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दैवज्ञवल्लभ
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दैवज्ञवल्लभ (Daivagya Vallabha) ज्योतिष शास्त्र का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध ग्रंथ है। यह ग्रंथ भारतीय ज्योतिष (खासकर होरा शास्त्र या जातकमार्ग) और शकुन शास्त्र से संबंधित है।
इस ग्रंथ के बारे में मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
रचयिता: इस ग्रंथ के रचनाकार प्रसिद्ध खगोलशास्त्री और ज्योतिषचार्य वराहमिहिर (Varahamihira) हैं, जिन्हें प्राचीन भारत के महानतम वैज्ञानिकों और ज्योतिषविदों में गिना जाता है।
विषय-वस्तु: 'दैवज्ञवल्लभ' मुख्य रूप से प्रश्ना ज्योतिष (Horary Astrology) पर आधारित है। इसमें किसी विशेष समय पर पूछे गए प्रश्न के आधार पर भविष्यफल, शकुन, और विभिन्न प्रकार की भविष्यवाणियों का विस्तार से वर्णन किया गया है।
महत्व: इस ग्रंथ में ग्रहों की स्थिति, नक्षत्रों के प्रभाव, शकुन-अपशकुन और यात्रा, विवाह तथा अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शुभ समय का आकलन करने की विधियों को सरल रूप में समझाया गया है।
नाम का अर्थ: 'दैवज्ञवल्लभ' का शाब्दिक अर्थ है— "ज्योतिषियों (दैवज्ञ) को प्रिय (वल्लभ)"। यह नाम इस बात का संकेत देता है कि यह ग्रंथ ज्योतिष के जानकारों के लिए कितना उपयोगी और संग्रहणीय है।