Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

सितंबर 2018 किसी एक देश की कंपनी का दूसरे देश में किया गया निवेश प्रत्यक्ष विदेशी निवेश कहलाता है। ऐसे निवेश से निवेशकों को दूसरे देश की उस कंपनी के प्रबंधन में कुछ हिस्सा हासिल हो जाता है जिसमें उसका पैसा लगता है। आमतौर पर माना यह जाता है कि किसी निवेश को एफडीआई का दर्जा दिलाने के लिए कम-से-कम कंपनी में विदेशी निवेशक को 10 फीसदी शेयर खरीदना पड़ता है। इसके साथ उसे निवेश वाली कंपनी में मताधिकार भी हासिल करना पड़ता है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDi) मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं- (१) ग्रीन फील्ड निवेश - इसके तहत दूसरे देश में एक नई कम्पनी स्थापित की जाती है, (२) पोर्टफोलियो निवेश - इसके तहत किसी विदेशी कंपनी के शेयर खरीद लिए जाते हैं या उसके स्वामित्व वाले विदेशी कंपनी का अधिग्रहण कर लिया जाता है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के निम्न तरीकों से किया जा सकता है; १) चिंतित उद्यम के प्रबंधन में भाग लेने के लिए आदेश में मौजूदा विदेशी उद्यम के शेयरों का अधिग्रहण किया जा सकता है। २) मौजूदा उद्यम और कारखानों पर लिया जा सकता है। ३) १००% स्वामित्व के साथ एक नई सहायक कंपनी विदेशों में स्थापित किया जा सकती है। ४) यह शेयर धारिता के माध्यम से एक संयुक्त उद्यम में भाग लेने के लिए संभव है। ५) नई विदेशी शाखाओं,कार्यालयों और कारखानों की स्थापना की जा सकती है। ६) मौजूदा विदेशी शाखाओं और कारखानों का विस्तार किया जा सकता है। ७) अल्पसंख्यक शेयर अधिग्रहण,उद्देश्य उद्यम के प्रबंधन में भाग लेने के लिए है। विशेष रूप में उद्देश्य उद्यमों के प्रबंधन मे भाग लेने के लिए जब अपनी सहायक कंपनी के लिए एक मूल कंपनी द्वारा दीर्घकालिक ऋण देने। भारत ने अपने एफडीआई के नियमो में बदलाव किया है भारत के साथ सीधा जमीन सीमा सांझा करने वाले किसी देश की किसी भी कंपनी या व्यक्ति को भारत में निवेश करने के लिए भारत सरकार से इजाजत लेनी पड़ेगी । मेजबान देश के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लाभ और हानि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रौद्योगिकीय उन्नयन विस्तार, उद्योग में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने, पूंजीगत स्टॉक में वृद्धि, बुनियादी ढांचा आधार को मजबूत करने में सहायता करता है और इस प्रकार इससे अर्थव्यवस्था में खुशहाली का संपूर्ण स्तर परिलक्षित होता है। लाभ १)जुटानेनिवेश के स्तर: विदेशी निवेश वांछित निवेश और स्थानीय स्तर पर जुटाए बचत के बीच की भर सकते हैं। २) प्रोद्योगिकी के अपग्रेडेशन : विकासशील देशों के लिए मशीनरी और उपकरण स्थानांतरित करते हुए विदेशी निवेश के लिए इसके साथ तकनीकी ज्ञान होता है। ३)निर्यात प्रतिस्पर्धा में सुधार : एफडीआई मेजबान देश अपने निर्यात के प्रदर्शन में सुधार कर सकते हैं। ४)रोज़गार सृजन:विदेशी निवेश विकासशील देशों में आधुनिक क्षेत्रों में रोज़गार पैदा कर सकते हैं। ५)उपभोक्ताओं को लाभ: विकासशील देशों में उपभोक्ताओं को नए उत्पादों के माध्यम से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से लाभ मिलने वाला है, और प्रतिस्पर्धी कीमतों पर माल की गुणवत्ता में सुधार हुआ। हानि १)विदेशी निवेश के घर निवेश के साथ प्रतिस्पर्धी हो गए हैं,घरेलू उद्योगों में मुनाफे में गिरावट , प्रमुख घरेलू बचत में गिरावट करने के लिए। २)कॉर्पोरेट करों के माध्यम से सार्वजनिक राजस्व के लिए विदेशी कंपनियों का योगदान है क्योंकि मेजबान सरकार द्वारा प्रदान की गयी उदार कर रियायतें, निवेश भत्ते, प्रच्छन्न सार्वजनिक सब्सिडी और टैरिफ सुरक्षा के अपेक्षाकृत कम है। बाहरी कड़ियाँ क्या है प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (इकनॉमिक टाइम्स) भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा (दैनिक जागरण) नई प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीतिका रोज़गार और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव (नवम्बर २०१७) प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लाभ एफडीआई नीति परिवर्तित (जून २०१६) श्रेणी:अर्थशास्त्र