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पादप प्रजनन आकारिकी
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thumb|upright=1.3|श्लंबरगेरा के पुष्प का नज़दीकी दृश्य, जिसमें जायांग का हिस्सा (विशेष रूप से वर्तिकाग्र और वर्तिका का भाग) और उसे घेरे हुए पुंकेसर दिखाई दे रहे हैं।
पादप प्रजनन आकारिकी के अंतर्गत पौधों (मुख्यतः फूलों) के उन भागों की शारीरिक संरचना का अध्ययन किया जाता है जो लैंगिक प्रजनन में सहायक होते हैं। इसके नर भाग (पुंकेसर - परागकोष और तंतु) और मादा भाग (स्त्रीकेसर - वर्तिकाग्रFLOWER – A FASCINATING ORGAN OF ANGIOSPERMS https://ncert.nic.in/textbook/pdf/lebo101.pdf एनसीईआरटी, कक्षा-12 17 फरवरी 2026 en फूल - आवृत्तबीजी का एक आकर्षक अंग, वर्तिका, अंडाशय) होते हैं, जिनकी निषेचन क्रिया से बीज और फल का निर्माण होते हैं।
विशेषता
विश्व के सभी जीवों में पुष्प सबसे अलग और सुंदर होते हैं। ये सपुष्पक (आवृत्तबीजी)Angiosperm sexual systems http://bioimages.vanderbilt.edu/pages/sexual-systems.htm bioimages.vanderbilt.edu 17 फरवरी 2026 en आवृत्तबीजी लैंगिक प्रणाली 29 जून 2018 https://web.archive.org/web/20180629163301/http://bioimages.vanderbilt.edu/pages/sexual-systems.htm bot: unknown पौधों (फूल देने वाले पौधों) के वे हिस्से हैं जिनसे नए पौधे बनते हैं। फूलों की बनावट और उनके पैदा होने के तरीके बहुत अलग-अलग और विविध होते हैं।स्पेंसर सी. एच. बैरेट्ट THE EVOLUTION OF PLANT SEXUAL DIVERSITY http://labs.eeb.utoronto.ca/barrett/pdf/schb_189.pdf labs.eeb.utoronto.ca 17 फरवरी 2026 en पादप लैंगिक विविधता का विकास 27 मई 2013 https://web.archive.org/web/20130527102011/http://labs.eeb.utoronto.ca/barrett/pdf/schb_189.pdf bot: unknown दूसरी ओर, वे पौधे हैं जो पौधे फूल नहीं देते। जैसे- काई अथवा मॉस, फर्न या चीड़ और देवदार जैसे पेड़ आदि। उनके प्रजनन (संतान पैदा करने) के तरीके भी काफी जटिल होते हैं। वे अपने शरीर की बनावट को मौसम और माहौल के हिसाब से ढाल लेते हैं ताकि वे अपनी संख्या बढ़ा सकें।
अन्य
क्रिश्चियन कोनराड स्प्रेंजलChristian Konrad Sprengel https://www.darwinproject.ac.uk/letter/?docId=nameregs/nameregs_4503.xml डार्विन कोरेस्पोंडेंस प्रोजेक्ट 17 फरवरी 2026 en क्रिश्चियन कोनराड स्प्रेंजल (1793) ने सपुष्पक पौधों के प्रजनन का अध्ययन किया। उन्होंने पहली बार यह समझाया कि परागण की प्रक्रिया में जीवित जीव (जैसे कीट-पतंगे) और निर्जीव तत्व (जैसे हवा और पानी) दोनों की भूमिका होती है। बाद में, चार्ल्स डार्विन ने अपने 'विकासवाद का सिद्धांत' को बेहतर बनाने के लिए स्प्रेंजल द्वारा किए गए काम का उपयोग किया। डार्विन ने यह भी बताया कि फूल और उन्हें परागित करने वाले कीड़े समय के साथ एक-दूसरे की जरूरतों के अनुसार साथ-साथ विकसित हुए हैं।
इन्हें भी देखें
पुंकेसर
प्रजनन
संदर्भ
बाहरी कड़ियाँ
Plant reproductive morphology
श्रेणी:विज्ञान
श्रेणी:पादप
श्रेणी:प्रजनन