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411 समाचार
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एनजीसी 2867

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एनजीसी 2867 (NGC 2867) NGC_2867.jpg 'एनजीसी 2867' ग्रहीय नीहारिका का एक विस्तृत खगोलीय दृश्य। ग्रहीय नीहारिका करीना एनजीसी 2867 (NGC 2867) दक्षिणी आकाश में करीना तारामंडल में स्थित एक अत्यंत ही चमकीली और सुगठित 'ग्रहीय नीहारिका' है। यह पृथ्वी से लगभग 7,200 प्रकाश-वर्ष की दूरी पर स्थित है। इस नीहारिका का निर्माण एक सूर्य जैसे मध्यम द्रव्यमान वाले तारे के जीवन के अंतिम चरण में हुआ है, जब उसने अपने बाहरी गैसीय आवरण को अंतरिक्ष में फेंक दिया। यह खगोलविदों के लिए 'तारकीय विकास' और तारों की मृत्यु की प्रक्रिया का अध्ययन करने के लिए एक महत्वपूर्ण खगोलीय पिंड है।Kwok Sun The Origin and Evolution of Planetary Nebulae https://archive.org/details/originevolutiono0000kwok Cambridge University Press 2000 978-0521623131 45-49 खोज और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि इस नीहारिका की खोज प्रसिद्ध ब्रिटिश खगोलशास्त्री जॉन हर्शेल ने 1 अप्रैल 1834 को की थी। उस समय वे दक्षिण अफ्रीका के 'केप ऑफ गुड होप' वेधशाला से दक्षिणी आकाश का सर्वेक्षण कर रहे थे।"UV spectral analysis of very hot H-deficient [WCE-type central stars of planetary nebulae: NGC 2867, NGC 5189, NGC 6905, Pb 6 and Sand 3"] जब हर्शेल ने पहली बार अपने टेलीस्कोप से इसे देखा, तो इसकी गोल और डिस्क जैसी स्पष्ट आकृति के कारण उन्हें लगा कि शायद उन्होंने यूरेनस की तरह कोई नया 'ग्रह' खोज लिया है। ग्रहीय नीहारिकाओं का नाम इसी भ्रांति के कारण पड़ा है, क्योंकि प्रारंभिक दूरबीनों में ये गैस के बादल ग्रहों जैसे ही दिखते थे। हालांकि, कई रातों तक इसके स्थान की निगरानी करने के बाद, जब हर्शेल ने पाया कि यह तारों के सापेक्ष अपनी जगह नहीं बदल रहा है, तो उन्होंने पुष्टि की कि यह एक नीहारिका है।O'Meara Stephen James Deep-Sky Companions: The Secret Deep Cambridge University Press 2011 978-0521198769 210-213 भौतिक विशेषताएँ और संरचना एनजीसी 2867 का 'सापेक्ष कांतिमान' 9.7 है, जिसका अर्थ है कि इसे नंगी आँखों से नहीं देखा जा सकता, लेकिन एक मध्यम आकार की दूरबीन (8-इंच या उससे बड़ी) से इसे आसानी से एक धुंधले, नीले-हरे डिस्क के रूप में देखा जा सकता है। इस नीहारिका का कोणीय व्यास लगभग 14 आर्कसेकंड है। यह अंतरिक्ष में कई दसियों किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से बाहर की ओर फैल रही है। इसके गैसीय आवरण में मुख्य रूप से हाइड्रोजन, हीलियम, ऑक्सीजन और नाइट्रोजन जैसे तत्व मौजूद हैं। नीहारिका का विशिष्ट नीला-हरा रंग ऑक्सीजन के 'आयनीकरण' के कारण उत्पन्न होता है।Peimbert Manuel Chemical Composition of Planetary Nebulae Publications of the Astronomical Society of the Pacific 102 1990 1181-1188Companions: The Caldwell Objects केंद्रीय तारा एनजीसी 2867 का सबसे दिलचस्प पहलू इसका केंद्रीय तारा है। यह एक 'श्वेत वामन' बनने की प्रक्रिया में है और इसे एक अत्यंत दुर्लभ वोल्फ-रेयेट तारे, विशेष रूप से [WC] स्पेक्ट्रल प्रकार, के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इस तारे ने अपने लगभग सभी बाहरी हाइड्रोजन आवरण को उड़ा दिया है, जिससे इसका अत्यधिक गर्म और हीलियम तथा कार्बन से भरपूर कोर उजागर हो गया है। इस तारे के सतह का तापमान अविश्वसनीय रूप से अधिक है (लगभग 90,000 केल्विन से अधिक)। यह तारा भारी मात्रा में 'पराबैंगनी विकिरण' उत्सर्जित करता है, जो आसपास की गैस को ऊर्जा प्रदान करके उसे चमकने पर मजबूर करता है।Górny S. K. Stasińska G. Planetary nebulae with Wolf-Rayet central stars https://archive.org/details/sim_astronomy-and-astrophysics_1995-11_303_3/page/893 Astronomy & Astrophysics 303 1995 893-905 तारकीय विकास में महत्व खगोलशास्त्रियों के लिए एनजीसी 2867 का अध्ययन करना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमें यह समझने में मदद करता है कि आज से लगभग 5 अरब वर्षों बाद हमारे अपने सूर्य का अंत कैसा होगा। जब सूर्य का परमाणु ईंधन समाप्त हो जाएगा, तो वह भी एक 'लाल दानव' में बदल जाएगा और फिर अपने बाहरी आवरण को अंतरिक्ष में फेंककर एक ऐसी ही शानदार ग्रहीय नीहारिका का निर्माण करेगा।http://simbad.u-strasbg.fr/simbad/sim-id?Ident=NGC+2867 SIMBAD Astronomical Database - NGC 2867 Centre de Données astronomiques de Strasbourg 24 जून 2026 सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ नासा (NASA) - ग्रहीय नीहारिकाओं का अवलोकन श्रेणी:खगोल विज्ञान