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411 समाचार
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श्यामाप्रसाद मुखर्जी

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डॉ॰ श्यामाप्रसाद मुखर्जी File:Shyama Prasad Mukherjee portrait in Parliament.jpg डॉ॰ श्यामाप्रसाद मुखर्जी 1901 07 06 yes कलकत्ता, बंगाल, ब्रिटिश भारत 1953 06 23 1901 07 06 yes कश्मीर कारावास स्वतन्त्र भारत वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री, भारत सरकार जवाहरलाल नेहरू 15 अगस्त 1947 6 अप्रैल 1950 Position established नित्यानन्द कानूनगो संस्थापक-अध्यक्ष, भारतीय जन संघ 1951 1952 Position established मौलि चन्द्र शर्मा वित्त मंत्री, बंगाल प्रांत ए के फज़लूल हक 12 दिसम्बर 1941 20 नवम्बर 1942 सांसद, बंगाल विधान परिषद् 1929 1947 कुलपति, कलकत्ता विश्वविद्यालय 8 अगस्त 1934 7 अगस्त 1938 हासन सुहरावर्दी मुहम्मद अजीजल हक भारतीय जनसंघ हिन्दू भारतीय हिन्दुत्व सुधा देवी सर आशुतोष मुखर्जी जोगमाया देवी डॉ॰ श्यामाप्रसाद मुखर्जी (जन्म: 6 जुलाई 1901 - मृत्यु: 23 जून 1953) शिक्षाविद्, चिन्तक और भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे।"Bharatiya Jana Sangh | Indian political organization". Encyclopædia Britannica. Archived from the original on 20 February 2023. Retrieved 1 June 2019.१९४३ से १९४६ तक वे अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के अध्यक्ष भी रहे। जीवन वृत्त 6 जुलाई 1901 को कलकत्ता के अत्यन्त प्रतिष्ठित परिवार में डॉ॰ श्यामाप्रसाद मुखर्जी जी का जन्म हुआ। उनके पिता सर आशुतोष मुखर्जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे एवं शिक्षाविद् के रूप में विख्यात थे। डॉ॰ मुखर्जी ने 1917 में मैट्रिक किया तथा 1921 में बी०ए० की उपाधि प्राप्त की। 1923 में लॉ की उपाधि अर्जित करने के पश्चात् वे विदेश चले गये और 1926 में इंग्लैण्ड से बैरिस्टर बनकर स्वदेश लौटे। अपने पिता का अनुसरण करते हुए उन्होंने भी अल्पायु में ही विद्याध्ययन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलताएँ अर्जित कर ली थीं। 33 वर्ष की अल्पायु में वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बने। इस पद पर नियुक्ति पाने वाले वे सबसे कम आयु के कुलपति थे। एक विचारक तथा प्रखर शिक्षाविद् के रूप में उनकी उपलब्धि तथा ख्याति निरन्तर आगे बढ़ती गयी। राजनीतिक जीवन right|thumb|300px|श्यामाप्रसाद मुखोपाध्याय और डॉ भीमराम अम्बेडकर बात करते हुए (१९५१ , संसद परिसर में) डॉ॰ श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने स्वेच्छा से अलख जगाने के उद्देश्य से राजनीति में प्रवेश किया। डॉ॰ मुखर्जी सच्चे अर्थों में मानवता के उपासक और सिद्धान्तवादी थे। उन्होने बहुत से गैर कांग्रेसी हिन्दुओं की मदद से कृषक प्रजा पार्टी से मिलकर प्रगतिशील गठबन्धन का निर्माण किया। इस सरकार में वे वित्तमन्त्री बने। इसी समय वे सावरकर के राष्ट्रवाद के प्रति आकर्षित हुए और हिन्दू महासभा में सम्मिलित हुए। मुस्लिम लीग की राजनीति से बंगाल का वातावरण दूषित हो रहा था। वहाँ साम्प्रदायिक विभाजन की नौबत आ रही थी। साम्प्रदायिक लोगों को ब्रिटिश सरकार प्रोत्साहित कर रही थी। ऐसी विषम परिस्थितियों में उन्होंने यह सुनिश्चित करने का बीड़ा उठाया कि बंगाल के हिन्दुओं की उपेक्षा न हो। अपनी विशिष्ट रणनीति से उन्होंने बंगाल के विभाजन के मुस्लिम लीग के प्रयासों को पूरी तरह से नाकाम कर दिया। 1942 में ब्रिटिश सरकार ने विभिन्न राजनैतिक दलों के छोटे-बड़े सभी नेताओं को जेलों में डाल दिया। डॉ॰ मुखर्जी इस धारणा के प्रबल समर्थक थे कि सांस्कृतिक दृष्टि से हम सब एक हैं। इसलिए धर्म के आधार पर वे विभाजन के कट्टर विरोधी थे। वे मानते थे कि विभाजन सम्बन्धी उत्पन्न हुई परिस्थिति ऐतिहासिक और सामाजिक कारणों से थी। वे मानते थे कि आधारभूत सत्य यह है कि हम सब एक हैं। हममें कोई अन्तर नहीं है। हम सब एक ही रक्त के हैं। एक ही भाषा, एक ही संस्कृति और एक ही हमारी विरासत है। परन्तु उनके इन विचारों को अन्य राजनैतिक दल के तत्कालीन नेताओं ने अन्यथा रूप से प्रचारित-प्रसारित किया। बावजूद इसके लोगों के दिलों में उनके प्रति अथाह प्यार और समर्थन बढ़ता गया। अगस्त, 1946 में मुस्लिम लीग ने जंग की राह पकड़ ली और कलकत्ता में भयंकर बर्बरतापूर्वक अमानवीय मारकाट हुई। उस समय कांग्रेस का नेतृत्व सामूहिक रूप से राष्ट्रसेवी था। जनसंघ की स्थापना ब्रिटिश सरकार की भारत विभाजन की गुप्त योजना और षड्यन्त्र को एक कांग्रेस के नेताओं ने अखण्ड भारत सम्बन्धी अपने वादों को ताक पर रखकर स्वीकार कर लिया। उस समय डॉ॰ मुखर्जी ने बंगाल और पंजाब के विभाजन की माँग उठाकर प्रस्तावित पाकिस्तान का विभाजन कराया और आधा बंगाल और आधा पंजाब खण्डित भारत के लिए बचा लिया। गान्धी जी और सरदार पटेल के अनुरोध पर वे भारत के पहले मन्त्रिमण्डल में शामिल हुए। उन्हें उद्योग जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गयी। संविधान सभा और प्रान्तीय संसद के सदस्य और केन्द्रीय मन्त्री के नाते उन्होंने शीघ्र ही अपना विशिष्ट स्थान बना लिया। किन्तु उनके राष्ट्रवादी चिन्तन के चलते अन्य नेताओं से मतभेद बराबर बने रहे। फलत: राष्ट्रीय हितों की प्रतिबद्धता को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मानने के कारण उन्होंने मन्त्रिमण्डल से त्यागपत्र दे दिया। उन्होंने एक नई पार्टी बनायी जो उस समय विरोधी पक्ष के रूप में सबसे बड़ा दल था। अक्टूबर, 1951 में भारतीय जनसंघ का उद्भव हुआ। संसद में right|thumb|300px|भारत सरकार ने १९७८ में श्यामाप्रसाद मुखर्जी की स्मृति में डाकटिकट जारी किया। मुखर्जी जम्मू कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग बनाना चाहते थे। उस समय जम्मू कश्मीर का अलग झण्डा और अलग संविधान था। वहाँ का मुख्यमन्त्री (वजीरे-आज़म) अर्थात् प्रधानमन्त्री कहलाता था। संसद में अपने भाषण में डॉ॰ मुखर्जी ने धारा-370 को समाप्त करने की भी जोरदार वकालत की। अगस्त 1952 में जम्मू की विशाल रैली में उन्होंने अपना संकल्प व्यक्त किया था कि या तो मैं आपको भारतीय संविधान प्राप्त कराऊँगा या फिर इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये अपना जीवन बलिदान कर दूँगा। उन्होंने तात्कालिन नेहरू सरकार को चुनौती दी तथा अपने दृढ़ निश्चय पर अटल रहे। अपने संकल्प को पूरा करने के लिये वे 1953 में बिना परमिट लिये जम्मू कश्मीर की यात्रा पर निकल पड़े। वहाँ पहुँचते ही उन्हें गिरफ्तार कर नज़रबन्द कर लिया गया। 23 जून 1953 को रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गयी। सन्दर्भ इन्हें भी देखें अखिल भारतीय जनसंघ हिन्दू महासभा कोलकाता विश्वविद्यालय धारा-370 जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, २०१९ बाहरी कड़ियाँ श्यामा प्रसाद मुखर्जी युगदृष्टा डॉ॰ श्यामाप्रसाद मुखर्जीजून 2020 InternetArchiveBot डॉ॰ श्यामाप्रसाद मुखर्जी शोध अधिष्ठान उन्हें एक राष्ट्र के दो झंडे स्वीकार नहीं थे (वेबदुनिया) गुरुकुल विश्‍वविद्यालय में दीक्षान्त भाषण https://web.archive.org/web/20230408132959/https://www.hindisamay.com/content/11723/1/%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%B2-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF-%E0%A4%A6%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A4%A3.cspx 8 अप्रैल 2023 मानवता के उपासक और सिद्धान्तवादी राजनीतिज्ञ थे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी श्रेणी:संघ परिवार के नेता श्रेणी:1901 में जन्मे लोग श्रेणी:१९५३ में निधन