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पश्चिमी घाट

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right|thumb|300px|भारत की प्रमुख पर्वत-श्रृंखलाऐं ; इसमें पश्चिमी तट के लगभग समान्तर जो पर्वत-श्रेणी है, वही 'पश्चिमी घाट' कहलाती है। भारत के पश्चिमी तट पर स्थित पर्वत श्रृंखला को पश्चिमी घाट या सह्याद्रि कहते हैं। दक्‍कनी पठार के पश्चिमी किनारे के साथ-साथ यह पर्वतीय श्रृंखला उत्‍तर से दक्षिण की तरफ 1600 किलोमीटर लम्‍बी है। विश्‍व में जैविकीय विवधता के लिए यह बहुत महत्‍वपूर्ण है और इस दृष्टि से विश्‍व में इसका 8वां स्थान है। यह गुजरात और महाराष्ट्र की सीमा से शुरू होती है और महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु तथा केरल से होते हुए कन्याकुमारी में समाप्‍त हो जाती है। वर्ष 2012 में यूनेस्को ने पश्चिमी घाट क्षेत्र के 39 स्‍थानों को विश्व धरोहर स्‍थल घोषित किया है।" http://pib.nic.in/newsite/hindirelease.aspx?relid=26880 ‘यूनेस्‍को’ की सूची में स्‍मारकों को शामिल किया जाना पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार 14 फ़रवरी 2014 15 फ़रवरी 2014 https://web.archive.org/web/20140222134625/http://pib.nic.in/newsite/hindirelease.aspx?relid=26880 22 फ़रवरी 2014 live बाट जोहता पश्चिमी घाट http://rajasthanpatrika.patrika.com/article/dd/43430.html राजस्थान पत्रिका सोमाद्रि शर्मा १६ जुलाई २०१४ २५ सितम्बर २०१४ https://archive.today/20140925141000/http://rajasthanpatrika.patrika.com/article/%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%9F-%E0%A4%9C%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A5%80-%E0%A4%98%E0%A4%BE%E0%A4%9F/43430.html 25 सितंबर 2014 live पश्चिमी घाट का संस्कृत नाम सह्याद्रि पर्वत है। यह पर्वतश्रेणी महाराष्ट्र में कुंदाइबारी दर्रे से आरंभ होकर, तट के समांतर, सागरतट से ३० किमी से लेकर १०० किमी के अंतर से लगभग ४,००० फुट तक ऊँची दक्षिण की ओर जाती है। यह श्रेणी कोंकण के निम्न प्रदेश एवं लगभग २,००० फुट ऊँचे दकन के पठार को एक दूसरे से विभक्त करती है। इसपर कई इतिहासप्रसिद्ध किले बने हैं। कुंदाईबारी दर्रा भरुच तथा दकन पठार के बीच व्यापार का मुख्य मार्ग है। इससे कई बड़ी बड़ी नदियाँ निकलकर पूर्व की ओर बहती हैं। इसमें थाल घाट, भोर घाट, पाल घाट तीन प्रसिद्ध दर्रे हैं। थाल घाट से होकर बंबई-आगरा-मार्ग जाता है। कलसूबाई चोटी सबसे ऊँची (५,४२७ फुट) चोटी है। भोर घाट से बंबई-पूना मार्ग गुजरता है। इन दर्रो के अलावा जरसोपा, कोल्लुर, होसंगादी, आगुंबी, बूँध, मंजराबादhttps://hindilogy.com/travel/manjarabad-fort/ मंजराबाद का किला: देश का एकमात्र किला जिसका आकार एक तारे की तरह है। Hindilogy 3 दिसंबर 2019 29 नवंबर 2019 https://web.archive.org/web/20191129123522/https://hindilogy.com/travel/manjarabad-fort/ dead एवं विसाली आदि दर्रे हैं। अंत में दक्षिण में जाकर यह श्रेणी पूर्वी घाट पहाड़ से नीलगिरि के पठार के रूप में मिल जाती है। इसी पठार पर पहाड़ी सैरगाह ओत्तकमंदु स्थित है, जो सागरतल से ७,००० फुट की ऊँचाई पर बसा है। नीलगिरि पठार के दक्षिण में प्रसिद्ध दर्रा पालघाट है। यह दर्रा २५ किमी चौड़ा तथा सगरतल से १,००० फुट ऊँचा है। केरल-मद्रास का संबंध इसी दर्रे से है। इस दर्रे के दक्षिण में यह श्रेणी पुन: ऊँची हाकर अन्नाईमलाई पहाड़ी के रूप में चलती है। पाल घाट के दक्षिण में श्रेणी की पूर्वी पश्चिमी दोनों ढालें खड़ी हैं। पश्चिमी घाट में सुंदर सुंदर दृश्य देखने को मिलती हैं। जंगलों में शिकार भी खेला जाता है। प्राचीन समय से यातायात की बाधा के कारण इस श्रेणी के पूर्व एवं पश्चिम के भागों के लोगों की बोली, रहन सहन आदि में बड़ा अंतर है। यहाँ कई जंगली जातियाँ भी रहती हैं।पश्चिमी घाट डेक्कन पठार के पहाड़ी गलती और क्षीण किनारे हैं। भूगर्भीय सबूत बताते हैं कि वे लगभग 150 मिलियन वर्ष पहले गोंडवाना के महाद्वीप के टूटने के दौरान गठित हुए थे। भूगर्भीय सबूत बताते हैं कि मेडागास्कर से तोड़ने के बाद भारत का पश्चिमी तट 100 से 80 मीरा के आसपास कहीं भी आया था। ब्रेक-अप के बाद, भारत का पश्चिमी तट ऊंचाई में कुछ 1,000 मीटर (3,300 फीट) अचानक चट्टान के रूप में दिखाई देगा। बेसल्ट 3 किमी (2 मील) की मोटाई तक पहुंचने वाली पहाड़ियों में पाया जाने वाला प्रमुख चट्टान है। पाए गए अन्य रॉक प्रकारों में क्रोनोलाइट्स, ग्रेनाइट गनीस, खोंडालाइट्स, लेप्टाइनाइट्स, क्रिस्टलीय चूना पत्थर, लौह अयस्क, डोलराइट्स और एनर्थोसाइट्स की अलग-अलग घटनाओं के साथ मेटामोर्फिक गनीस होते हैं। दक्षिणी पहाड़ियों में अवशिष्ट पार्श्व और बॉक्साइट अयस्क भी पाए जाते हैं। पश्चिमी घाट की सबसे ऊंची चोटी अनैमुड़ी (2695 मीटर) है right|thumb|300px|पश्चिमी घाट का उपग्रह से लिया गया चित्र प्रमुख पर्वत शिखर अप्रैल 2020 क्रमांक नाम ऊँचाई (मी) स्थाननिर्देश ०१ आनमुडी २६९५ एरविकुलम् ,राष्ट्रिय-उद्यानम्, केरळम् ०२ मीसपुळिमल २६४० मुन्नार्, केरळम् ०३ दोड्डबेट्ट २६३७ ऊटी, तमिळ्नाडु ०४ कोडैक्यानल् २१३३ कोडैक्यानल्, तमिळ्नाडु ०५. चेम्ब्रशिखरम् २१०० वैनाड्, केरळम् ०६ मुळ्ळय्यनगिरिः १९३० चिक्कमगळूरु, कर्णाटकम् ०७. चन्द्रदोणपर्वतः १८९५ चिक्कमगळूरु, कर्णाटकम् ०८ कुद्रेमुखम् १८९४ चिक्कमगळूरु, कर्णाटकम् ०९ अगस्त्यगिरिः १८६८ नेय्यर् वैल्ड् लैफ़् स्यांचुचुरी, केरळम् १० बिळिगिरिरंगनबेट्ट १८०० चामराजनगरमण्डलम्,कर्णाटकम् ११ तडियाण्डमोल्पर्वतः १७४८ कोडगुमण्डलम्, कर्णाटकम् १२ कुमारपर्वतः १७१२ दक्षिणकन्नडमण्डलम्, कर्णाटकम् १३ पुष्पगिरिः १७१२ पुष्पगिरि वैल्ड् लैफ़् स्यांचुरी, कर्णाटकम् १४ कळसूबाई १६४६ अहमदनगर, महाराष्ट्र १५ ब्रह्मगिरिः १६०८ कोडगुमण्डलम्, कर्णाटकम् १६ मडिकेरीपर्वतः १५२५ कोडगुमण्डलम १७. हिमवद्गोपालस्वामिपर्वतः १४५० चामराजनगरमण्डलम्, कर्णाटकम् १८. तोरभदुर्गः १४०५ पुणे, महाराष्ट्रम् १९ पुरन्दरदुर्गः १३८७ पुणे,महाराष्ट्रम् २०. कुटजाद्रिः १३४३ शिवमोग्गामण्डलम्, कर्णाटकम् प्रमुख दर्रे थाल घाट: नाशिक—मुंबई भोर घाट: मुंबई—पुणे पाल घाट: कोच्चि—चेन्नई मार्ग सेनकोट्टा दर्रा: तिरुअनंतपुरम—मदुरै मार्ग।The Western Ghats Mountain Range https://www.jagranjosh.com/general-knowledge/the-western-ghats-mountain-range-1448367447-1 Jagranjosh.com 19 अप्रैल 2020 24 नवम्बर 2015 https://web.archive.org/web/20171211022024/http://www.jagranjosh.com/general-knowledge/the-western-ghats-mountain-range-1448367447-1 11 दिसंबर 2017 live प्रमुख आंकड़े इन पहाड़ियों का कुल क्षेत्र 160,000 वर्ग किलोमीटर है। इसकी औसत उंचाई लगभग 1200 मीटर (3900 फीट) है। इस क्षेत्र में फूलों की पांच हजार से ज्‍यादा प्रजातियां, 139 स्‍तनपायी प्रजातियां, 508 चिडि़यों की प्रजातियां और 179 उभयचर प्रजातियां पाई जाती हैं। पश्चिमी घाट में कम से कम 84 उभयचर प्रजातियां और 16 चिडि़यों की प्रजातियां और सात स्‍तनपायी और 1600 फूलों की प्रजातियां पाई जाती हैं, जो विश्‍व में और कहीं नहीं हैं। पश्चिमी घाट में सरकार द्वारा घोषित कई संरक्षित क्षेत्र हैं। इनमें दो जैव संरक्षित क्षेत्र और 13 राष्ट्रीय उद्यान हैं। पश्चिमी घाट में स्थित नीलागिरी बायोस्फियर रिजर्व का क्षेत्र 5500 वर्ग किलोमीटर है, जहां सदा हरे-भरे रहने वाले और मैदानी पेड़ों के वन मौजूद हैं। केरल का साइलेंट वैली राष्‍ट्रीय पार्क, पश्चिमी घाट का हिस्‍सा है। यह भारत का ऐसा अंतिम उष्‍णकटिबंधीय हरित वन है, जहां अभी तक किसी ने प्रवेश नहीं किया है। अगस्‍त, 2011 में पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ समूह ने पूरे पश्चिमी घाट को पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया है। इन्हें भी देखें पूर्वी घाट सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ यूनेस्को द्वारा पश्चिमी घाट पर्वतीय शृंखला को संयुक्त राष्ट्र की विश्व धरोहर सूची में शामिल पश्चिमी घाट : सतत विकास की चुनौतियां श्रेणी:भारत की पर्वतमालाएँ श्रेणी:भारत के पर्वत श्रेणी:भारत के विश्व धरोहर स्थल श्रेणी:तमिल नाडु की स्थलाकृतियाँ श्रेणी:महाराष्ट्र की स्थलाकृतियाँ श्रेणी:कर्नाटक की स्थलाकृतियाँ श्रेणी:गोवा की स्थलाकृतियाँ श्रेणी:केरल की स्थलाकृतियाँ