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करेल चपेक
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नवम्बर 2021
right|thumb|300px|करेल चपेक
करेल चपेक (Capek karel) (१८९०-१९३८) चेक लेखक एवं पत्रकार थे। उनका चेक साहित्य में गौरवपूर्ण स्थान है।
उनकी सभी प्रमुख कृतियों के असंख्य विदेशी भाषाओं में अनुवाद किए गए थे। चपेक की लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि उनकी लेखकीय प्रतिभा उद्भुत, अनोखी तथा अत्यंत गंभीर है।
चपेक का मानवतापूर्ण दृष्टिकोण सभी रचनाओं में स्पष्टता से विद्यमान है। वे नाटक, उपन्यास, कहानियाँ, निबंध आदि लिखते थे। चपेक ने बहुत भ्रमण किया। उनके 'इंग्लैंड से पत्र', 'हॉलैंड से पत्र', आदि संग्रह अति प्रिय हैं। 'माँ' नामक नाटक अनेक भाषाओं में अनूदित हो चुका है। भारतीय भाषाओं में बँगला और मराठी में भी यह नाटक अनुवाद के रूप में मिलता है। 'माँ' नाटक में लेखक नाज़ी सत्ता के विरुद्ध लड़ाई करने को प्रोत्साहन देता है। उनकी बालोपयोगी पुस्तकें उनके भाई योसेफ चपेक के चित्रों से सुसज्जित हैं। अन्य महत्वपूर्ण कृतियाँ : 'इसे कैसे करता हूँ' (निबंध), 'क्रकतित' (उपन्यास), 'र.उ.र.' (नाटक), 'एक जेल की कहानियाँ', 'दूसरी जेल की कहानियाँ', 'माली का वर्ष' (निबंध), 'कीटाणू जीवन' (नाटक)।
श्रेणी:चेक साहित्यकार