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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

बभ्रुवाहन

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मणिपुर (महाभारत) thumb|left|120px|अर्जुन और उसके पुत्र बभ्रुवाहन के मध्य युद्ध और नागा राज़मनमा की लगभग सन् १९५८ में बनाया गया चित्र। thumb|अर्जुन जब अपने पुत्र बभ्रुवाहन द्वारा मार दिया जाता है। वभ्रुवाहन, महाभारत का एक पात्र है। वह अर्जुन का एक पुत्र था जो चित्रवाहन की पुत्री मणिपुर (महाभारत) की राजकुमारी चित्रांगदा से उत्पन्न हुआ था, जब अर्जुन अपने वनवास काल में मणिपुर गए थे। चित्रवाहन की मृत्यु के बाद मणिपुर के राजा बने। मणिपुर का नाम अब mansar है| mansar मैं बहुत बड़ी झील बी हैं, इसको वभ्रुवाहन ने बनाया था lयह जम्मू के ऊधमपुर डिस्ट्रिक्ट के तहसील मजलता मैं है|युधिष्ठिर के अश्वमेध यज्ञ बभ्रुवाहन को उनकी माता चित्रांगदा ने यह नहीं बताया की अर्जुन ही उनके पिताजी है अश्व को पकड़ लेने पर अर्जुन से इनका घोर युद्ध हुआ अ विजयी हुए। किंतु माता के आग्रह पर इन्होंने मृतसंजीवक मणि द्वारा समरभूमि में अचेत पड़े अर्जुन को चैतन्य किया और अश्व को उन्हें लौटाते हुए यह अपनी माताओं-चिंत्रांगदा और उलूपी के साथ युधिष्ठिर के यज्ञ में सम्मिलित हुए (जैमि, अश्व., 37, 21-40; महा. आश्व. 79-90)। दंतकथा जन्म मणिपुर पूर्वी भारत की राजधानी था और वहाँ के राजा चित्रवाहन थे। उनके चित्रागंदा नामक एक पुत्री थी। उनके राजवंश में यह परम्परा थी कि वंश में पहली बार एक पुत्री ने जन्म लिया था और कोई उत्तराधिकारी नहीं था। चित्रवाहन का अन्य कोई उत्तराधिकारी नहीं होने के कारण उन्होंने अपनी पुत्री को ही युद्ध और शासन के लिए प्रशिक्षित किया। चित्रागंदा ने भूमि और प्रजा की रक्षा के लिए अच्छा प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया था। यह जानकारी रविन्द्रनाथ टैगोर के नाटक चित्रा में वर्णित है।The 100 Most Influential Writers of All Time https://archive.org/details/100mostinfluenti0000unse_e3x0 20 December 2009 242 J. E. Luebering The Rosen Publishing Group, Inc 9781615300051 टैगोर के नाटक में चित्रागंदा एक पुरुष योद्धा के वस्त्र में दिखाया जाता है।Chitra - A Play in One Act 1 Rabindranath Tagore Read Books Ltd 2015 9781473374263 अर्जुन जब चित्रागंदा से मिलता है तो वो दोनों एक दूसरे से प्यार करने लग जाते हैं। उनके विवाह से चित्रांगदा ने एक पुत्र को जन्म दिया जिसका नाम बभ्रुवाहन था। अर्जुन के छोड़ने के बाद चित्रांगदा ने बभ्रुवाहन का पालन पोषण किया और युद्ध के लिए प्रशिक्षित किया।Myths and Legends from India - Great Women Bhanu Sharada Macmillan India Limited 1997 Chennai 0-333-93076-2 7–10 अश्वमेघ अश्वमेघ यज्ञ के समय बभ्रुवाहन ने पाण्डवों की सेना को परास्थ किया। उसके बाद भीम को मुर्च्छित कर दिया। बाद में वृषकेतु से युद्ध करते हुये बभ्रुवाहन ने उसे भी हरा दिया। इन सभी से क्रोधित होकर अर्जुन स्वयं युद्ध करने लगता है और अर्जुन युद्ध में भारी पड़ता है लेकिन अन्त में बभ्रुवाहन की जीत होती है। बभ्रुवाहन एक अस्त्र से अर्जुन का वध कर देता है लेकिन बाद में नाग राजकुमारी उलूपी एक अपनी मणि नागमणि और कृष्ण की सहायता से अर्जुन को वापस जीवन देती है। इसके बाद सभी हस्तिनापुर को लौट जाते हैं। लोकप्रिय संस्कृति में बभ्रुवाहन की कहानी तेलुगू फ़िल्मों में 1942 और 1964 में प्रसारित हुई। सन् 1977 में कन्नड़ फ़िल्म भी प्रसारित हुई। सन् 1964 की तेलुगू फ़िल्म बभ्रुवाहन का लेखन और निर्देशन समुद्रला ने किया। बभ्रुवाहन पर पहली हिन्दी फ़िल्म सन् 1951 में नानाभाई भट्ट ने बनाई जिसमें शशि कपूर और एसएन त्रिपाठी ने अभिनय किया था। दूसरी फ़िल्म वीर अर्जुन नमा से सन् 1952 में जारी हुई जिसमें महिपाल, निरूपा रॉय और त्रिलोक कपूर ने अभिनय किया। सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ एन्साइकलोपीडिया फॉर एपिक्स ऑफ एंशियंट इंडिया में बभ्रुवाहन (अंग्रेज़ी में) श्रेणी:पौराणिक कथाएँ श्रेणी:हिन्दू संस्कृति