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द्रवस्थैतिक संतुलन
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मार्च 2026
thumb|right|भूरे काल्पनिक डब्बे की अन्दर की गैस पर तीन बल हैं - (१) उसके ऊपर की गैस का (गुरुत्वाकर्षण की वजह से वज़न से उत्पन्न होने वाला) नीचे की तरफ दबाव, (२) उसका अपना भार, (३) उसके नीचे की गैस का ऊपर की तरफ दबाव। यदि डब्बे के अन्दर की गैस द्रवस्थैतिक संतुलन की वजह से स्थिर है तो (१) और (२) मिलाकर ठीक (३) के बराबर होंगे।
तरल यान्त्रिकी में द्रवस्थैतिक सन्तुलन अथवा हाइड्रोस्टैटिक ऍक्विलिब्रियम (hydrostatic equilibrium) किसी तरल (फ़्लुइड) की उस अवस्था को कहते हैं जिसमें वह तरल पदार्थ अथवा तो स्थिर हो अथवा फिर एक स्थाई गति कर रहा हो। ऐसी अवस्था प्रायः तब पैदा होती है जब किसी तरल पर गुरुत्वाकर्षण का बल तथा उसी तरल में दबाव से उत्पन्न होने वाला विपरीत बल संतुलन में हों। उदाहरण के लिए पृथ्वी के वायुमण्डल पर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण का भयंकर खिचाव है परन्तु वायुमण्डल न तो पृथ्वी की तल पर एक पतली परत में सिकुड़ जाता है तथा न ही तल से तथा दूर फैलकर तथा पतला हो जाता है। इसका कारण यह है कि वायुमण्डल द्रवस्थैतिक सन्तुलन में है।
द्रवस्थैतिक संतुलन का समीकरण
द्रवस्थैतिक संतुलन की स्थिति में तरल के किसी छोटे से आयतन V पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल (नीचे की तरफ) उस पर उपर की ओर लगने वाले उत्प्लावन बल के बराबर होता है।
जहाँ V आयतन, ρ तरल का घनत्व, g गुरुत्वजनित त्वरण, p दाब, z उर्ध्वाधर दिशा में दूरी है।
इस समीकरण के दोनो पक्षों को V से भाग देने पर,
पृथ्वी पर किसी द्रवस्थैतिक तरल के लिए-
बल योग से व्युत्पत्ति
न्यूटन के गति नियम में कहा है कि किसी तरल पदार्थ का वह आयतन जो गति में नहीं है अथवा जो स्थिर वेग की स्थिति में है, उस पर शून्य शुद्ध बल होता है। इसका अर्थ है कि किसी दी गई दिशा में बलों के योग का विपरीत दिशा में बलों की समान राशि द्वारा विरोध किया जाना चाहिए। इस बल सन्तुलन को द्रवस्थैतिक सन्तुलन कहते हैं।
सन्दर्भ
इन्हें भी देखें
द्रवस्थैतिकी
तरल यांत्रिकी
श्रेणी:भौतिकी
श्रेणी:तरल यांत्रिकी
श्रेणी:खगोलशास्त्र
श्रेणी:खगोलभौतिकी
श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना