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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

कलामंडलम कल्याणिकुट्टी अम्मा

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कलामंडलम कल्याणिकुट्टी अम्मा (1915-1999) दक्षिणी भारत में केरल से युगान्तरकारी मोहिनीअट्टम नृत्यांगना थी।https://books.google.ru/books?id=kloqAQAAIAAJ&q=Kalamandalam+Kalyanikutty+Amma South Indian theatre Sinha Biswajit 2007 Raj Publications 9788186208540 en 8 मार्च 2019 https://web.archive.org/web/20190331181438/https://books.google.ru/books?id=kloqAQAAIAAJ&q=Kalamandalam+Kalyanikutty+Amma 31 मार्च 2019 dead वह राज्य के मलप्पुरम जिले में थिरुनावया की निवासी थी। उन्होंने मोहिनीअट्टम को शोकयुक्त, निकट-विलुप्त अवस्था से मुख्यधारा के भारतीय शास्त्रीय नृत्य में पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही उन्होंने इसे औपचारिक संरचना और अलंकरण भी प्रदान किया। thumb|Kalamandalam-kalyanikutty-amma-24e1f2a1-d4ad-4bd9-b09d-4c4bf00fc46-resize-750 कल्याणिकुट्टी अम्मा, केरल कलामंडलम के शुरुआती छात्रों में से एक थी, उनका विवाह दिवंगत कथकली उस्ताद पद्म श्री कलामंडलम कृष्णन नायर से हुआ था।http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/tp-kerala/unsung-legends-who-resurrected-two-dying-arts-of-kerala/article5894374.ece Unsung legends who resurrected two dying arts of Kerala Reporter Staff 2014-04-10 The Hindu 2018-06-17 Reporter Staff en-IN 0971-751X कल्याणिकुट्टी अम्मा को केरल संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और केन्द्रीय संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, दोनों ही मिले थे। 12 मई 1999 को त्रिपुनिथुरा (जहाँ युगल बसे थे) में 84 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनका बेटा कलसाला बाबू सिनेमा और टेलीविजन अभिनेता थे, जबकि उनकी पोती स्मिथा राजन प्रसिद्ध मोहिनीअट्टम कलाकार हैं। उन्हें प्रसिद्ध कवि वल्लथोल नारायण मेनन से 'काव्यत्री' पुरस्कार मिला।https://www.culturalindia.net/indian-dance/classical/mohiniattam.html Mohini Attam – The Traditional Dance of Kerala! 2018-06-18 en-US https://web.archive.org/web/20190330120506/https://www.culturalindia.net/indian-dance/classical/mohiniattam.html 30 मार्च 2019 dead जीवन परिचय कलामंडलम कल्याणी कुट्टी अम्मा  केरल राज्य के मल्लपुरम जिले के थिरुनावाया ग्राम की निवासी थीं।उनके पति स्वर्गीय कथकली उस्ताद पद्मश्री कलामंडलम कृष्णन नायर थे। कल्याण मंडलम कल्याणी कुट्टी अम्मा ने लुप्त प्राय भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर मोहिनीअट्टम शास्त्रीय नृत्य को पुनर्जीवित किया और उसका  विस्तार किया। वे केरल मंडलम की आरंभिक बैच की छात्रा थीं। मोहिनीअट्टम शास्त्रीय नृत्य लगभग विलुप्ती के कगार पर थी। कल्याणी कुट्टी अम्मा के अनुसार मोहिनीअट्टम शास्त्रीय नृत्य ऐतिहास और नृत्य संरचना की दस्तावेज है। कल्याणी कुट्टी अम्मा को मोहनी अट्टम नृत्य की माता का दर्जा दिया जाता है क्योंकि केरल की इस नृत्य शैली को शास्त्रीय नृत्य की मुख्यधारा में लाने का श्रेय इन्हें  जाता है। कल्याणी अम्मा ने   मोहिनीअट्टम नृत्य शैली के पीछे छिपे पौराणिक रहस्य को भी  बताया। उन्हों ने मोहिनीअट्टम नृत्य शैली की व्याख्या स्वर्ग सुंदरी व नारियों द्वारा द्वारा किए जाने वाले नृत्य् के रूप में की।  कल्याणी कुट्टी अम्मा ने मोहिनीअट्टम  नृत्य को 20 साल वर्ष की उम्र के बाद सीखना आरंभ किया था। तत्कालीन समय में कुलीन परिवारों में छोटी बच्चियों द्वारा कम आयु में नृत्य  सीखने की अनुमति नहीं दी जाती थी। इससे पूरे परिवार के लिए शर्म की बात मानी जाती थी। कलामंडलम से नृत्य शिक्षा पूर्ण करने के बाद कवि वल्लतथोल  ने उन्हें मोहिनीअट्टम नृत्य को समाज में सम्मान का दर्जा और उचित स्थान दिलाने की जिम्मेदारी सौंपी। इस नृत्य को पुनर्जीवित करने और समाज में उच्च दर्जा दिलाने के लिए वे अनेकों अनेक मंदिरों में गई। वहाँ के शिलालेखों को पढ़ा और वहां की मंदिर नर्तकीयों  यानी थेवाडीची से मिली और जानकारियां एकत्रित की।  अपनी सारी एकत्रित जानकारियों को उन्होंने  दो अलग अलग पुस्तकों में प्रकाशित किया। ये पुस्तकें आज मोहिनीअट्टम नृत्य शैली की महत्वपूर्ण प्रामाणिक दस्तावेज मानी जाती है। मृत्य परंपरा को आगे बढ़ाने में उनकी छात्राअों ने भी सहयोग दिया जिनमें मृणालिनी साराभाई अौर स्मिता राजन ( उनकी पौत्री)  का नाम उल्लेखनीय है। [4) महत्वपुर्ण उपलब्धियां कल्याण कट्टी अम्मा की अनेक और महत्वपूर्ण उपलब्धियां है। 1938 में महाकवि श्री  वल्लथोल ने कविता के क्षेत्र में उनकी कविताओं की उत्कृष्टता को देख  "कवित्री"  की उपाधि दी । 1940 में उनकी शादी श्री से हुई। उन्होनें 1952 में केरल के अलुवा में “कलालायम”  की स्थापना की। जिससे 1959 कोचीन के त्रिपुनिथुरा मैं स्थानांतरित किया गया । 1972 में उन्हें   केंद्र संगीत नाटक अकादमी से फैलोशिप मिली।  1974 में संगीत नाटक अकादमी  ऑल संगीत नाटक अकादमी मोहिनीअट्टम नृत्य शैली में अमूल्य योगदान देने के लिए सम्मानित किया गया। 1986 में केरल कलामंडलम ने उन्हें से सम्मानित किया। 1997 में भारतीय शास्त्रीय नृत्य की दुनिया में काम के लिए मध्यप्रदेश शासन द्वारा कालिदास पुरस्कार से सम्मानित किया गया।  उनके  मृत्यु के साथ, उनके जीवन की   यह बहुमूल्य यात्रा यात्रा 1999 समाप्त हो गई। उनकी विरासत मोहिनीअट्टम नृत्य उनके छात्रों के द्वारा आज भी  सुरक्षित रुप से आगे बढ़ाया जा रहा  है। सन्दर्भ श्रेणी:संगीत नाटक अकादमी पुरस्कृत श्रेणी:1915 में जन्मे लोग श्रेणी:१९९९ में निधन श्रेणी:भारतीय शास्त्रीय नृत्य