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प्रेमचन्द के फटे जूते
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प्रेमचन्द के फटे जूते हरिशंकर परसाई का व्यंग्य-संग्रह है।
विशेषताएँ
इस संग्रह को तीन भागों में बाँटा गया है। यथा- 'व्यंग्य निबन्ध' , 'व्यंग्य कथा' तथा 'विविध' आदि। इनमें से प्रथम भाग व्यंग्य निबन्ध में कुल ३० निबन्धों का संग्रह किया गया है। दूसरे भाग में २० व्यंग्य कथाओं का समावेश किया गया है।
व्यंग्य
इन्स्पेक्टर मातादीन चाँद परहरिशंकर परसाई प्रेमचन्द के फटे जूते २०१५ भारतीय ज्ञानपीठ नयी दिल्ली 978-93-263-5166-9 २१० - इसमें भारतीय पुलिस व्यवस्था पर व्यंग्य किया गया है। इसके संदर्भ में परसाई लिखते हैं कि-चाँद सरकार ने भारत सरकार को लिखा था-"यों हमारी सभ्यता बहुत आगे बढ़ी है। पर हमारी पुलिस मे पर्याप्त सक्षमता नहीं है। वह अपराधी का पता लगाने और उसे सजा दिलाने में अक्सर सफल नहीं होती। सुना है आपके यहाँ रामराज है। मेहरबानी करके किसी पुलिस अफसर को भेजें जो हमारी पुलिस को शिक्षित कर दे।"हरिशंकर परसाई प्रेमचन्द के फटे जूते २०१५ भारतीय ज्ञानपीठ नयी दिल्ली २१०
इन्हें भी देखें
हरिशंकर परसाई
संदर्भ
श्रेणी:हरिशंकर परसाई
श्रेणी:पुस्तकें
श्रेणी:व्यंग्य
श्रेणी:प्रेमचंद