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भक्ति यादव
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1926 4 3 y 2017 8 14 1926 4https://www.bhaskar.com/news/c-8-padmashree-doctor-bhakti-yadav-died-indore-id0505-NOR.html 1 लाख डिलिवरी कराने वाली 91 साल की डाॅ. दादी नहीं रहीं, मोदी ने दी श्रद्धांजलि 15 अगस्त 2017 https://web.archive.org/web/20170815043242/https://www.bhaskar.com/news/c-8-padmashree-doctor-bhakti-yadav-died-indore-id0505-NOR.html 15 अगस्त 2017 live भारतीय भारतीय हिन्दू स्त्री रोग विशेषज्ञा MBBS, MS पद्मश्री
डॉक्टर भक्ति यादव (3 अप्रैल, १९२६ - १४ अगस्त, २०१७) भारत की एक् समाजसेवी चिकित्सक थीं। वे निर्धन लोगों की निःशुल्क चिकित्सा करतीं थीं। उन्हें वर्ष २०१७http://www.indiatimes.com/news/india/indore-s-1st-woman-doctor-who-s-been-treating-patients-for-free-since-1948-to-get-padma-shri-270289.html इंडिया टाइम्स 27 जनवरी 2017 https://web.archive.org/web/20170127031327/http://www.indiatimes.com/news/india/indore-s-1st-woman-doctor-who-s-been-treating-patients-for-free-since-1948-to-get-padma-shri-270289.html 27 जनवरी 2017 live मे पद्मश्री http://hindi.eenaduindia.com/State/MadhyaPradesh/2017/04/20132811/Padmashri-award-given-by-collector-to-Bhakti-Yadav.vpf कलेक्टर ने दिया पद्मश्री अवार्ड अभिगमन तिथि 20-04-2017 21 अप्रैल 2017 https://web.archive.org/web/20170421202246/http://hindi.eenaduindia.com/State/MadhyaPradesh/2017/04/20132811/Padmashri-award-given-by-collector-to-Bhakti-Yadav.vpf 21 अप्रैल 2017 dead से सम्मानित किया गया। अधिक उम्र होने की वजह से डॉक्टर उस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकी थीं अतः नियमानुसार इंदौर कलेक्टर ने उन्हें उनके घर पर जा कर पुरुस्कार प्रदान किया। वर्ष 1952http://aajtak.intoday.in/story/nonogenarian-bhakti-yadav-popularly-known-as-doctor-dadi-from-indore-to-get-padam-shri-1-908767.html इंदौर की पहली महिला MBBS 'डॉक्टर दादी' को मिला पद्मश्री 21 अप्रैल 2017 https://web.archive.org/web/20170422040048/http://aajtak.intoday.in/story/nonogenarian-bhakti-yadav-popularly-known-as-doctor-dadi-from-indore-to-get-padam-shri-1-908767.html 22 अप्रैल 2017 live में भक्ति यादव इंदौर की पहली महिला एमबीबीएस डॉक्टर बनीं थीं।Parag Natu (Jan 25, 2017) फ्री इलाज करती हैं इंदौर की पहली महिला MBBS, 91 की उम्र में मिला पद्मश्री https://web.archive.org/web/20170426062616/http://www.bhaskar.com/news/c-8-first-mbbs-from-indore-doctor-bhakti-yadav-awarded-padamshri-for-her-services-indore-news-id0504.html 26 अप्रैल 2017 Dainik Bhaskar, Indore
प्राम्भिक जीवन
भक्ति यादव जन्म 3 अप्रैल 1926 को उज्जैन के पास महिदपुर में हुआ। वे महाराष्ट्र के प्रसिद्ध परिवार से है। 1937 में जब लड़कियों को पढ़ाने को बुरा माना जाता था पर जब भक्ति जी ने आगे पढ़ने की इच्छा जाहिर की तो उनके पिता ने पास के गरोठ कस्बे में भेज दिया जहाँ सातवीं तक उनकी शिक्षा हुई। इसके बाद भक्तिजी के पिता इंदौर आये और अहिल्या आश्रम स्कूल में उनका दाखिला करवा दिया। उस वक्त इंदौर में वो एक मात्र लड़कियों का स्कूल था, जहाँ छात्रावास की सुविधा थी। यहाँ से 11वीं करने के बाद उन्होंने 1948 में इंदौर के होल्कर साईंस कॉलेज में प्रवेश लिया और बीएससी प्रथम वर्ष में कॉलेज में अव्वल रहीं।
डाक्टरी की पढाई
महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज (एमजीएम) में एमबीबीएस का पाठ्यक्रम था। उन्हें ११वीं के अच्छे परिणाम के आधार पर दाखिला मिल गया। कुल 40 एमबीबीएस के लिय चयनित छात्र में 39 लड़के थे और भक्ति अकेली लड़की थीं। भक्ति एमजीएम मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस की पहली बैच की पहली महिला छात्र थीं। वे मध्यभारत की भी पहली एमबीबीएस डॉक्टर थी। 1952 में भक्ति एमबीबीएस डॉक्टर बन गई।भक्ति ने एमजीएम मेडिकल कॉलेज से ही एमएस किया।
विवाह और व्यवसाय
1957 उन्होंने अपने साथ पढ़ने वाले डाक्टर चंद्रसिंह यादव से विवाह किया था। डॉ॰ यादव को शहरों के बड़े सरकारी अस्पतालों में नौकरी का बुलावा आया था, लेकिन उन्होंने इंदौर की मिल इलाके का बीमा अस्पताल चुना था। वे आजीवन इसी अस्पताल में नौकरी करते हुए मरीजों की सेवा करते रहे। उन्हें इंदौर में मजदूर डॉक्टर के नाम से जाना जाता था। डाक्टर बनने के बाद इंदौर के सरकारी अस्पताल महाराजा यशवंतराव अस्पताल में उन्होंने सरकारी नौकरी की। बाद में उन्होंने सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया। इन्होने कालांतर में इंदौर के भंडारी मिल नंदलाल भंडारी प्रसूति गृह के नाम से एक अस्पताल खोला, स्त्रीरोग विशेषज्ञ की नौकरी की। 1978 में भंडारी अस्पताल बंद हो गया था। बाद में उन्होंने वात्सल्य के नाम से उन्होंने घर पर नार्सिंग होम की शुरुआत की। डॉ॰ भक्ति का नाम काफी प्रसिद्ध था। यहाँ संपन्न परिवार के मरीज से नाम मात्र की फीस ली जाती है और गरीब मरीजों का इलाज मुफ्त करती है। तब से लेकर आज तक डॉ॰ भक्ति अपनी सेवा के काम को अंजाम दे रही हैं।
वृद्धावस्था
2014 में 89 साल की उम्र में डॉ॰ चंद्रसिंह यादव का निधन हो गया। डॉ॰ भक्ति को २०११ साल में अस्टियोपोरोसिस नामक खतरनाक बीमारी हो गई, जिसकी वजह से उनका वजन लगातार घटते हुए 28 किलो रह गया। डॉ॰भक्ति को उनकी सेवाओं के लिए 7 साल पहले डॉ. मुखर्जी सम्मान से नवाजा गया।
मृत्यु
१४ अगस्त २०१७ सोमवार1 लाख डिलिवरी कराने वाली 91 साल की डाॅ. दादी नहीं रहीं, मोदी ने दी श्रद्धांजलि को इंदौर में अपने घर पर उन्होंने आखिरी सांस ली।
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
‘डॉक्टर दादी’ भक्ति यादव को पद्मश्री, मोदी सरकार ने ‘सम्मान’ को सम्मानित किया
एक लाख महिलाओं की निशुल्क डिलीवरी करवाई, ऐसी थीं भक्ति यादव
श्रेणी:अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय परियोजना के अंतर्गत बनाए गए लेख
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