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411 समाचार
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मधुमती

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मधुमती मधुमती.jpg मधुमती का पोस्टर बिमल रॉय बिमल रॉय सलिल चौधरी (संगीत)शैलेन्द्र (गीत) ऋतविक घटक ऋतविक घटकराजिंदर सिंह बेदी (डायलॉग) दिलीप कुमार, वैजयन्ती माला, जॉनी वॉकर, प्राण, जयंत दिलिप गुप्ता मोहन स्टूडियोज़ बिमल रॉय प्रोडक्शन्स सुधेन्दु रॉय यादुगिरि देवी ऋषिकेश मुखर्जी 1958 भारत हिन्दी मधुमती 1958 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। यह शायद पहली हिन्दी फ़िल्म है जिसमें एक कलाकार (वैजयन्ती माला) ने तीन-तीन रोल निभाये हों। इस फ़िल्म के निर्माता और निर्देशक बिमल रॉय थे। फ़िल्म में मुख्य भूमिका दिलीप कुमार, वैजयन्ती माला और जॉनी वॉकर ने निभाई है। इस फ़िल्म को सन् १९५८ में अन्य पुरस्कारों के अलावा फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म पुरस्कार से भी नवाज़ा गया था। इस फिल्म पे कइ रिमेक फिलमे भी बनी जैसे , कुदरत, बीस साल बाद, और ओम शांति ओम संक्षेप फ़िल्म वर्तमान समय से शुरु होती है। देवेन्द्र (दिलीप कुमार), जो एक अभियन्ता है, अपने दोस्त डॉक्टर (तरुण बोस) के साथ कार से रात को तूफ़ान और बारिश में पहाड़ी रास्तों से होकर अपनी पत्नी और नवजात बच्चे को लेने रेलवे स्टेशन जा रहा है। रास्ते में भूस्खलन के कारण रास्ता बन्द हो जाता है तो कार का ड्राइवर मदद लेने के लिए जाता है और दोनों दोस्त एक पुरानी हवेली में पनाह लेते हैं। वहाँ देवेन्द्र को हवेली जानी पहचानी सी लगती है और उसे धीरे-धीरे पुराने जन्म की बातें याद आने लगती हैं। वह अपने डॉक्टर दोस्त और हवेली के चौकीदार को कहानी सुनाना शुरु करता है। अब फ़िल्म बीते हुये समय में जाती है। आनन्द (दिलीप कुमार) श्यामनगर टिम्बर ऍस्टेट में, जहाँ पेड़ों की कटाई का कारोबार होता है, नया मैनेजर बनकर आता है। वहाँ उसकी मुलाक़ात वहीं के जंगलों में रहने वाली लड़की मधुमती (वैजयन्ती माला) से होती है और दोनों में प्यार हो जाता है। आनन्द अपने ख़ाली समय में एक चित्रकार भी है और वह मधुमती का चित्र तैयार करने लगता है। कारोबार का मालिक़ राजा उग्रनारायण (प्राण) बड़ा ज़ालिम आदमी है। वह मधुमती को अपना बनाने के लिये आनन्द को बाहर काम से भेज देता है और धोखे से मधुमती को अपनी हवेली बुला भेजता है। जब मधुमती हवेली में दाख़िल होती है तो रात के ठीक आठ बज रहे होते हैं। आनन्द जब लौट कर आता है तो मधुमती को न पाकर बदहवास सा हो जाता है। जंगल में आनन्द का नौकर चरनदास (जॉनी वॉकर) उसे सारी सच्चाई बताता है। आनन्द उग्रनारायण से बदला लेने के लिये उसकी हवेली जाता है लेकिन वहाँ उग्रनारायण के नौकर उसे मार-मार कर अधमरा कर देते हैं। जब उग्रनारायण का वफ़ादार बीर सिंह आनन्द को मरा हुआ समझकर खाई में फेंकने जा रहा होता है तो उसका रास्ता मधुमती का पिता पवन राजा (जयन्त) रोक लेता है और हाथापाई में बीर सिंह और पवन राजा दोनों ही मारे जाते हैं और मौका देखकर चरनदास आनन्द को बचा ले जाता है। ज़ख़्म भर जाने के बाद आनन्द चरनदास की मदद से रामपुर डाक बंगले में रहने लगता है और पागल सा होकर मधुमती का चित्र लेकर जंगलों में इधर-उधर भटकने लगता है। वहीं उसकी मुलाक़ात शहर से आयी एक लड़की माधवी (वैजयन्ती माला) से होती है जिसको वह ग़लती से मधुमती समझ बैठता है। वह माधवी के पीछे-पीछे मधुमती का नाम पुकारता हुआ भागता है तो माधवी के साथी उसकी पिटाई करते हैं। लेकिन माधवी को वहाँ आनन्द द्वारा बनाया हुआ मधुमती का चित्र मिल जाता है और वह समझ जाती है कि आनन्द सच कह रहा था। एक समारोह में आनन्द माधवी को स्थानीय लिबास में नाचते हुये देखता है तो उसके मन में एक विचार आता है। वह राजा उग्रनारायण की हवेली में जाता है और उससे कहता है कि उसे वापस घर जाने के लिये पैसों की ज़ुरूरत है लेकिन वह भीख नहीं लेगा बल्कि राजा उग्रनारायण का चित्र बनाएगा। राजा उग्रनारायण राज़ी हो जाता है और आनन्द को अगले दिन शाम को आने के लिये कहता है। वह माधवी के पास जाकर उससे कहता है कि वह अगले दिन ठीक रात को आठ बजे राजा उग्रनारायण की हवेली में वही भेस बनाकर आये जिस भेस में आख़िरी बार मधुमती राजा उग्रनारायण की हवेली में गयी थी। माधवी राज़ी हो जाती है। आनन्द पुलिस को अपनी तरक़ीब बताता है और पुलिस भी उसका साथ देने को तैयार हो जाती है। अगली शाम को आनन्द राजा उग्रनारायण की हवेली में पहुँच जाता है। पुलिस छुपकर बाहर रहती है। भयंकर तूफ़ान और बारिश की रात होती है। रात ठीक आठ बजे मधुमती बनी माधवी राजा उग्रनारायण की हवेली में प्रवेश करती है। राजा उग्रनारायण डर के मारे सारा सच उगल देता है कि कैसे मधुमती की मौत हुयी। मधुमती-माधवी जब राजा उग्रनारायण को यह बताती है कि राजा उग्रनारायण ने उसकी लाश को कहाँ ठिकाने लगाया है तो राजा उग्रनारायण हामी भर देता है। तभी बाहर से पुलिस आकर राजा उग्रनारायण को पकड़ लेती है। उसी समय आनन्द का माथा ठनकता है कि माधवी को कैसे पता कि मधुमती की लाश कहाँ ठिकाने लगाई गई है। और बाहर से माधवी यह कहते हुये अन्दर दाख़िल होती है कि कार ख़राब हो जाने के कारण वह समय पर नहीं पहुँच सकी। आनन्द समझ जाता है कि उसकी मदद मधुमती की रुह ने की है और अब वही रुह उसको उसी जगह से पुकारती है जहाँ से मधुमती अपनी मौत के लिये गिरी थी। आनन्द भी उसके पीछे-पीछे जाकर मौत के आग़ोश में समां जाता है। फ़िल्म फिर वर्तमान में आ जाती है और देवेन्द्र को कहानी सुनाते हुये सुबह हो गयी है। देवेन्द्र कहता है कि इस जनम में भी उसकी पत्नी वही है, नाम है राधा। तभी उनकी कार का ड्राइवर आकर बताता है कि रास्ता तो अब खुल गया है लेकिन जिस ट्रेन से राधा आ रही थी, वह दुर्घटनाग्रस्त हो गयी है। दोनों दोस्त तुरन्त रेलवे स्टेशन के लिये रवाना होते हैं और वहाँ जाकर देखते हैं कि राधा (वैजयन्ती माला) अपने बच्चे के साथ सुरक्षित है। देवेन्द्र राधा के पास जाकर कहता है कि उनका साथ इसी जन्म का नहीं बल्कि कई जन्मों का है। चरित्र दिलीप कुमार - आनन्द, देवेन्द्र वैजयन्ती माला - मधुमती, माधवी, राधा प्राण - राजा उग्रनारायण जॉनी वॉकर - चरनदास (आनन्द का नौकर) जयंत - पवन राजा (मधुमती का पिता) मुख्य कलाकार दिलीप कुमार वैजयन्ती माला जॉनी वॉकर प्राण जयंत संगीत इस फ़िल्म का संगीत दिया है सलिल चौधरी ने और गीतकार हैं शैलेन्द्र। +मधुमती के गानेगीतगायक/गायिकामिनट१जुल्मी संग आँख लड़ीलता मंगेशकर३.२८२आजा रे परदेसीलता मंगेशकर४.२९३चढ़ गयो पापी बिछुआलता मंगेशकर, मन्ना डे५.५८४दिल तड़प तड़प केलता मंगेशकर, मुकेश३.२८५घड़ी घड़ी मोरा दिल धड़केलता मंगेशकर३.१९६हम हाल-ऐ-दिल सुनाएंगेमुबारक बेगम३.२५७जंगल में मोर नाचामोहम्मद रफ़ी३.०८८सुहाना सफ़रमुकेश३.४९९टूटे हुये ख़्वाबों नेमोहम्मद रफ़ी३.१९ रोचक तथ्य मधुमती से प्रेरित कुदरत की कहानी भी मिलती-जुलती है, फ़र्क़ सिर्फ़ इतना है कि फ़िल्म का हीरो अगला जन्म लेकर विलेन को सज़ा दिलवाता है। इस फ़िल्म का वह दृश्य जिसमें मधुमती की रुह राजा उग्रनारायण को पकड़वाने में आनन्द की मदद करती है, हू-ब-हू फ़िल्म ओम शांति ओम में नक़ल किया गया है और इसी वजह से बिमल रॉय की पुत्री रिंकी भट्टाचार्य ने फ़िल्म के निर्माता को नक़ल करने के लिये अदालत में ले जाने की धमकी दी थी। नामांकन और पुरस्कार फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार विजेता 1958 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म पुरस्कार - बिमल रॉय 1958 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ संगीतकार पुरस्कार - सलिल चौधरी 1958 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार - बिमल रॉय 1958 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार - जॉनी वॉकर 1958 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका पुरस्कार - लता मंगेशकर (आजा रे परदेसी गीत के लिये) 1958 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखन पुरस्कार - राजिन्दर सिंह बेदी 1958 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ कला निर्देशन पुरस्कार - सुधेन्दु रॉय 1958 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ छायाकार पुरस्कार - दिलिप गुप्ता 1958 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ संपादन पुरस्कार - ऋषिकेश मुखर्जी नामांकित 1958 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - दिलीप कुमार 1958 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार - वैजयन्ती माला 1958 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ कहानी पुरस्कार - ऋतविक घटक राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार - सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म (हिन्दी) - विजेता - बिमल रॉय बाहरी कड़ियाँ 0050665 मधुमती श्रेणी:1958 में बनी हिन्दी फ़िल्म श्रेणी:फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म पुरस्कार विजेता