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मध्यमहेश्वर
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मध्यमहेश्वर मंदिर Madhyamaheshwar Temple, Uttarakhand.JPG मध्यमहेश्वर मंदिर मध्यमहेश्वर मंदिर India Uttarakhand Location in Uttarakhand 30 38 13 N 79 12 58 E type:landmark_region:IN inline,title भारत उत्तराखंड रुद्रप्रयाग जिला गौंडार गांव, गढ़वाल शिव महा शिवरात्रि उत्तर भारतीय - हिमालयी वास्तुकला अज्ञात पांडव, किंवदंती के अनुसार
मध्यमहेश्वर— उत्तराखंड की शांत, पवित्र और बर्फीली वादियों में स्थित यह मंदिर न केवल एक तीर्थस्थल है, बल्कि आस्था, तपस्या और प्रकृति की दिव्यता का जीवंत संगम है। गढ़वाल हिमालय की गोद मेंGaundar · Uttarakhand 246439 https://www.google.com/maps/place/Gaundar,+Uttarakhand+246439/data=!4m2!3m1!1s0x39083069408e231d:0x8de1931095d18f7c?entry=gps 2022-04-09 Gaundar · Uttarakhand 246439 en-IN, रुद्रप्रयाग जिले के एक छोटे-से गाँव गौंडार में, लगभग 3,497 मीटर (11,473 फीट) की ऊँचाई पर स्थित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है।
यह मंदिर पंच केदार के पवित्र तीर्थसर्किट का हिस्सा है — वे पाँच स्थान जहाँ शिव के विभिन्न अंगों की पूजा की जाती है। इस सर्किट में अन्य मंदिर हैं: केदारनाथ, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, और कल्पेश्वर। परंपरा के अनुसार, भक्त पहले केदारनाथ से यात्रा शुरू करते हैं, फिर तुंगनाथ, रुद्रनाथ और उसके बाद मध्यमहेश्वर की ओर बढ़ते हैं। कल्पेश्वर इस यात्रा की अंतिम कड़ी होता है।
मध्यमहेश्वर में, भगवान शिव की नाभि या मध्य भाग की पूजा की जाती है — इसी कारण इसे "मध्यम" + "महेश्वर" कहा जाता है। यह शिव का वह रूप है जो न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का केन्द्र है, बल्कि शरीर और आत्मा के संतुलन का प्रतीक भी है।
ऐसा माना जाता है कि महाभारत के वीर पात्र पांडवों ने इस मंदिर का निर्माण किया था http://www.badrinath-kedarnath.gov.in/content-kedar.aspx?id=36 Panch Kedar: Madmaheshwar 2006 Shri Badrinath -Shri Kedarnath Temple Committee 2009-07-16, जब वे अपने कृत्यों के प्रायश्चित हेतु शिव की खोज में निकले थे। केदारनाथ में शिव उनके सामने सीधे प्रकट नहीं हुए, बल्कि विभिन्न अंगों में विभाजित होकर विभिन्न स्थानों पर प्रकट हुए — और उन्हीं स्थानों पर पंच केदार के मंदिर बने।
यहाँ पहुँचने के लिए श्रद्धालुओं को लगभग 16 से 18 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है। यह यात्रा आमतौर पर रुद्रप्रयाग जिले के उखीमठ के पास स्थित रांसी गाँव से शुरू होती है, जो मध्यमहेश्वर का बेस कैंप माना जाता है। कुछ लोग अकटोलीधार से भी चढ़ाई शुरू करते हैं, हालांकि रांसी का मार्ग अधिक लोकप्रिय और सुव्यवस्थित माना जाता है।
सन्दर्भ
श्रेणी:उत्तराखण्ड में शिव मन्दिर
श्रेणी:उत्तराखण्ड में हिन्दू मन्दिर
श्रेणी:पंच केदार
श्रेणी:रुद्रप्रयाग जिला