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जिवा महाला
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सितंबर 2019
सितंबर 2019
जिवा महाला (या जिवाजी महाले) छत्रपति शिवाजी महाराज के परम निष्ठावान अंगरक्षक थे, जिन्होंने प्रतापगढ़ के युद्ध में महाराज की जान बचाकर इतिहास रच दिया। उनका नाम मराठा इतिहास में वीरता और निष्ठा का प्रतीक माना जाता है।
प्रतापगढ़ युद्ध में पराक्रम
1659 में प्रतापगढ़ के युद्ध में, जब अफज़ल खान ने धोखे से शिवाजी महाराज पर हमला किया, तब अफज़ल खान के अंगरक्षक सैयद बंदा ने भी महाराज पर वार करने की कोशिश की।
तभी जिवा महाला ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए सैयद बंदा का हाथ काट दिया, जिससे शिवाजी महाराज की जान बच गई।
तभी से मराठी कहावत बनी: “होता जिवा महाला, म्हणून वाचला शिवबा” यानी – “जिवा महाला था, इसलिए शिवाजी बचे।” वीरता का सम्मान
शिवाजी महाराज और उनके वंशजों ने जिवा महाला और उनके वंश को विशेष सम्मान दिया।
शाहू महाराज ने जिवा महाला के वंशजों को निगडे और साखरे गांव इनाम (इनामदार) के रूप में प्रदान किए।
उनकी वीरता को याद करते हुए रायरेश्वर किले के पास उनकी समाधि भी स्थापित की गई है।
हरियाणा मे रोडमराठा समुदाय मे भी महला/महाले काफी बडा गौत्र है , जो करनाल व कुरुक्षेत्र के आसपास पाए जाते है।
श्रेणी:इतिहास आधार