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भौतिक शास्त्र

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right|thumb|350px|भौतिक परिघटनाओं के उदाहरण भौतिकशास्त्र या भौतिकी प्राकृतिक विज्ञान का एक मूल विषय है जो पदार्थ, उस के मूलभूत घटकों, उस की गति और व्यवहार, देशकाल के माध्यम से और ऊर्जा और बल की सम्बन्धित संस्थाओं का अध्ययन करता है। भौतिकी सबसे मौलिक वैज्ञानिक विषयों में से एक है, जिस का मुख्य लक्ष्य यह समझना है कि ब्रह्माण्ड कैसे व्यवहार करता है। जो वैज्ञानिक भौतिकी के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखता है, भौतिक शास्त्री कहलाता है। भौतिकी प्राचीनतम शैक्षणिक विषयों में से एक है और, खगोल शास्त्र के समावेश के कारण, प्रायः प्राचीनतम है। पिछली दो सहस्राब्दी में, भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित की कुछ शाखाएँ प्राकृतिक दर्शनशास्त्र का एक अंश थीं, परन्तु १७वीं शताब्दी में वैज्ञानिक क्रान्ति के दौरान ये प्राकृतिक विज्ञान अपने आप में अद्वितीय शोध प्रयासों के रूप में उभरे। भौतिकी अनुसन्धान के कई अन्तर्विषयक क्षेत्रों, जैसे जैवभौतिकी और प्रमात्रा रसायनिकी के साथ प्रतिच्छेद करती है, और भौतिकी की सीमाओं को कठोर रूप से परिभाषित नहीं किया गया है। भौतिकी में नए विचार प्रायः अन्य विज्ञानों द्वारा अध्ययन किए गए मौलिक तन्त्रों की व्याख्या करते हैं और इन और अन्य शैक्षणिक विषयों जैसे दर्शनशास्त्र में अनुसन्धान के नूतन मार्ग सुझाते हैं। भौतिकी में प्रगति अक्सर नूतन तकनीकों में प्रगति को सक्षम बनाती है। उदाहरणः विद्युच्चुम्बकत्व, ठोसावस्था भौतिकी, परमाणु भौतिकी की समझ में हुई प्रगति ने सीधा नूतनोत्पादों के विकास का मार्ग प्रशस्त किया जिन्होंने आधुनिक समाज को नाटकीय रूप से बदल दिया है, जैसे कि दूरदर्शन, संगणकों, गृहोपकरण, परमाण्वस्त्र। ऊष्मगतिकी में प्रगति के कारण औद्योगीकरण का विकास हुआ और यान्त्रिकी में हुई प्रगति ने कलन के विकास को प्रेरित किया। भौतिकी की शाखाएँ 359x359px|right|भौतिकी के चार प्रमुख क्षेत्र चिरसम्मत भौतिकी चिरसम्मत भौतिकी चिरसम्मत भौतिकी में पारम्परिक शाखाएँ और विषय शामिल हैं जिन्हें २०वीं शताब्दी की आरम्भ से पूर्व पहचाना और अच्छी तरह से विकसित किया गया था: चिरसम्मत यान्त्रिकी, ध्वनिकी, प्रकाशिकी, ऊष्मगतिकी और विद्युच्चुम्बकत्व। चिरसम्मत यान्त्रिकी गति में पिण्डों और बलों द्वारा पिण्डों पर कार्य किए जाने से सम्बन्धित है और इसे स्थैतिकी में विभाजित किया जा सकता है (किसी पिण्ड या पिण्डों पर बलों का अध्ययन जो त्वरण के अधीन नहीं है), शुद्ध गतिकी (गति के कारणों का ध्यान किए बिना उस का अध्ययन), और गतिकी (गति का अध्ययन और इसे प्रभावित करने वाले बल); यान्त्रिकी को ठोस यान्त्रिकी और तरल यान्त्रिकी (सातत्यक यान्त्रिकी के रूप में एक साथ जाना जाता है) में विभाजित किया जा सकता है, उत्तरार्द्ध में द्रवस्थैतिकी, द्रवगतिकी, वायुगतिकी और गैसयान्त्रिकी जैसी शाखाएँ शामिल हैं। ध्वनिकी इस का अध्ययन है कि ध्वनि कैसे उत्पन्न, नियन्त्रित, प्रसारित और प्राप्त की जाती है। ध्वनिकी की महत्वपूर्ण आधुनिक शाखाओं में पराध्वनिकी शामिल हैं, मानव श्रवण की सीमा से परे बहुत उच्चावृत्ति की ध्वनि तरंगों का अध्ययन; जैवध्वनिकी, पश्वाह्वानों और श्वरण की भौतिकी, और विद्युद्ध्वनिकी, वैद्युतिकी का प्रयोग करके श्राव्य ध्वनि तरंगों का हेरफेर। प्रकाशिकी, प्रकाश का अध्ययन, न केवल दृश्य प्रकाश से सम्बन्धित है, बल्कि अवलाल और पराबैंगनी विकिरण से भी सम्बन्धित है, जो दृश्यता के अतिरिक्त दृश्य प्रकाश की सभी परिघटनाओं को प्रदर्शित करता है, जैसे, प्रतिबिम्ब, अपवर्तन, हस्तक्षेप, विवर्तन, विक्षेपण और ध्रुवीकरण। ताप ऊर्जा का एक रूप है, आन्तरिक ऊर्जा जो कणों के पास होती है जिससे पदार्थ बना होता है; ऊष्मगतिकी ताप और ऊर्जा के अन्य रूपों के मध्य सम्बन्धों से सम्बन्धित है। विद्युत और चुम्बकत्व का अध्ययन भौतिकी की एक ही शाखा के रूप में किया गया है क्योंकि 19वीं शताब्दी की आरम्भ में उनके बीच घनिष्ठ सम्बन्ध की खोज की गई थी; एक वैद्युतिक धारा एक चुम्बकीय क्षेत्र को जन्म देता है, और एक परिवर्तित चुम्बकीय क्षेत्र एक वैद्युतिक धारा को प्रेरित करता है। विद्युत्स्थैतिकी स्थैर्य पर वैद्युतिक आवेशों, गतिमान आवेशों के साथ विद्युद्गतिकी और स्थिर चुम्बकीय ध्रुवों के साथ स्थिर चुम्बकिकी से सम्बन्धित है। आधुनिक भौतिकी आधुनिक भौतिकी चिरसम्मत भौतिकी सामान्यतः अवलोकन के सामान्य स्तर पर पदार्थ और ऊर्जा से सम्बन्धित है, जबकि आधुनिक भौतिकी का अधिकांश भाग अत्यधिक परिस्थितियों में वृहत्तम यह क्षुद्रतम स्तर पर पदार्थ और ऊर्जा के व्यवहार से सम्बन्धित है। उदाहरणार्थ, परमाणु और नाभिकीय भौतिकी क्षुद्रतम स्तर पर पदार्थ का अध्ययन करते हैं जिस पर रासायनिक तत्त्वों की पहचान की जा सकती है। प्राथमिक कणों की भौतिकी और भी क्षुद्रतर स्तर पर है क्योंकि यह पदार्थ की सबसे मूल इकाइयों से संबंधित है; कण त्वरक में कई प्रकार के कणों का उत्पादन करने के लिए आवश्यक अत्यंत उच्चोर्जा के कारण भौतिकी की इस शाखा को उच्चोर्जा भौतिकी के रूप में भी जाना जाता है। इस स्तर पर, अन्तरिक्ष, समय, पदार्थ और ऊर्जा की सामान्य, सामान्य धारणाएँ अब मान्य नहीं हैं। आधुनिक भौतिकी के दो प्रमुख सिद्धान्त चिरसम्मत भौतिकी द्वारा प्रस्तुत अन्तरिक्ष, समय और पदार्थ की अवधारणाओं की एक भिन्न चित्र प्रस्तुत करते हैं। चिरसम्मत यान्त्रिकी प्रकृति को निरन्तर मानती है, जबकि प्रमात्रा यान्त्रिकी परमाणु और उप-परमाणु स्तर पर कई घटनाओं की असतत प्रकृति और ऐसी परिघटनाओं के विवरण में कणों और तरंगों के पूरक पहलुओं से सम्बन्धित है। सापेक्षता सिद्धान्त परिघटना के वर्णन से सम्बन्धित है जो निर्देश तंत्र में होता है जो एक पर्यवेक्षक के सम्बन्ध में गति में होता है; विशेष आपेक्षिकता सिद्धान्त गुरुत्वाकर्षक क्षेत्र की अनुपस्थिति में गति से सम्बन्धित है और गति के साथ सामान्यापेक्षिकता सिद्धान्त और गुरुत्वाकर्षण के साथ इसका सम्बन्ध है। प्रमात्रा सिद्धान्त और सापेक्षता का सिद्धान्त दोनों ही आधुनिक भौतिकी के कई क्षेत्रों में अनुप्रयोग पाते हैं। भौतिक शास्त्र के प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं: यांत्रिकी तथा द्रव्यगुण ध्वनिकी ऊष्मा प्रकाशिकी आधुनिक भौतिकी कण भौतिकी इन्हें भी देखें भौतिकी के प्रमुख सूत्र भौतिक गुण भौतिक राशि भौतिक नियतांक सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ नूतन भौतिकी कोश (गूगल पुस्तक ; लेखक - शिवगोपाल मिश्र) गणित एवं भौतिकी के अप्लेट्स Flash Animations for Physics भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में रोज़गार के अवसर - डॉ॰ सीमिन रुबाब भौतिकी के नियम (अंग्रेजी में) प्राचीन भारत में भौतिकी भौतिकी विभाग, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर भारतीय भौतिकी संस्थान भुवनेश्वर भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में रोज़गार के अवसर - डॉ॰ सीमिन रुबाब श्रेणी:विज्ञान श्रेणी:भौतिकी श्रेणी:प्राकृतिक विज्ञान