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भगवत मुदित
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मार्च 2021
भगवत मुदित के पिता माधव मुदित चैतन्य संप्रदाय के भक्त सुकवि तथा आगरा के निवासी थे। इनका समय सं. 1630 तथा सं. 1720 वि. के मध्य में था। यह आगरा में शुजाअ के दीवान थे और वहाँ से विरक्त होकर वृंदावन में आ बसे थे। इन्हें हित संप्रदाय के भक्तों का भी सत्संग प्राप्त था और इन्होंने इस संप्रदाय के 35 भक्तों का चरित्र रसिक अनन्यमाल में ग्रंथित किया है। प्रबोधानंद सरस्वती के अनेक वृंदावन शतकों में से एक का इन्होंने पद्यानुवाद किया है, जो सं. 1707 की रचना है। इनके दो सौ सात स्फुट पद अब तक मिले हैं। यह भी चैतन्य संप्रदाय के राधारमणी वैष्णव थे।
सन्दर्भ
श्रेणी:हिन्दी साहित्यकार