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श्रेणी (गिल्ड)
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जनवरी 2017
300px|right|thumb|विंड्सर गिल्डहाल जो मूलतः श्रेणियों का मिलन-स्थल था। इसके अलावा यह टाउन हाल था और यहाँ मजिस्ट्रेट भी बैठते थे।
श्रेणियाँ (Guild गिल्ड) मूलत: शिल्पकारों (craftsmen) और व्यापारियों के संघ होती थीं। इनका लक्ष्य था सदस्यों की सहायता करना। मध्यकालीन युग में श्रमविभाजन सरल था। बड़े बड़े पेचीदे हथियारों के स्थान पर सरल हथियारों का प्रयोग होता था। नगर औद्योगिक समुदायों के केंद्र होते थे। वहाँ दस्तकारी की वस्तुएँ तैयार होती थीं। वहाँ के रहनेवाले शिल्पकार श्रेणियों में संगठित थे। तत्कालीन आर्थिक संगठन में इन श्रेणियों का महत्वपूर्ण स्थान था। पेशे के आधार पर ही इनका संगठन होता था। एक श्रेणी के लोग एक ही प्रकार का पेशा करते थे। पेशे के लिए आवश्यक प्रशिक्षण की भी व्यवस्था इन्हीं श्रेणिययों के हाथ में थी। ये श्रेणियाँ ऐसे लोगों को भी रखती थीं जो दूर दूर के गाँवों तथा बाजारों में जाकर दस्तकारी की वस्तुओं को बेचते थे। इनका लक्ष्य केवल सदस्यों के हितों की रक्षा करना ही नहीं होता था बल्कि इनका महत्व कला के ऊँचे स्तर को कायम रखने तथा उनके उचित मूल्य के निर्धारण के दृष्टिकोण से भी था। सदस्यों के परिवार के अन्य सदस्य भी उसी पेशे में लग जाते थे। इस प्रकार पुश्त-दर-पश्त उत्तराधिकार के रूप में ज्ञान पहुंचता था।
शिल्प तथा व्यापारिक श्रेणियों के अतिरिक्त धार्मिक, राजनीतिक तथा सामाजिक समस्याओं के समाधान हेतु भी श्रेणियों का संगठन हुआ। इंग्लैंड में श्रेणियों का प्रारंभ 9वीं शताब्दी से होता है। उस समय राज्य द्वारा इन श्रेणियों को कुछ विशेष सुविधाएँ और अधिकार प्राप्त थे। स्कूल स्थापित करना, सड़कें और पुल बनवाना तथा विपत्ति के मारे हुए सदस्यों की रक्षा करना इन श्रेणियों के प्रधान लक्ष्य थे। प्रारंभ में केवल व्यापारिक श्रेणियाँ थीं परंतु बाद में एकाधिकार प्राप्त हो जाने के कारण इन लोगों ने साधारण शिल्पियों का शोषण प्रारंभ कर दिया। इस कारण शिल्पियों ने भी अपने आपको श्रेणियों में संगठित किया। समय के साथ इनकी उपादेयता भी बढ़ती गई और श्रेणियों ने बहुत ही दृढ़ तथा सुव्यवस्थित संगठन का रूप लिया। साधारण नागरिकों तथा अमीरों के संघर्ष में तो इन श्रेणियों ने साधारण नागरिकों के हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान किया। 13वीं शताब्दी तक इनका संगठन बहुत दृढ़ हो चुका था और इन्हें राजनीतिक अधिकार भी प्राप्त होने लगे थे। नगरपालिकाओं का संगठन इन्हीं श्रेणियों के आधार पर हुआ तथा उनके संविधान भी श्रेणियों के आधार पर बने। आगे चलकर श्रेणियों का महत्व इतना अधिक बढ़ा कि जो कोई भी स्वायत्तशासन में भाग लेना चाहता था, उसके लिए आवश्यक सा हो गया कि वह श्रेणी का सदस्य हो जाए। प्राचीन भारत के नगर आयोग भी इन्हीं श्रेणियों के वृहत् रूप थे और नगर आयोगों के जो कार्य थे उन्हीं से मिलते जुलते कार्य मध्यकाल में इंग्लैंड और जर्मनी आदि देशों में इन श्रेणियों के थे। आगे चलकर तो ये श्रेणियाँ इतनी संपन्न हो गईं कि स्वतंत्र व्यवसाय के लोग भी इनमें सम्मिलित होने लगे। अधिकांश श्रेणियों का संगठन लोकतंत्रात्मक आधार पर था। 13वीं और 14वीं शताब्दी इंग्लैंड के औद्योगिक और व्यावसायिक विकास के इतिहास में महत्वपूर्ण काल है और इन दो शताब्दियों में श्रेणियों का विकास भी बड़ी ही तीव्र गति से हुआ। इस युग में यूरोप के अन्य देशों में भी श्रेणियों का विकास हुआ और उनके संगठन का रूप तथा उनके लक्ष्य प्राय: एक से रहे।
इन श्रेणियों का लक्ष्य केवल अपने सदस्यों की स्पर्धा से रक्षा करना ही नहीं अपितु वस्तु की उत्कृष्टता को कायम रखना भी था। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु सदस्यों द्वारा प्रतिपालकों (Warden) का चुनाव किया जाता था।
यद्यपि व्यापारिक श्रेणियों तथा शिल्प श्रेणियों के हित विपरीत थे तथापि इन दोनों में प्रत्यक्ष संघर्ष का वर्णन प्राय: नहीं के ही समान है। 16वीं शताब्दी में अवश्य संघर्ष हुए और इनके द्वारा शिल्पियों ने कुलीन सरकार के जुओं का अपने कंधे से फेक दिया 15वीं और 16वीं शताब्दी में हमें विभिन्न श्रेणियों के एक में मिल जाने के दृष्टांत दिखलाई देते हैं।
औद्योगिक क्रांति के पहले से ही श्रेणियों की विच्छिन्नता के लक्षण स्पष्ट होने लगे थे। औद्योगिक क्रांति ने उत्पादन के रूप और पैमाने में आमुल परिवर्तन कर एक नई आर्थिक प्रणाली को जन्म दिया। श्रेणियाँ, जिनका रूप अब भी मध्यकालीन था, अपने आपको नया रूप न दे सकीं। उनकी उपादेयता समाप्तप्राय हो गई। परिणामस्वरूप उनका अंत भी हो गया। Shiva
संदर्भ ग्रंथ
टासिग : अर्थशास्त्र के सिद्धांत;
इंसाइक्लोपोडिया ब्रिटानिका; इनसाइक्लोपीडिया अमेरिकाना;
विंसेंट ए स्मिथ : 'भारत का प्राचीन इतिहास' तथा 20वीं शताब्दी शब्दकोश
बाहरी कड़ियाँ
Medieval guilds
St. Eloy's Hospice The last Guild House in Utrecht, Netherlands
[[श्रेणी:
आर्थिक इतिहास]]
श्रेणी:श्रम
श्रेणी:व्यवसाय
श्रेणी:शिल्पकारी