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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

गुरदयाल सिंह

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गुरदयाल सिंह गुरदयाल सिंह 200px गुरदयाल सिंह 1933 01 10 yes 2016 8 16 1933 1 10 y death_place भारतीय पंजाबी उपन्यास मढ़ी दा दीवा मढ़ी दा दीवा (1964), [[अंधे घोड़े का दान (Punjabi:ਅੰਨ੍ਹੇ ਘੋੜੇ ਦਾ ਦਾਨ]] गुरदयाल सिंह(10 जनवरी 1933 - 16 अगस्त 2016) एक पंजाबी साहित्यकार थे जो उपन्यास और कहानी लेखक थे। इन्हें 1999 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। http://punjabitribuneonline.com/2012/07/%E0%A8%AA%E0%A9%B0%E0%A8%9C%E0%A8%BE%E0%A8%AC%E0%A9%80-%E0%A8%A8%E0%A8%BE%E0%A8%B5%E0%A8%B2-%E0%A8%A6%E0%A8%BE-%E0%A8%B9%E0%A8%BE%E0%A8%B8%E0%A8%B2-%E0%A8%97%E0%A9%81%E0%A8%B0%E0%A8%A6%E0%A8%BF/ ਪੰਜਾਬੀ ਨਾਵਲ ਦਾ ਹਾਸਲ ਗੁਰਦਿਆਲ ਸਿੰਘ ਖ਼ਬਰ ਲੇਖ ਜੁਲਾਈ ੨੧, ੨੦੧੨ ਪੰਜਾਬੀ ਟ੍ਰਿਬਿਊਨ ਸਤੰਬਰ ੨੧, ੨੦੧੨ उन्होंने अपनी प्रथम कहानी भागों वाले प्रो.मोहन सिंह के साहित्य मैगजीन पंज दरिया में प्रकाशित की थी। उनके पंजाबी साहित्य में आने से पंजाबी उपन्यास में बुनियादी तबदीली आई थी।उनके उपन्यास मढ़ी दा दीवा , [[अंधे घोड़े का दान का सभी पंजाबी भाषाओँ में अनुवाद हो चुक्का है और इन की कहाँनीयों पर अधारत फ़िल्में भी बनी हैं। जीवन श्री गुरदयाल सिंह का जन्म 10 जनवरी 1933 को उनके नानका गाँव भैनी फत्ता जिला बरनाला में हुआ।उनके पिता का नाम श्री जगत सिंह और माता का नाम निहाल कौर था।वो पंजाब के जैतो गाँव के रहने वाले थे।उनके तीन भाई और एक बहन थी।घरेलू कारणों की वजह के कारण उन्होंने बचपन में अपनी पढ़ाई छोड़ अपना पुश्तैनी बढई काम करना शुरू कर दिया।बाद में उन्होंने कड़ी मेहनत करके उच्च विद्या हासिल करके युनिवर्सटी में प्राध्यापक की पदवी प्राप्त की।उनका बलवंत कौर के साथ विवाह हुआ और उनके घर एक बेटा और एक बेटी हुई।ज्ञानपीठ पुरस्कारविजेता श्री गुरदयाल सिंह का 16 अगस्त 2016 को निधन हो गया16 ਅਗਸਤ 2016http://m.dailyhunt.in/news/india/punjabi/punjabi-news-online-epaper-punjabin/madi-da-diva-navalakar-guradiaal-singh-di-maut-newsid-56781421 संग्रहीत प्रति 20 अगस्त 2016 https://web.archive.org/web/20160829060708/http://m.dailyhunt.in/news/india/punjabi/punjabi-news-online-epaper-punjabin/madi-da-diva-navalakar-guradiaal-singh-di-maut-newsid-56781421 29 अगस्त 2016 live रचनाएं उपन्यास मढ़ी का दीवा (1964) अन्होए रेते दी इक मुठी कुवेला अद्ध चाननी रात आथण उग्गण अंधे घोड़े का दान पहु फुटाले तों पहिलां परसा (1992) आहन (2009) कहानी सग्रह सग्गी फुल्ल चन्न डा बूटा ओपरा घर कुत्ता ’ते आदमी मस्ती बोटा रूखे मिस्से बन्दे बेगाना पिंड चुनिन्दा कहानिया पक्का टिकाना करीर दी धिनरी मेरी प्रतिनिध रचना नाटक फरीदा रातीं वड्डीआं विदैगी तों पिछों निक्की मोटी गल गद पंजाब के मेले और त्यौहार दुखिया दास कबीर है नियाण मत्तीआं (आतम कथा -1) दूजी देही ਦੇਹੀ (आतम कथा-2) सत्जुग्ग दे औन तक्क डगमग छाड़ रे मन बाओरा लेखक का अनुभव ते सृजन प्रकिरिया बम्बई शहर का सवा पहर बचों के लिए बकलम खुद टुक्क खोह लए कांवां लिखतम बाबा खेमा गप्पीयाँ डा पिओ महांभारत धरत सुहावी तिनं कदम धरती खट्टे मीठे लोक जीवन दासी गंगा कालू कौतकी ढाई कदम धरती जीवन दासी गंगा (२) सन्मान गुरदयाल सिंह ने 1998 में पदम् श्री इनाम हासिल किया । http://www.ajitjalandhar.com/20120901/faridkot.php ਹਮੇਸ਼ਾ ਵਿਵਸਥਾ ਵਿਰੋਧੀ ਹੀ ਰਿਹਾ ਹੈ ਪੰਜਾਬੀ ਸਾਹਿਤ- ਪ੍ਰੋ: ਗੁਰਦਿਆਲ ਸਿੰਘ ਖ਼ਬਰ ਸਤੰਬਰ ੧, ੨੦੧੨ ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਅਜੀਤ ਸਿਤੰਬਰ ੨੧, ੨੦੧੨ 5 दिसंबर 2023 https://web.archive.org/web/20231205083541/https://www.ajitjalandhar.com/20120901/faridkot.php dead इसके इलावा उन्होंने 1999 में ज्ञानपीठ पुरस्कारhttp://www.quamiekta.com/2012/06/01/14824/ ਪੰਜਾਬੀ ਭਵਨ ਲੁਧਿਆਣਾ ਵਿਖੇ ਵਿਸ਼ਵ ਸਾਹਿਤ ਦੇ ਸ਼ਾਹਕਾਰ ਨਾਵਲ ਪੁਸਤਕ ਲੋਕ ਅਰਪਣ QuamiEkta.com ਜੂਨ ੧, ੨੦੧੨ ਸਿਤੰਬਰ ੨੧, ੨੦੧੨ https://web.archive.org/web/20160821050337/http://www.quamiekta.com/2012/06/01/14824/ 21 अगस्त 2016 dead और कई अन्य पुरस्कार भी प्राप्त किये| सन्दर्भ श्रेणी:ज्ञानपीठ सम्मानित श्रेणी:साहित्य अकादमी फ़ैलोशिप से सम्मानित‎ श्रेणी:साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत पंजाबी भाषा के साहित्यकार श्रेणी:1933 में जन्मे लोग श्रेणी:२०१६ में निधन