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अनुच्छेद 80 (भारत का संविधान)
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भारत का संविधान भाग 3 अनुच्छेद 81 (भारत का संविधान) अनुच्छेद 79 (भारत का संविधान) भारतीय संविधान सभा भारत हिंदी :श्रेणी:संविधान 1949 प्रकाशित
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 80 मुख्य रूप से राज्यसभा की संरचना और उसके सदस्यों के चुनाव की प्रक्रिया से संबंधित है।
मूल पाठ
(१) राज्य सभा—
(क) राष्ट्रपति द्वारा खंड (३) के उपबन्धों के अनुसार नामनिर्देशित किये जाने वाले बारह सदस्यों से, तथा
(ख) राज्यों के [और संघ राज्य क्षेत्रों के] दो सौ अड़तीस से अनधिक प्रतिनिधियों से, मिल कर बनेगी।
(२) राज्य सभा में राज्यों के [२][और संघ राज्य क्षेत्रों के] प्रतिनिधियों द्वारा भरे जाने वाले स्थानों का बंटवारा चतुर्थ अनुसूची में अन्तर्विष्ट तद्विषयक उपबन्धों के अनुसार होंगा।
(३) खंड १ के उपखंड (क) के अधीन राष्ट्रपति द्वारा नामनिर्देशित किये जाने वाले सदस्य ऐसे व्यक्ति होंगे जिन्हें निम्न प्रकार के विषयों के बारे में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव है, अर्थात्—
साहित्य, विज्ञान, कला और सामाजिक सेवा।
(४) राज्य-सभा के लिये प्रत्येक राज्य के प्रतिनिधि उस राज्य की विधान-सभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अनुपाती प्रतिनिधित्व-पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा निर्वाचित होंगे।
(५) राज्य-सभा के लिये संघ राज्य-क्षेत्रों के प्रतिनिधि ऐसी रीति से चुने जायेंगे जैसी कि संसद् विधि द्वारा विहित करे।।भारत का संविधान भारत का संविधान (संपा॰) प्रसाद राजेन्द्र लेखक:राजेन्द्र प्रसाद 1957 ३० पृष्ठ:भारत का संविधान (१९५७).djvu/१०३
मुख्य प्रावधान
1. सदस्यों की अधिकतम संख्या
अनुच्छेद 80 के अनुसार, राज्यसभा में सदस्यों की कुल संख्या 250 से अधिक नहीं हो सकती। इसे दो भागों में बाँटा गया है:
12 मनोनीत सदस्य: भारत के राष्ट्रपति द्वारा ऐसे 12 व्यक्तियों को नामांकित किया जाता है जिनके पास साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव हो।
238 निर्वाचित सदस्य: ये सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि होते हैं।
नोट: वर्तमान में राज्यसभा की प्रभावी संख्या 245 है (233 निर्वाचित + 12 मनोनीत)।
2. सीटों का आवंटन
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सीटों का आवंटन संविधान की चौथी अनुसूची के अनुसार किया जाता है। यह आवंटन मुख्य रूप से राज्यों की जनसंख्या के आधार पर होता है।
3. चुनाव की प्रक्रिया
राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव सीधा जनता द्वारा नहीं किया जाता, बल्कि एक अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली के माध्यम से होता है:
कौन वोट देता है? राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य ।
प्रणाली: चुनाव "आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली" और "एकल संक्रमणीय मत" के आधार पर होता है।
4. सदन की प्रकृति
हालाँकि अनुच्छेद 80 संरचना की बात करता है, लेकिन यह समझना ज़रूरी है कि अनुच्छेद 83 के अनुसार राज्यसभा एक स्थायी सदन है।
यह कभी पूरी तरह भंग नहीं होता।
इसके एक-तिहाई (1/3) सदस्य हर दो साल में सेवानिवृत्त हो जाते हैं।
प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है।
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
भारत का संविधान - आधिकारिक वेबसाइट
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