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दिल तो पागल है
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दिल तो पागल है 1997 में बनी भारतीय संगीतमय रूमानी हिन्दी फिल्म है। इसका निर्देशन यश चोपड़ा ने किया है। इसमें मुख्य किरदार में शाहरुख खान, माधुरी दीक्षित, तथा करिश्मा कपूर हैं। शाहरुख खान और यश चोपड़ा की यह एक साथ तीसरी फिल्म है। इससे पहले वह डर (1993) और दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे (1995) में एक साथ काम कर चुके थे। जारी होने पर दिल तो पागल है को प्रमुख वाणिज्यिक सफलता थी और यह दुनिया भर में साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म बनी थी। फिल्म ने अपनी कहानी और संगीत के लिए प्रशंसा प्राप्त की। इसके अतिरिक्त, फिल्म ने तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और आठ फिल्मफेयर पुरस्कार जीते थे।
== पटकथा ==
राहुल (शाहरुख खान) और निशा (करिश्मा कपूर) एक नाचने वाले मंडल के सदस्य हैं। वो दोनों अच्छे दोस्त हैं। निशा मन ही मन राहुल से प्यार करती है। एक प्रतियोगिता के लिए अभ्यास करते समय निशा को चोट लग जाती है और वह अस्पताल में भर्ती हो जाती है। राहुल ने माया नामक एक नाटक का निर्देशित करने की अपनी इच्छा की घोषणा की। निशा समेत मंडल के सदस्यों को शीर्षक चरित्र "माया" के बारे में संदेह है, जो राहुल के अनुसार ऐसी लड़की है जो सच्चे प्यार में विश्वास करती है और अपने सपने के राजकुमार के लिए इंतज़ार कर रही है। इस बीच, पूजा (माधुरी दीक्षित) दिखाई जाती है, जो बहुत अच्छी नर्तक और शास्त्रीय नृत्य में प्रशिक्षित है। एक छोटी उम्र में अनाथ होने के कारण, उसे अपने माता-पिता के करीबी दोस्तों द्वारा पाला गया है।
पूजा और राहुल एक-दूसरे से कई बार टकराते हैं। नाटक के रिहर्सल के दौरान, निशा का पैर घायल हो गया और डॉक्टर ने कहा कि वह कुछ महीनों तक नृत्य नहीं कर सकती। नाटक में मुख्य भूमिका निभाने के लिए राहुल को एक नई महिला की जरूरत है। वह एक दिन पूजा को नृत्य करते देखता है और मानता है कि वह भूमिका के लिए बिल्कुल सही है। वह उसे अपने रिहर्सल में आने के लिए विनती करता है और वह मान जाती है। राहुल और पूजा करीबी दोस्त बन जाते हैं। अपने पालक परिवार द्वारा दवाब डालने पर पूजा जल्द ही अपने अभिभावक के बेटे अजय (अक्षय कुमार) द्वारा जर्मनी में ले जाई जाती है। वह उसके बचपन का सबसे अच्छा दोस्त है जो लंदन में महीनों से रह रहा है। जैसे ही अजय इंग्लैंड जाने वाला होता है, वह पूजा से प्यार का इजहार करता है। इस दुविधा में, वह इसे स्वीकार करती है।
निशा जल्द ही अस्पताल से लौट आती है और परेशान है कि उसे नाटक के पात्र से निकाल दिया गया है। यह पता लगने पर कि राहुल पूजा से प्यार करता है, वह बहुत ईर्ष्यापूर्ण हो जाती है। यह जानकर कि राहुल उसके प्यार को नहीं समझता, वह लंदन जाने का फैसला करती है। पूरे अभ्यास में, राहुल और पूजा खुद को एक दूसरे के प्यार में पाते हैं। अगले दिन, दोनों पूजा के पुराने नृत्य शिक्षक से मिलने जाते हैं, जिसे पूजा ताई (अरुणा ईरानी) के रूप में संबोधित करती है। वह जान जाती हैं कि दोनों प्यार में स्पष्ट रूप से हैं। नृत्य मंडल के दो सदस्यों की शादी में, राहुल और पूजा एक अंतरंग क्षण साझा करते हैं लेकिन यह सुनिश्चित नहीं कर पाते कि अपने प्यार को पूरी तरह व्यक्त कैसे किया जाए।
नाटक के होने से कुछ दिन पहले, अजय पूजा को आश्चर्यचकित करने के लिए रिहर्सल हॉल में पहुँचा, हर किसी को यह बताते हुए कि वह उसका मंगेतर है। राहुल का दिल टूट जाता है लेकिन वह इसे छिपाने की कोशिश करता है। निशा, जो लौट आई है, उसका ध्यान राहुल के दिल टूटने पर जाता है और बताती है कि जब वह उससे बदले में प्यार नहीं करता था तो वह भी तबाह हो गई थी। हमेशा की तरह खुशहाल अंत देने की अपनी सामान्य शैली के विपरीत राहुल अपने दिल की अवस्था को प्रतिबिंबित करने के लिए नाटक के अंत को संपादित करता है। नाटक की रात को, जैसे ही राहुल और पूजा के पात्र मंच पर अलग हो जाते हैं, अजय एक रिकार्ड टेप बजाता है जिसमें उसके इजहार से पहले पूजा बताती है कि वह राहुल के बारे में कैसा महसूस करती थी। अजय अप्रत्यक्ष रूप से पूजा बता रहे हैं कि वह और राहुल एक साथ रहने के लिए हैं। पूजा अब महसूस करती है कि वह वास्तव में राहुल से प्यार करती है और दोनों मंच पर अपने प्यार को कबूल करते हैं जबकि दर्शक उनकी प्रशंसा करते हैं, जिससे नाटक का एक बार फिर खुशहाल अंत हो जाता है। इसके अलावा, बैकस्टेज में, अजय निशा से पूछता है कि क्या वह पहले से ही विवाहित है या नहीं (उसे उसमें रूचि है ऐसा दर्शाना)।
== मुख्य कलाकार ==
शाहरुख़ ख़ान - राहुल
माधुरी दीक्षित - पूजा
करिश्मा कपूर - निशा
अक्षय कुमार - अजय
फरीदा ज़लाल - अजय की माँ
देवेन वर्मा - अजय के पिता
अरुणा ईरानी - पूजा की शिक्षिका
== संगीत ==
दिल तो पागल है में कुल 9 गीत हैं, एक वाद्य रचना मिलाकर 10 गीत एल्बम में हैं। संगीतकार उत्तम सिंह उस वक्त तक कई वर्षों से सक्रिय थे लेकिन सफलता उन्हें इस फिल्म से मिली। उन्होंने लगभग 100 धुनें तैयार की थी जिसमें से 9 धुनों को चुना गया। बोल आनंद बख्शी के द्वारा लिखें गए हैं। जारी होने पर गीत बहुत लोकप्रिय हुए और यह एल्बम साल 1997 की सर्वाधिक बिकने वाली रही। फिल्म की सफलता के लिये इसके संगीत को प्रचुर श्रेय दिया जाता है। उत्तम सिंह की धुनें और आनंद बख्शी के साधारण भाषा में रचे गए बोल का युवाओं से जुड़ना इसकी सफलता के मुख्य कारण रहे।
सभी गीत आनंद बख्शी द्वारा लिखित; सारा संगीत उत्तम सिंह द्वारा रचित।
== परिणाम ==
दिल तो पागल है को बहुत अधिक सफलता मिली। इसके कारण यह भारतीय फिल्मों में उस वर्ष का सबसे अधिक कमाने वाला फिल्म बन गई थी। इसने भारत में कुल ₹59.82 करोड़ रुपये का कारोबार किया। वहीं देश के बाहर ₹12.04 करोड़ रुपये का लाभ लेने में भी सफल हुआ। इस फिल्म को बनाने में मात्र ₹9 करोड़ रुपये लगे थे। उसके हिसाब से कमाई बहुत अधिक हुई। इसने पूरी दुनिया में पहले हफ्ते के अंत में ₹4.71 करोड़ का कारोबार किया था। वहीं पहले सप्ताह इसने ₹8.97 करोड़ का कारोबार किया।
== नामांकन और पुरस्कार ==
जीते
1998 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - शाहरुख़ ख़ान
1998 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म पुरस्कार - यश चोपड़ा
1998 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार - माधुरी दीक्षित
1998 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री पुरस्कार - करिश्मा कपूर
1998 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ संगीतकार पुरस्कार - उत्तम सिंह
1998 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखन पुरस्कार - आदित्य चोपड़ा
1998 - राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री पुरस्कार - करिश्मा कपूर
1998 - राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ नृत्य संयोजन - शियामक डावर
== सन्दर्भ ==
== बाहरी कड़ियाँ ==
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