411 REFERENCE · Wikipedia
सौदागर (1973 फ़िल्म)
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
सौदागर सौदागर.jpg सौदागर का पोस्टर ताराचंद बड़जात्यासुभाष घई सुधेन्दु रॉय रवीन्द्र जैन सुधेन्दु रॉय (पटकथा)पी.एल.संतोषी (संवाद) अमिताभ बच्चन नूतन पदमा खन्ना दिलीप रंजन मुखोपाध्याय मुख़्तार अहमद 131 मिनट 26 अक्तूबर, 1973 भारत हिन्दी
सौदागर 1973 में बनी हिन्दी भाषा की फ़िल्म है। इसका निर्देशन सुधेन्दु रॉय द्वारा किया गया और नरेन्द्रनाथ मित्र की कहानी रस पर आधारित है। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और नूतन प्रमुख भूमिकाओं में है।गुड़ बेचने से लेकर लोगों का सामान उठाने तक, अमिताभ ने फिल्मों में किए ऐसे काम https://bollywood.bhaskar.com/news/amitabh-bachchan-the-biggest-worker-of-the-bollywood-5863900.html 16 अगस्त 2018 दैनिक भास्कर 1 मई 2018 https://web.archive.org/web/20180816125808/https://bollywood.bhaskar.com/news/amitabh-bachchan-the-biggest-worker-of-the-bollywood-5863900.html 16 अगस्त 2018 dead हालांकि इस फ़िल्म को बॉक्स ऑफ़िस में उतनी सफलता नहीं मिली लेकिन इसे भारत की ओर से अकादमी पुरस्कार के लिए भेजा गया था लेकिन यह फ़िल्म नामांकित न हो सकी।
संक्षेप
नौजवान मोती (अमिताभ बच्चन) खजूर का रस ठेके पर निकालता है और उसका महजबी (नूतन) नाम की थोड़ी उम्र में बड़ी विधवा से गुड़ बनवाता है और उसे आमदनी में हिस्सा भी देता है। महजबी की गुड़ बनाने की कला लाजवाब है और मोती का गुड़ हाथों हाथ बिक जाता है। ये मौसमी काम है और जब इसका मौसम नहीं होता वो एक सुंदर युवती फूल बानो (पदमा खन्ना) से मिलता है और उससे शादी करना चाहता है। जब वह उसके अब्बा शेख़ साहब (मुराद) से उसका हाथ मांगने जाता है तो शेख़ साहब कहते हैं कि उन्हें ५०० महर चाहिए ताकि उनकी लड़की सुरक्षित रहे। जो कि उसके पास देने को नहीं है। वह २००, २५० और ३०० की मेहर भी ठुकरा देता है। मायूस लौट के आये मोती को कोई यह सलाह देता है कि जो उसका गुड़ बनाती है उसी से निक़ाह पढ़वाकर अपनी आमदनी का हिस्सा बचा ले। काम के फाश में पड़ा मोती महजबी के साथ निक़ाह पढ़वाता है और उसे अपने घर लाकर और अधिक गुड़ बनवाता है। जब उसके पास मेहर के पैसे पूरे हो जाते हैं तो वह महजबी को तलाक़ देता है और फूल बानो से ब्याह रचा लेता है। इस सदमे से महजबी किसी दूसरे गांव में एक मछली के व्यापारी, जिसके तीन बच्चे पहले से ही हैं, से ब्याह रचा लेती है। जब गुड़ बनाने का मौसम आता है तो फूल बानो जिसे गुड़ बनाने की कला का ज्ञान नहीं है निम्न गुणवत्ता का गुड़ बना के देती है। जिसकी वजह से उससे कोई गुड़ नहीं ख़रीदता है और मण्डी में उसकी १० साल पुरानी साख ख़त्म हो जाती है। आख़िरकार मोती थक हार के रस की दो हांडियाँ महजबी के नये घर लेकर जाता है और महजबी से उसका गुड़ बनाने की गुहार लगाता है। मोती के पीछे-पीछे फूल बानो भी आ जाती है और जब महजबी इस बात से इन्कार कर रही होती है कि वह मोती के लिए गुड़ बनाएगी, तभी उसकी नज़र बाड़े के पीछे खड़ी रोती हुयी फूल बानो पर पड़ती है। फूल बानो उसे आपा (दीदी) पुकारती है और दोनों आलिंगन कर लेते हैं। इस फ़िल्म के आख़िर में यह नहीं बताया गया है कि क्या महजबी ने फिर से मोती के लिए गुड़ बनाना शुरु कर दिया या फूल बानो को अपने गुड़ बनाने के राज़ बता दिए।
मुख्य कलाकार
अमिताभ बच्चन - मोती
नूतन - महजबी
पदमा खन्ना - फूल बानो
मुराद - फूल बानो का पिता
लीला मिश्रा - गांव की एक बुढ़िया
त्रिलोक कपूर
सी एस दुबे
संगीत
गीत गायक रवीन्द्र जैन रवीन्द्र जैन तेरा मेरा साथ रहे लता मंगेश्कर 5:45 क्यों लायो संइया पान आशा भोंसले 4:41 मैं हूँ फूल बानो लता मंगेश्कर 4:18 दूर है किनारा मन्ना डे 5:31 हुस्न है या कोई कयामत है मोहम्मद रफी, आरती मुखर्जी 4:57 हर हसीन चीज़ का किशोर कुमार 4:12 सजना है मुझे सजना के लिए आशा भोंसले 5:04
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
0070637 सौदागर
श्रेणी:1973 में बनी हिन्दी फ़िल्म
श्रेणी:रवीन्द्र जैन द्वारा संगीतबद्ध फिल्में