परिवर्तन करने का प्रयास करता हो: (a) जम्मू और कश्मीर राज्य भारत संघ का अभिन्न अंग है और रहेगा (अनुच्छेद 3)। (b) राज्य की कार्यपालिका और विधायी शक्तियां उन मामलों तक नहीं फैलतीं जिन पर संसद को राज्य के लिए कानून बनाने की शक्ति है (अनुच्छेद 5)। (c) भारत के संविधान के वे प्रावधान जो राज्य के संबंध में लागू होते हैं (अनुच्छेद 147 (c) और अनुच्छेद 147(a))। इन्हें भी देखें रणबीर दंड संहिता अनुच्छेद 356 (भारत का संविधान) अनुच्छेद 370 (भारत का संविधान) आज़ाद जम्मू और कश्मीर का अंतरिम संविधान (1974) भाग 21 (भारत का संविधान) अनुच्छेद 35 (भारत का संविधान) सन्दर्भ 2 बाहरी कड़ियाँ जम्मू और कश्मीर का संविधान जम्मू और कश्मीर सरकार। (23 नवंबर 2018 को संग्रहीत)। सूर्यभान सिंह बिलावरिया, जम्मू और कश्मीर की संवैधानिक स्थिति विधिक सेवा भारत श्रेणी:भारत के ऐतिहासिक दस्तावेज़ श्रेणी:जम्मू और कश्मीर श्रेणी:भारत का संविधान श्रेणी:भारत सरकार श्रेणी:भारत गणराज्य का इतिहास