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स्पीशीज़ प्लांटारम
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स्पीशीज़ प्लांटारम Species plantarum 001.jpg कार्ल लीनियस स्वीडन लैटिन वनस्पति विज्ञान, पादप वर्गिकी वैज्ञानिक संदर्भ ग्रंथ 1 मई 1753 1,200 पृष्ठ (दो खंडों में)
स्पीशीज़ प्लांटारम (Species Plantarum; हिन्दी अर्थ: पौधों की प्रजातियाँ), वनस्पति विज्ञान और जैविक वर्गीकरण के इतिहास में अब तक की सबसे महत्वपूर्ण और आधारभूत पुस्तकों में से एक है। इसकी रचना महान स्वीडिश वनस्पतिशास्त्री और जीवविज्ञानी कार्ल लीनियस ने की थी। दो खंडों में विभाजित यह ऐतिहासिक ग्रंथ पहली बार 1753 में स्टॉकहोम से प्रकाशित हुआ था। इस पुस्तक को आधुनिक पादप वर्गिकी और 'द्विपद नामकरण' प्रणाली का औपचारिक प्रस्थान बिंदु माना जाता है।Stace Clive A. Plant Taxonomy and Biosystematics https://archive.org/details/planttaxonomybio0000cliv Cambridge University Press 1991 978-0521427852 24-26Species: Practical Taxonomic Procedure for Biologists
'द्विपद नामकरण' का मानकीकरण
'स्पीशीज़ प्लांटारम' का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी योगदान पौधों के नामकरण की प्रणाली को सरल और मानकीकृत करना था। लीनियस से पहले, पौधों के वैज्ञानिक नाम बहुत लंबे और वर्णनात्मक होते थे, जिन्हें याद रखना लगभग असंभव था।
इस पुस्तक में, लीनियस ने पहली बार हर पौधे को एक संक्षिप्त और दो शब्दों वाला लैटिन नाम (द्विपद नाम) दिया। पहला शब्द 'वंश' को दर्शाता था और दूसरा शब्द उसकी 'विशिष्ट प्रजाति' को। इसी प्रणाली के तहत मानव जाति को होमो सेपियन्स और आम को मैंगिफेरा इंडिका कहा गया। इस वैज्ञानिक सरलीकरण ने पूरी दुनिया के जीवविज्ञानियों को शोध और संचार का एक साझा मंच प्रदान किया।Stearn William T. Introduction to Linnaeus's Species Plantarum Ray Society 1957 10-15
संरचना और लैंगिक वर्गीकरण प्रणाली
इस विशाल ग्रंथ में लीनियस ने अपने समय तक ज्ञात लगभग 5,940 पौधों की प्रजातियों का वर्णन किया है। इन पौधों को व्यवस्थित करने के लिए उन्होंने अपनी प्रसिद्ध 'लैंगिक प्रणाली' का उपयोग किया।
उन्होंने पौधों को उनके फूलों के प्रजनन अंगों—पुंकेसर और स्त्रीकेसर-की संख्या और व्यवस्था के आधार पर 24 वर्गों में विभाजित किया। यद्यपि आधुनिक वनस्पति विज्ञान में यह कृत्रिम लैंगिक वर्गीकरण अब उपयोग नहीं किया जाता (क्योंकि अब डीएनए और विकासवादी संबंधों पर आधारित वर्गीकरण होता है), लेकिन 18वीं सदी में पौधों को पहचानने का यह सबसे व्यावहारिक और तेज़ तरीका था।Jarvis Charlie Order out of Chaos: Linnaean Plant Names and their Types Linnean Society of London 2007 978-0950620770 45-48
अंतर्राष्ट्रीय वनस्पति कोड और ऐतिहासिक महत्व
वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में इस पुस्तक का अधिकार इतना सर्वोपरि है कि आधुनिक विज्ञान ने 'स्पीशीज़ प्लांटारम' के प्रकाशन की तिथि, 1 मई 1753, को आधिकारिक रूप से पादप नामकरण का प्रारंभिक बिंदु घोषित किया है।
'शैवाल, कवक और पौधों के लिए अंतर्राष्ट्रीय नामकरण कोड' के अनुसार, 1 मई 1753 से पहले पौधों को दिए गए किसी भी वैज्ञानिक नाम को आज अमान्य माना जाता है। लीनियस द्वारा इस पुस्तक में दिए गए नाम ही आज तक पूरी दुनिया में आधिकारिक और वैध माने जाते हैं।McNeill J. International Code of Nomenclature for algae, fungi, and plants (Melbourne Code) Koeltz Scientific Books 2012 978-3874294256 Article 13.1Highlight Summer 2007
यह ग्रंथ केवल नामों की एक सूची नहीं है; यह विज्ञान की उस खोज का प्रतीक है जिसमें मनुष्य ने प्रकृति के विशाल साम्राज्य को एक तार्किक और व्यवस्थित ढाँचे में समझने का सफल प्रयास किया।Knapp Sandra Fact and fantasy: The impact of Species Plantarum on modern botanical nomenclature https://archive.org/details/taxon_2003-08_52_3/page/411 Taxon 52 3 2003 411-414 10.2307/3647444
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
बायोडायवर्सिटी हेरिटेज लाइब्रेरी (BHL) पर 'स्पीशीज़ प्लांटारम' का मूल डिजिटल स्कैन (1753)
श्रेणी:वनस्पति विज्ञान
श्रेणी:लैटिन साहित्य