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सूरह अन-नास
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अन-नास अप्रैल 2025
सूरह अन-नास File:Sura114.pdf 200px सूरह अन-नास का सुलेखित चित्र सूरह अन-नास की कलात्मक प्रस्तुति मदीनी सूरह 114 سورة الناس लोगों का पालनहार 6
सूरह अन-नास (سورة الناس) क़ुरआन के अंतिम भाग (30वां पारा) की 114वीं और अंतिम सूरह है। इसमें कुल 6 आयतें हैं। इस सूरह में अल्लाह से प्रार्थना की जाती है कि वह हर प्रकार की बुराई और शैतानी विचारों से सुरक्षा प्रदान करे।https://www.quran.com/114
नाम का अर्थ और विषयवस्तु
"अन-नास" का अर्थ है "लोग"। इस सूरह में अल्लाह को लोगों के पालनहार, राजा और ईश्वर के रूप में पुकारा गया है। यह सूरह अल-मुअव्विधतैन का हिस्सा है, जो सुरक्षा के लिए पढ़ी जाने वाली दो सूरहों का समूह है।https://www.islamicity.org/alquran/surah/114/
सूरह का पाठ और अनुवाद
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلنَّاسِ * مَلِكِ ٱلنَّاسِ * إِلَٰهِ ٱلنَّاسِ * مِن شَرِّ ٱلْوَسْوَاسِ ٱلْخَنَّاسِ * ٱلَّذِى يُوَسْوِسُ فِى صُدُورِ ٱلنَّاسِ * مِنَ ٱلْجِنَّةِ وَٱلنَّاسِ
हिन्दी में तर्जुमा
(ऐ नबी!) कह दीजिए, मैं पनाह लेता हूँ इंसानों के रब की। इंसानों के बादशाह की। इंसानों के माबूद (इलाह) की। वस्वसा डालने वाले, पीछे हट जाने वाले (शैतान) के शर से। जो लोगों के सीनों में वस्वसा डालता है। (ख्वाह वह) जिन्नों में से हो या इंसानों में से।https://www.islamicpedia.blog/2025/05/namaz-ki-chhoti-aasan-surah.html Namaz mein padhe jane wali chhoti aur aasan surah in hindi with tarjuma 2025-05-24 Islamic Pedia – कुरान, हदीस, दुआएं और इस्लामी इल्म हिंदी में hi 2025-06-01
सूरह नास के संक्षिप्त विषय
यह सूरह मक्की है, इस में 6 आयतें हैं।
इस में पाँच बार ((नास)) शब्द आने के कारण इस का यह नाम है। जिस का अर्थ इन्सान है।
इस की आयत 1 से 3 तक शरण देने वाले के गुण बताये गये हैं।
आयत 4 में जिस की बुराई से पनाह (शरण) मांगी गई है उस के घातक शत्रु होने से सावधान किया गया है।
आयत 5 में बताया गया है कि वह इन्सान के दिल पर आक्रमण करता है।
आयत 6 में सावधान किया गया है कि यह शत्र जिन्न तथा इन्सान दोनों में होते हैं।
हदीस में है कि नबी (सल्लल्लाह अलैहि व सल्लम) हर रात जब बिस्तर पर जाते तो सूरह इख्लास और यह और इस के पहले की सूरह (अर्थातः फलक) पढ़ कर अपनी दोनों हथेलियाँ मिला कर उन पर फूंकते, फिर जितना हो सके दोनों को अपने शरीर पर फेरते। सिर से आरंभ करते और फिर आगे के शरीर से गुज़ारते। ऐसा आप तीन बार करते थे| (सहीह बुख़ारी: 6319, 5748)
इस्लामिक परंपरा में महत्व
सूरह अन-नास का उपयोग मुसलमानों द्वारा बुरी शक्तियों और शैतानी विचारों से सुरक्षा के लिए किया जाता है। इसे सुबह और शाम के समय अन्य प्रार्थनाओं के साथ पढ़ा जाता है। यह विशेष रूप से मानसिक शांति और आत्मिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।https://sunnah.com
ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण
इस सूरह को मदीना में नाज़िल होने वाली सूरह माना जाता है। इसमें इंसानों के अंदर और बाहर के दुश्मनों से बचने के लिए निर्देश दिए गए हैं। नबी मुहम्मद ने इसे नियमित रूप से पढ़ने की सिफारिश की।
स्रोत
श्रेणी:क़ुरआनी सूरहें
श्रेणी:क़ुरआन
श्रेणी:इस्लामी परंपरा