Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

रागदरबारी

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

रागदरबारी raagdarbari.jpg 200px राग दरबारी श्रीलाल शुक्ल 1968 हिन्दी भारत व्यंग्य प्रिंट 330 81-267-0478-0 रागदरबारी विख्यात हिन्दी साहित्यकार श्रीलाल शुक्ल की प्रसिद्ध व्यंग्य रचना है जिसके लिये उन्हें सन् 1969 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह ऐसा उपन्यास है जो गाँव की कथा के माध्यम से आधुनिक भारतीय जीवन की मूल्यहीनता को सहजता और निर्ममता से अनावृत करता है। शुरू से अन्त तक इतने निस्संग और सोद्देश्य व्यंग्य के साथ लिखा गया हिंदी का शायद यह पहला वृहत् उपन्यास है। ‘राग दरबारी’ का लेखन 1964 के अन्त में शुरू हुआ और अपने अन्तिम रूप में 1967 में समाप्त हुआ। 1968 में इसका प्रकाशन हुआ और 1969 में इस पर श्रीलाल शुक्ल को साहित्य अकादमी का पुरस्कार मिला। 1986 में एक दूरदर्शन-धारावाहिक के रूप में इसे लाखों दर्शकों की सराहना प्राप्त हुई। कथावस्तु राग दरबारी व्यंग्य-कथा नहीं है। इसमें श्रीलाल शुक्ल जी ने स्वतंत्रता के बाद के भारत के ग्रामीण जीवन की मूल्यहीनता को परत-दर-परत उघाड़ कर रख दिया है। इसके संदर्भ में गोपाल राय लिखते हैं कि- “रागदरबारी उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के एक कस्बानुमा गाँव शिवपाल गंज की कहानी है; उस गाँव की जिन्दगी का दस्तावेज, जो स्वतन्त्रता-प्राप्ति के बाद ग्राम विकास और ‘गरीबी हटाओ’ के आकर्षक नारों के बावजूद घिसट रही है।"गोपाल राय हिन्दी उपन्यास का इतिहास 2014 राजकमल प्रकाशन नई दिल्ली 978-81-267-1728-6 260 राग दरबारी की कथा भूमि एक बड़े नगर से कुछ दूर बसे गाँव शिवपालगंज की है जहाँ की जिन्दगी प्रगति और विकास के समस्त नारों के बावजूद, निहित स्वार्थों और अनेक अवांछनीय तत्वों के आघातों के सामने घिसट रही है। शिवपालगंज की पंचायत, कॉलेज की प्रबन्ध समिति और कोआपरेटिव सोसाइटी के सूत्रधार वैद्यजी साक्षात वह राजनीतिक संस्कृति है जो प्रजातन्त्र और लोकहित के नाम पर हमारे चारों ओर फल फूल रही है। पात्र वैद्यजी: वह सभी गांवों की राजनीति के पीछे का मुख्य सूत्रधार है। अपने वाक्य तैयार करने और उसके शब्दों को चुनने में बहुत स्पष्ट, वैद्यजी भी आधिकारिक तौर पर स्थानीय कॉलेज के प्रबंधक हैं। रुप्पन बाबू: वैद्यजी के छोटे बेटे और कॉलेज के छात्रों के नेता, रुप्पन बाबू पिछले कई सालों से 10 वीं कक्षा में रहे हैं, उसी कॉलेज में, जहां उनके पिता प्रबंधक हैं रुप्पन सक्रिय रूप से सभी गांवों की राजनीति में शामिल है और गांव समुदाय द्वारा उनके शानदार गणिता के कारण उनका सम्मान किया जाता है। उपन्यास के अंत में, उसके व्यवहार में एक क्रमिक परिवर्तन देखा जा सकता है। बद्री पहलवान: रुप्पन बाबू के बड़े भाई बद्री अपने पिता की सहभागिता से दूर रहते हैं और खुद को शरीर-निर्माण के अभ्यास में व्यस्त रखते हैं तथा अपने आश्रय की देखभाल करते हैं। रंगनाथ: इतिहास में एम.ए., रंगनाथ वैद्य जी के भतीजे हैं। वह लगभग 5-6 महीने के लिए छुट्टी पर शिवलगंज आ गया है। छोटे पहलवान: गांव की राजनीति में एक सक्रिय पार्टनर बद्री अग्रवाल के एक, गांव की राजनीति में एक सक्रिय सहभागिता है और वैद्यजी द्वारा बुलाए गए बैठकों में लगातार सहभागिता है। प्रिंसिपल साहिब: जैसा कि नाम का अर्थ है, प्रिंसिपल साहिब, छांमल विद्यालय इंटर कॉलेज का प्राचार्य है। कॉलेज में कर्मचारियों के अन्य सदस्यों के साथ उनका संबंध साजिश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जोगनाथ: स्थानीय गुंडे, लगभग हमेशा नशे में वह प्रत्येक 2 सिलेबल्स के बीच "एफ" ध्वनि डालने से एक अनूठी भाषा बोलता है। सनीचर : असली नाम मंगलदास, लेकिन लोग उसे सनीचर कहते हैं। वह वैद्यजी का नौकर है और बाद में वैद्यजी द्वारा राजनीतिक रणनीति के उपयोग के साथ गांव की कठपुतली प्रधान (नेता) बनाया गया था। लंगड़ : वह अस्थायी आम आदमी का प्रतिनिधि है जो भ्रष्ट व्यवस्था का शिकार होता है। इन्हें भी देखें सन्दर्भ बाहरी कडियाँ रागदरबारी (गूगल पुस्तक ; रचनाकार : श्रीलाल शुक्ल) रागदरबारी (गद्यकोश) श्रेणी:हिन्दी उपन्यास श्रेणी:भारतीय उपन्यास श्रेणी:श्रीलाल शुक्ल श्रेणी:साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत हिन्दी भाषा की पुस्तकें श्रेणी:२०वीं सदी का साहित्य