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कौशी-रीमान समीकरण
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गणित में सम्मिश्र विश्लेषण के क्षेत्र में कोशी-रीमान समीकरण (Cauchy–Riemann equations) दो आंशिक अवकल समीकरणों की प्रणाली (system of two partial differential equations) है। ये समीकरण अवश्य ही संतुष्ट होंगे यदि दिया हुआ समिश्र फलन समिश्र-अवकलनिय (complex differentiable) है। समीकरण का यह नाम अगस्तिन कौशी (Augustin Cauchy) और बर्नार्ड रीमान (Bernhard Riemann) के नम पर पड़ा है।
इसके अलावा, समिश्र अवकलन के लिये कोशी-रीमान समीकरण आवश्यक एवं पर्याप्त शर्त भी हैं।
समीकरणों की यह प्रणाली सर्वप्रथम डी'अल्म्बर्ट (d'Alembert 1752) के कार्यों में देखने को मिली। बाद में लियोनार्द आइलर (Euler 1797) ने इन समीकरणों का सम्बन्ध एनालिटिक फलनों से भी होना बताया। कोशी ने 1814 में इन फलनों का उपयोग करके 'फलनों का सिद्धान्त' निर्मित किया। फलनों के सिद्धान्त पर रीमान का शोधपत्र 1851 में आया।
परिचय
वास्तविक मान वाले तथा दो चरों वाले फलनों के युग्म u(x,y) और v(x,y) के लिये निम्नलिखित दो समीकरण 'कौशी-रीमान समीकरण' कहलाते हैं:
एवं
बाहरी कड़ियाँ
Cauchy–Riemann Equations Module by John H. Mathews
इन्हें भी देखें
फलन
श्रेणी:आंशिक अवकल समीकरण
श्रेणी:सम्मिश्र विश्लेषण
श्रेणी:हार्मोनिक फलन
श्रेणी:समीकरण