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केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो
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केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरोCentral Bureau of Investigation CBI Cbi logo.svg 200px Seal of CBI Industry, Impartiality, Integrity Sanctioned: 7274Actual: 5685Vacant: 1589 (21.84%)as on 01 Mar 2017OVER ALL VACANCY POSITION OF CBI AS ON 01.03.2017 http://www.cbi.nic.in/rt_infoact/cbi_vac20170301.pdf 01 21 मार्च 2017 https://web.archive.org/web/20170321181846/http://www.cbi.nic.in/rt_infoact/cbi_vac20170301.pdf 21 मार्च 2017 dead 695.62 c 1 (FY2017-18)http://www.financialexpress.com/budget/union-budget-2017-cbi-gets-marginal-increase-of-8-31-pc-in-budgetary-allocation/533255/ Union Budget 2017: CBI gets marginal increase of 8.31 pc in budgetary allocation 18 सितंबर 2017 https://web.archive.org/web/20170918154425/http://www.financialexpress.com/budget/union-budget-2017-cbi-gets-marginal-increase-of-8-31-pc-in-budgetary-allocation/533255/ 18 सितंबर 2017 live 1963 as the Special Police Establishment नई दिल्ली, भारत नरेन्द्र मोदी प्रधानमन्त्री भारत सरकार गृह मन्त्रालय http://cbi.nic.in/
केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (Central Bureau of Investigation) या सीबीआई भारत सरकार की प्रमुख जाँच एजेन्सी है। यह आपराधिक एवं राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हुए भिन्न-भिन्न प्रकार के मामलों की जाँच करने के लिये लगायी जाती है।
यह कार्मिक एवम् प्रशिक्षण विभाग के अधीन कार्य करती है। यद्यपि इसका संगठन फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन से मिलता-जुलता है किन्तु इसके अधिकार एवं कार्य-क्षेत्र एफ़बीआई की तुलना में बहुत सीमित हैं। इसके अधिकार एवं कार्य दिल्ली विशेष पुलिस संस्थापन अधिनियम (Delhi Special Police Establishment Act), 1946 से परिभाषित हैं। भारत के लिये सीबीआई ही इन्टरपोल की आधिकारिक इकाई है।
इतिहास
केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो की उत्पत्ति भारत सरकार द्वारा सन् 1941 में स्थापित विशेष पुलिस प्रतिष्ठान से हुई है। उस समय विशेष पुलिस प्रतिष्ठान का कार्य द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीय युद्ध और आपूर्ति विभाग में लेन-देन में घूसखोरी और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करना था। विशेष पुलिस प्रतिष्ठान का अधीक्षण युद्ध विभाग के जिम्मे था।http://cbi.nic.in/hn/aboutus/history.php केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो का संक्षिप्त इतिहास 18 दिसंबर 2015 https://web.archive.org/web/20151219165804/http://cbi.nic.in/hn/aboutus/history.php 19 दिसंबर 2015 dead
युद्ध समाप्ति के बाद भी, केन्द्र सरकार के कर्मचारियों द्वारा घूसखोरी और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने हेतु एक केन्द्रीय सरकारी एजेंसी की जरूरत महसूस की गई। इसीलिए सन् 1946 में दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान अधिनियम लागू किया गया। इस अधिनियम के द्वारा विशेष पुलिस प्रतिष्ठान का अधीक्षण गृह विभाग को हस्तांतरित हो गया और इसके कामकाज को विस्तार करके भारत सरकार के सभी विभागों को कवर कर लिया गया। विशेष पुलिस प्रतिष्ठान का क्षेत्राधिकार सभी संघ राज्य क्षेत्रों तक विस्तृत कर दिया गया और सम्बन्धित राज्य सरकार की सहमति से राज्यों तक भी इसका विस्तार किया जा सकता था। दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान को इसका लोकप्रिय नाम ‘केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो’ गृह मंत्रालय संकल्प दिनांक 1.4.1963 द्वारा मिला। आरम्भ में केन्द्र सरकार द्वारा सूचित अपराध केवल केन्द्रीय सरकार के कर्मचारियों द्वारा भ्रष्टाचार से ही सम्बन्धित था। धीरे-धीरे, बड़ी संख्या में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की स्थापना के साथ ही इन उपक्रमों के कर्मचारियों को भी केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो के क्षेत्र के अधीन लाया गया। इसी प्रकार, सन्1969 में बैंकों के राष्ट्रीयकरण के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और उनके कर्मचारी भी केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो के क्षेत्र के अधीन आ गए।
संगठन और रैंक संरचना
अधिक जानकारी: सीबीआई संगठनात्मक चार्ट और भारत में पुलिस रैंकों की सूची
सीबीआई ने एक निदेशक, पुलिस महानिदेशक या पुलिस (राज्य) के आयुक्त के रैंक के एक आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में है। निदेशक सीवीसी अधिनियम 2003 के द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर चुना जाता है और 2 साल की अवधि है। सीबीआई में अन्य महत्वपूर्ण रैंकों आईआरएस द्वारा भी किया जा सकता है के रूप में आईपीएस अधिकारियों के रूप में अच्छी तरह से संभाला विशेष निदेशक, अतिरिक्त निदेशक, संयुक्त निदेशक, पुलिस उपमहानिरीक्षक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, उप अधीक्षक पुलिस. बाकी सीधे सीबीआई, उप निरीक्षक, सहायक उप निरीक्षक, हेड कांस्टेबल, वरिष्ठ कांस्टेबल और कांस्टेबल भर्ती कर रहे हैं।
सीबीआई की वार्षिक रिपोर्ट कर्मचारी के अनुसार आमतौर पर अनुसचिवीय कर्मचारी, पूर्व संवर्ग पदों है जो तकनीकी प्रकृति, कार्यकारी स्टाफ और ईडीपी स्टाफ के आम तौर पर कर रहे हैं के बीच विभाजित है। हिन्दी भाषा स्टाफ आधिकारिक भाषाओं में से विभाग के अंतर्गत आता है।
अनुसचिवीय कर्मचारी एलडीसी, UDC, अपराध आदि सहायकों कार्यकारी कर्मचारी कांस्टेबल, एएसआई, उप निरीक्षक, निरीक्षकों आदि ईडीपी कर्मचारी डाटा एंट्री ऑपरेटर, डाटा प्रोसेसिंग सहायकों, सहायक प्रोग्रामर, प्रोग्रामर और सर्व शिक्षा अभियान में शामिल है
विवाद और आलोचना
केन्द्रीय अनुसंधान ब्यूरो प्रायः विवादों और आरोपों से घिरी रहती है। इस पर केन्द्रीय सरकार के एजेंट के रूप में पक्षपातपूर्ण काम करने का आरोप लगताहै।
भ्रष्टाचार
2013 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश (जो बाद में भारत के मुख्य न्यायाधीश बने) आर. एम. लोढ़ा ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी करते हुए उसे “अपने मालिक की आवाज़ में बोलने वाला पिंजरे में बंद तोता” कहा था। उनका यह कथन इस व्यापक धारणा को प्रतिबिंबित करता है कि सत्ता में किसी भी राजनीतिक दल के रहते हुए सीबीआई पर अत्यधिक राजनीतिक हस्तक्षेप बना रहता है, जिससे उसकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगते हैं।http://in.reuters.com/article/cbi-supreme-court-parrot-coal-idINDEE94901W20130510 https://web.archive.org/web/20151220025736/http://in.reuters.com/article/cbi-supreme-court-parrot-coal-idINDEE94901W20130510 20 December 2015 A 'caged parrot' - Supreme Court describes CBI रॉयटर्स रॉस कोल्विन और सतरूपा भट्टाचार्य 10 मई 2013 10 मई 2013 http://timesofindia.indiatimes.com/india/CBI-a-caged-parrot-heart-of-Coalgate-report-changed-Supreme-Court/articleshow/19952260.cms CBI a 'caged parrot', 'heart' of Coalgate report changed: Supreme Court द टाइम्स ऑफ इंडिया 8 मई 2013 8 मई 2013
सीबीआई के कथित राजनीतिक झुकावhttp://www.firstpost.com/politics/cbis-on-off-raids-how-congress-bureau-of-investigation-works-669666.html CBI's on-off raids: How 'Congress Bureau of Investigation' works firstpost.com 21 मार्च 2013 2013-04-26 वेंकी वेम्बू और कार्यशैली को लेकर समय-समय पर उसके पूर्व अधिकारियों ने भी गंभीर आपत्तियाँ दर्ज की हैं। पूर्व निदेशक जोगिंदर सिंह तथा संयुक्त निदेशक बी. आर. लाल ने संगठन के भीतर भाई-भतीजावाद, त्रुटिपूर्ण अभियोजन और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को उजागर किया है। विशेष रूप से, बी. आर. लाल ने अपनी पुस्तक “हू ओन्स सीबीआई” में विस्तार से वर्णन किया है कि किस प्रकार जाँच प्रक्रियाओं में हेरफेर किया जाता है और उन्हें जानबूझकर प्रभावित या पटरी से उतारा जाता है।http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2006-11-27/india/27799838_1_cbi-joint-director-hawala-official-letters https://web.archive.org/web/20121103163030/http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2006-11-27/india/27799838_1_cbi-joint-director-hawala-official-letters 3 नवंबर 2012 Origin of Hawala funds were not traced विश्व मोहन द टाइम्स ऑफ इंडिया 27 नवंबर 2006
इसके अतिरिक्त, सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के अंतर्गत प्राप्त जानकारियों में भी संगठन के भीतर व्याप्त अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के संकेत मिले हैं।CBI Arrests Own Cop in Bribery Case http://news.outlookindia.com/items.aspx?artid=775478 18 सितंबर 2012 आउटलुक इंडिया 17 सितंबर 2012 https://web.archive.org/web/20130502151654/http://news.outlookindia.com/items.aspx?artid=775478 2 मई 2013http://news.outlookindia.com/items.aspx?artid=754366 Adarsh Scam: CBI Arrests Own Lawyer, Ex-Cong MLC 6 मार्च 2012 27 मार्च 2012 https://web.archive.org/web/20130502151002/http://news.outlookindia.com/items.aspx?artid=754366 2 मई 2013 आरटीआई कार्यकर्ता कृष्णानंद त्रिपाठी ने यह आरोप लगाया कि उनके द्वारा किए गए खुलासों के कारण उन्हें सीबीआई द्वारा उत्पीड़न का सामना करना पड़ा,http://www.mid-day.com/news/2010/apr/060410-Delhi-RTI-activist-complaint-CIC-CBI.htm CBI is harassing me अंशुमन जी दत्ता मिड-डे 4 जून 2011 14 जून 2011 जो संस्थागत पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न उठाता है।http://www.outlookindia.com/article.aspx?261778 Grease on the Lens सैकत दत्ता outlookindia.com 21 सितंबर 2009 9 October 2010 https://web.archive.org/web/20101027063315/http://outlookindia.com/article.aspx?261778 27 अक्तूबर 2010 dead
इन्हीं कारणों से कई राज्यों ने सीबीआई को दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली है। इन राज्यों का आरोप है कि केंद्र सरकार इस एजेंसी का उपयोग वैचारिक रूप से विरोधी दलों को अनुचित रूप से निशाना बनाने के लिए एक उपकरण के रूप में करती है।https://indianexpress.com/article/explained/sc-state-government-consent-cbi-investigation-7617317/ General consent for the CBI: The law, and political reasons for its denial द इंडियन एक्सप्रेस 12 नवंबर 2021 दीप्तिमान तिवारी इस समूचे परिदृश्य से यह स्पष्ट होता है कि सीबीआई की विश्वसनीयता, स्वायत्तता और निष्पक्षता को लेकर व्यापक बहस और चिंताएँ निरंतर बनी हुई हैं।
राजनीतिक हस्तक्षेप
सामान्यतः, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपे जाने वाले मामले अत्यंत संवेदनशील और राष्ट्रीय महत्व के होते हैं। प्रायः राज्य पुलिस विभाग किसी प्रकरण को सीबीआई के अधिकार क्षेत्र में स्थानांतरित करने की अनुशंसा करते हैं, जो एक स्थापित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसके अतिरिक्त, आवश्यकता पड़ने पर केंद्र सरकार भी किसी मामले को सीधे सीबीआई को हस्तांतरित कर सकती है, विशेषकर तब जब प्रकरण का दायरा व्यापक, जटिल या बहु-राज्यीय हो।
हालाँकि, एजेंसी को कई प्रमुख घोटालों के कथित कुप्रबंधन को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है।http://www.sunday-guardian.com/investigation/cbi-has-long-history-of-listening-to-its-political-masters-voice CBI has long history of listening to its political master's voice द संडे गार्जियन 1 फरवरी 2012 7 फरवरी 2012 https://web.archive.org/web/20120207101040/http://www.sunday-guardian.com/investigation/cbi-has-long-history-of-listening-to-its-political-masters-voice http://www.outlookindia.com/article.aspx?269847 Restoring Public Confidence in CBI आउटलुक इंडिया 30 दिसंबर 2010 1 फरवरी 2012 https://web.archive.org/web/20110121040541/http://outlookindia.com/article.aspx?269847 21 जनवरी 2011 deadhttp://www.openthemagazine.com/article/nation/the-congress-bureau-of-investigation The Congress Bureau of Investigation: Big stick politics. Will it ever end? ओपन द मैगज़ीन 6 अप्रैल 2013 22 अप्रैल 2013 इसके अतिरिक्त, उस पर यह आरोप भी लगाया गया है कि उसने कुछ उच्च-प्रोफ़ाइल राजनीतिक मामलों में अपेक्षित तत्परता और कठोरता नहीं दिखाई। पूर्व प्रधानमंत्री पी॰ वी॰ नरसिम्हा राव, तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती तथा मुलायम सिंह यादव जैसे प्रभावशाली नेताओं से संबंधित मामलों में जाँच की गति और दिशा को लेकर प्रश्न उठाए गए हैं। आलोचकों का मत है कि इस प्रकार की ढिलाई या अनिश्चितता ने कई मामलों में अभियोजन को कमजोर किया, जिसके परिणामस्वरूप या तो आरोपित व्यक्तियों को बरी कर दिया गया या उनके विरुद्ध मुकदमा प्रभावी रूप से आगे नहीं बढ़ सका।http://www.sunday-guardian.com/investigation/cbi-ineffective-in-dealing-with-political-cases CBI ineffective in dealing with political cases द गार्डियन 26 जनवरी 2013 2013-05-19 अप्रैल 2026 InternetArchiveBot
इन घटनाओं ने सीबीआई की कार्यप्रणाली, निष्पक्षता और संस्थागत विश्वसनीयता को लेकर व्यापक बहस को जन्म दिया है, जो आज भी सार्वजनिक विमर्श का एक महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
सीबीआई का जालस्थल
सीबीआई को सरकार से मुक्त किया जाए: किरण बेदीमई 2021 InternetArchiveBot
अपनी सर्वोच्चता की छवि को खुद खंडित किया है सीबीआई ने
सीबीआई की स्वतंत्रता
अद्यतन भारतीय न्यायिक समाचार (Latest in Indian legal news)
सीबीआई क्या है जानें
श्रेणी:भारत सरकार की कार्यकारी शाखा