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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

अकाली हनुमान सिंह

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बाबा हनुमान सिंह अकाल तख्त के जत्थेदार 7वां बुद्ध दल के जत्थेदार शहीद File:Akali_Hanuman_Singh.jpg 230px फूला सिंह प्रह्लाद सिंह फूला सिंह प्रह्लाद सिंह हनुमान सिंह November 1755 नौरंग सिंह वाला, फ़िरोज़पुर, पंजाब सोहाना, मोहाली, पंजाब 1823 1846 1823 1846 हरनाम कौर गरजा सिंह अमृतसर के गुरुद्वारा बाबा अटल राय से हनुमान सिंह का भित्तिचित्र, लगभग 19वीं शताब्दी का बाबा हनुमान सिंह (नवंबर 1755 – जनवरी 1846), जिन्हें अकाली हनुमान सिंह या अमर शहीद बाबा हनुमान सिंह के नाम से भी जाना जाता है, एक निहंग सिख योद्धा और धार्मिक नेता थे। वे बुढ़ा दल के सातवें जत्थेदार और अकाल तख़्त के जत्थेदार रहे। वे अकाली फूला सिंह के उत्तराधिकारी थे। उन्हें ब्रिटिशों के ख़िलाफ़ युद्ध करने वाला पहला जत्थेदार माना जाता है। 1846 में ब्रिटिश और पटियाला रियासत के विरुद्ध लड़ाई के दौरान उन्होंने शहादत प्राप्त की।https://www.sikhiwiki.org/index.php/Akali_Baba_Hanuman_Singh Akali Baba Hanuman Singh - SikhiWiki, free Sikh encyclopedia. www.sikhiwiki.org en 2025-10-01 जीवनी बाबा हनुमान सिंह का जन्म नवंबर 1755 में फ़िरोज़पुर ज़िले के ज़ीरा तहसील के नौरंग सिंह वाला गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम गर्जा सिंह और माता का नाम हरनाम कौर था। 68 वर्ष की आयु में उन्हें अकाल तख़्त का जत्थेदार बनाया गया।https://dvnetwork.org/page/jathedar-akali-baba-hanuman-singh Jathedar Akali Baba Hanuman Singh dvnetwork.org en 2025-10-01 ब्रिटिशों के विरुद्ध संघर्ष सिख साम्राज्य की पराजय के बाद जत्थेदार हनुमान सिंह ने निहंग सेना को पुनः संगठित कर ब्रिटिशों का मुकाबला करने का निर्णय लिया। उन्होंने पटियाला छावनी में मोर्चा संभाला। उस समय पटियाला के शासक राजा करम सिंह ब्रिटिशों के सहयोगी थे और निहंगों को देखते ही मार डालने के आदेश जारी थे। जत्थेदार हनुमान सिंह जब पटियाला पहुँचे तो उन पर तोपों से हमला किया गया, जिसमें कई निहंग योद्धा शहीद हो गए। शेष निहंग पास के जंगलों में चले गए। लगभग 500 निहंग योद्धाओं के साथ हनुमान सिंह ने तलवारों, तीर-कमान, कुल्हाड़ियों और माचलॉक बंदूकों से ब्रिटिशों और पटियाला सेना का सामना किया। सोहाना का युद्ध और शहादत सबरांव की लड़ाई के बाद बचे हुए बुढ़ा दल के निहंग योद्धा सतलुज नदी के दक्षिणी क्षेत्र में पहुँचे। पटियाला राज्य के शासक राजा नरेंद्र सिंह ने बाबा हनुमान सिंह को आमंत्रण भेजा। सोहाना (मोहाली) में हुई लड़ाई के दौरान बाबा हनुमान सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए और 90 वर्ष की आयु में उन्होंने शहादत प्राप्त की। उनके बाद जत्थेदार बाबा परलाध सिंह निहंग सिंह को उत्तराधिकारी बनाया गया।https://www.sikhnet.com/news/sakhi-series-akaali-baba-hanuman-singh-ji Sakhi Series: Akaali Baba Hanuman Singh Ji 2024-05-05 SikhNet en 2025-10-01 स्मारक बाबा हनुमान सिंह की स्मृति में मोहाली के सोहाना में गुरुद्वारा सिंह शहीदान स्थित है। इसके अलावा सोहाना में उनके नाम पर एक कबड्डी अकादमी भी संचालित होती हैं| देखें भी अकाली फूला सिंह बुढ़ा दल अकाल तख़्त संदर्भ श्रेणी:सिख