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भरत चक्रवर्ती
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File:Bharat Chakravartin.jpg अगासी समवशरण जिनालय में चक्रवर्ती भरत की प्रतिमा नन्दा अन्यनाम यशावती(माता) , ऋषभदेव
भरत चक्रवर्ती, प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के ज्येष्ठ पुत्र थे। जैनपुराणों के अनुसार वह इस हुंडा अवसर्पिणी काल के प्रथम चक्रवर्ती सम्राट थे Sangave २००१ १९
जैन ग्रंथ "आदिपुराण" जिसके रचयिता आचार्य श्री जिनसेन स्वामी है ने सातवीं शताब्दी में लिखें गए आदिपुराण में प्रथम चक्रवर्ती भरत का विस्तार से वर्णन किया है ; प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव और यशावती के पुत्र चक्रवर्ती भरत एक महान शासक थे
इनके बाहुबली, वृषभसेन, अनंतविजय, अनंतवीर्य, अच्युत, बरवीर,निमी (राजा)आदि 99 भाई और ब्राह्मी एवं सुंदरी नाम की दो बहनें थी|
अनेकों वर्ष राजपाठ करने के उपरांत भरत चक्रवर्ती ने अपने ज्येष्ठ पुत्र को राज पाठ सौंपकर दिगंबर जैन मुनि की दीक्षा ली और केवल ज्ञान प्राप्त करके मोक्ष को प्राप्त किया| आदिपुराण( आचार्य जिनसेन)
समस्त जैन ग्रंथ और समस्त जैनेतर ग्रंथ और प्राचीन शिलालेखों के अनुसार प्रथम जैन तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के प्रथम पुत्र प्रथम चक्रवर्ती सम्राट भरत के नाम से ही इस देश का नाम भारतवर्ष पड़ा।पड़ा"|Sangave २००१ २३
आदिपुराण
thumb|भरत चक्रवर्ती द्वारा देखे गए १६ स्वप्न। यह वर्तमान (दुखमा) काल से जुड़े थे।
7 वी सदी में लिखे गए आदिपुराण में ऋषभदेव, भरत और बाहुबली के दस जन्मों के बारे में बताया गया है। History of Kannada literature http://www.kamat.com/kalranga/kar/literature/history2.htm http://www.kamat.com Students' Britannica India, Volumes 1-5 Popular Prakashan 2000 0-85229-760-2 http://books.google.co.in/books?id=AE_LIg9G5CgC
जन्म और बचपन
भरत के जन्म से पूर्व उनकी माता ने ६ स्वप्न देखे। ऋषभदेव ने उन्हें इनका अर्थ समझाया और बताया कि बालक प्रथम चक्रवर्ती बनेगा।Jain 1929 90Shah 1987 112 भरत की बहन हुई ब्राह्मी।Jain 1929 92 भरत को मुख्य रूप से न्याय की शिक्षा मिली।Jain 1929 93
चक्रवर्ती
जैन कालचक्र के अनुसार हर काल में ६३ शलाकापुरुष जन्म लेते है। इनमें से १२ चक्रवर्ती होते है, जो सम्पूर्ण विश्व पर राज करते है। चक्रवर्ती सबके आदर्श माने जाते है।Nagraj 203 भरत अवसर्पिणी (वर्तमान काल) के प्रथम चक्रवर्ती थे।Jain 1929 66
सप्त रत्न
जैन ग्रंथों के अनुसार चक्रवर्ती के पास सात रत्न होते है-
सुदर्शन चक्र
रानी
रथों की विशाल सेना
आभूषण
अपार सम्पदा
घोड़ों की विशाल सेना
हाथियों की विशाल सेना
राज
जब ऋषभदेव ने मुनि बनने का निश्चय किया, तब उन्होंने अपना साम्राज्य अपने १०० पुत्रों में बाँट दिया |Titze 1998 8 Bharat and Bahubali http://www.shrimad.com/Bharatbahubali.html http://www.shrimad.com 3 अक्तूबर 2015 24 सितंबर 2015 https://web.archive.org/web/20150924101458/http://www.shrimad.com/Bharatbahubali.html dead इसके पश्चात् भरत ने विश्व विजेता बनने का निश्चय किया। सम्पूर्ण विश्व पर विजय करने के पश्चात् चक्रवर्ती बनने के लिए उन्होंने अपने भाइयों से अधीनता स्वीकारने को कहा। ९८ भाइयों ने अपने पुत्रों को राज्य सौंप कर जैनेश्वरी दीक्षा ले ली, परंतु बाहुबली ने उन्हें युद्ध के लिए ललकारा।Jain 1929 143
झगड़ा सुलझाने के लिए तीन तरह के युद्ध हुए:
दृष्टि युद्ध
जल युद्ध
मल युद्ध
बाहुबली युद्ध में जीत गए पर उन्हें संसार से वैराग्य हो गया और वह मुनि बन गए।Jain 2008 105Jain 1929 145
भरत ने कर्म युग में नीति राज की शुरुआत की।Jain 2008 110 उन्होंने चार तरह के दंड निश्चित किए।Glasenapp 1999 365 आदिपुराण के अनुसार उन्होंने ब्राह्मण वर्ण की शुरुआत कीJain 1929 101, पर यह ब्राह्मण वर्ण आज की ब्राह्मण जाति से बहुत भिन्न है ।Jain 2008 111 भरत के पास अवधि ज्ञान था|Jain 2008 115 सभी चक्रवर्तियों की तरह भरत भी संसार की असारता जान मुनि बन गए और अंत में मोक्ष गए।
मंदिर
श्रवणबेलगोला में भरत का एक मंदिर है।
इरिंजालकूदा (कूदलमणिचकाम) भरत मन्दिर असल में एक जैन मन्दिर था जिसके मूलनायक सिद्ध भरत थे।
वर्तमान मे श्री भरत भगवान का एक तीर्थ बना जिसका नाम है श्री क्षेत्र भरत का भारत यह मंगलगिरी सागर मप्र मे है। Introduction to Temples of Kerala http://www.thrikodithanam.org/intro.htm http://www.thrikodithanam.org 3 अक्तूबर 2015 23 अप्रैल 2012 https://web.archive.org/web/20120423140754/http://www.thrikodithanam.org/intro.htm dead
भारत की राजधानी दिल्ली के कनॉट प्लेस में भी भगवान भरत ज्ञानस्थली तीर्थ एक विशाल जैन मंदिर भगवान भरत का गणनी आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से निर्मित किया गया ।
इन्हें भी देखें
भारत नाम की उत्पत्ति
सन्दर्भ
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सन्दर्भ सूची
Sangave Vilas Adinath Facets of Jainology: Selected Research Papers on Jain Society, Religion, and Culture Popular prakashan २००१ Mumbai 81-7154-839-3 harv
Titze Kurt Jainism: A Pictorial Guide to the Religion of Non-Violence Motilal Banarsidass 1998 9788120815346 http://books.google.com/?id=loQkEIf8z5wC harv
Risabha Deva - The Founder of Jainism Champat Rai Jain The Indian Press Limited इलाहबाद 1929 https://archive.org/details/RisabhaDeva-TheFounderOfJainism Not in Copyright
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