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411 समाचार
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चन्नपटना खिलौने

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अंगूठाकार|चन्नापटना में बनी खिलौना सीटियां चन्नपटना खिलौने लकड़ी के खिलौने हे जो कर्णाटक के चन्नापटना छोटे गाँव में बनाया जाता है। यह पारम्परिक कला भारत देश में नहीं पर दुनियाभर में मशहूर हैंhttps://india.mongabay.com/2024/01/channapatnas-traditional-artisans-toy-with-modernity/ Channapatna's traditional artisans toy with modernity Tandon Aditi 2024-01-18 Mongabay-India en-US 2024-12-15। ये खिलौने अपनी रंगीन सजावट, अद्भुत शिल्पकारिता और सुन्दरता के लिया प्रसिद्ध है।  इन खिलौनों को जियोग्राफिकल इंडिकेटर (जीआई) का प्रतिष्ठा विश्व व्यापार संगठन से मिला है, जो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कानूनों में उनकी विशिष्टता और अखंडता को सुरक्षित करता हैhttps://digitalgi.in/channapatna-toys-and-dolls/ Channapatna Toys and Dolls digitalgi_user 2024-07-24 Digital GI en-US 2024-12-15। इसी कारण के लिया चन्नपटना गाँव को कर्नाटक का "खिलौना शहर" बुलाया जाता है। चन्नपटना बैंगलोर और मैसूर शहर के बीच एक छोटा सा गाँव है, और शहर के ४००० कारीगरों इन खिलौनों को बेचकर अपनी कमाई करते हैhttps://india.mongabay.com/2024/01/channapatnas-traditional-artisans-toy-with-modernity/ Channapatna's traditional artisans toy with modernity Tandon Aditi 2024-01-18 Mongabay-India en-US 2024-12-15।   इतिहास अंगूठाकार|चन्नापटना खिलौनों के संरक्षक टीपू सुल्तान चन्नपटना खिलौनों की उद्गम टीपू सुल्तान के शासन से था, जो न केवल एक राजा थे बल्कि कला के संरक्षक भी थेhttps://vajiramandravi.com/upsc-daily-current-affairs/prelims-pointers/channapatna-toys/ Channapatna Toys Vajiram & Ravi en-IN 2024-12-15। टीपू सुल्तान मैसूर राज्य का शासक था जिसका भी एक हिस्सा चन्नपटना था।  ये लकड़ी के खिलौने शुरू में मैसूर राज्य में दशहरा उत्सव के दौरान उपहार के तरह दिया जाते था। टीपू सुल्तान ने इन लकड़ी के खिलौनों में संभावना देखी, और उन्होंने इस गांव के निवासियों को खिलौना बनाना और लाह करने के लिए फ़ारसी कारीगरों को आमंत्रित कियाhttps://www.sahapedia.org/channapatna-toys-and-tipu-sultans-persian-connection Channapatna Toys and Tipu Sultan's Persian Connection Sahapedia en 2024-12-15। उनके कोशिशों से चन्नापटना भारत का खिलौना केंद्र बन गया, जिसे अब इस नाम से जाना जाता है। चन्नपटना खिलौनों के विकास में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं बावस मियान, जिन्हें अक्सर "चन्नापट्ना खिलौनों के पिता" के रूप में जाना जाता हैhttps://www.thehindu.com/children/toy-story/article38317178.ece Toy story Subramanian Archana 2022-01-24 The Hindu 2024-12-15 en-IN 0971-751X। उन्होंने इस शिल्प को आधुनिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जापानी गुड़िया बनाने की तकनीकों को पेश करके, जिसने उत्पादन प्रक्रियाओं को सरल बनाया और दक्षता में सुधार किया। उनके योगदान ने सुनिश्चित किया कि यह कला न केवल जीवित रहे, बल्कि पीढ़ियों के माध्यम से फल-फूल सके। संस्कृति पर प्रभाव अंगूठाकार|चन्नपटना के खिलौने चन्नपटना में पहले जो खिलौने बनाए गए थे, वे  हाथी दन्त के लकड़ी से बनाए जाते थे, जिसे कन्नड़ में "आल मरा" कहा जाता है। समय के साथ, चंदन, गुलाब की लकड़ी और रबड़ जैसे कई लकड़ियों का भी उपयोग किया जाने लगा। इन खिलौनों को बनाने में जो कारीगरी शामिल होती थी, वह मुश्किल होती थी और इसमें उच्च कौशल की इस्तेमाल होती थी, जिससे जटिल डिज़ाइन तैयार होते थे जो बच्चों और बूढो दोनों को आकर्षित करते थे। चन्नपटना के खिलौने टीपू सुल्तान के सहायता से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोकप्रिय हो गया। ​​उन्नीसवीं शताब्दी में यह खिलौना इंग्लैंड, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशो में निर्यात किया जाने लगा और वह उन देशो के अमीर परिवारों में अभिलषित बन गयाhttps://craftdeals.in/origins-of-channapatna-toys/ History Of Channapatna Toys Admin Craftdeals in 2023-01-01 Craftdeals.in en-US 2024-12-15। चन्नपटना के खिलौने उत्कृष्टता और गुणवत्ता का प्रमाण है जिससे चन्नपटना भारत की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग बन गया। चुनौतियां चन्नपटना खिलौना अपनी विरासत के बावजूद, बहुत सारे चुनौतियों का सामना करना पड़ा। चीन से सस्ते प्लास्टिक खिलौनों की आयत ने पारंपरिक शिल्प के लिए एक बड़ा खतरा पैदा किया है। कई कारीगर को इस प्रतियोगिता से बहुत सारे कठिनता झेलना पड़ा जिससे उनके पैसो की बर्बाद हो गयी। पर इस पारंपरिक शिल्प को पुनर्जीवित करने के लिए बहुत सरे पहलों की शुरुआत की गई है। कर्नाटक हस्तशिल्प विकास निगम (के.हेच.डी.सी) ने कारीगरों का समर्थन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, कारीगरों को नए ग्राहकों की ज़रूरतों से निपटने में मदद करता हैhttps://www.cauveryhandicrafts.net/index.php Cauvery Handicrafts (KSHDCL) www.cauveryhandicrafts.net 2024-12-15। इसके साथ, राज्य और अंतरराष्ट्रीय निकायों से वित्तीय सहायता ने कारीगरों को पारंपरिक तकनीकों को संरक्षित करते हुए नवाचार करने में मदद की है। आधुनिक मशीनरी से लैस एक लाहकला शिल्प परिसर की स्थापना ने भी उत्पादन को सुगम बनाया है। विनिर्माण प्रक्रिया अंगूठाकार|चन्नापटना खिलौनों का निर्माण इसी तरह से एक लकड़ी के टुकड़े को चन्नापटना खिलौनों में बदला जाता हैhttps://revolvingcompass.com/channapatna-toys/ A visit to Channapatna Toys Factory - natural, wooden, safe, beautiful - proudly Indian toys Neha 2022-08-31 The Revolving Compass en-US 2024-12-15 लकड़ी को चुनना: सबसे पहले आले मारा लकड़ी का एक टुकड़ा चुना जाता है जो १ से ३ महीने पुराना होता है ताकि यह टिकाऊ और काम करने योग्य हो काटना और नक्काशी: फिर लकड़ी को नक्काशीदार और आकार देने के लिए खराद का उपयोग किया जाता है। कारीगर मैनुअल और इलेक्ट्रॉनिक दोनों प्रकार के खराद का उपयोग करते हैं। रंग डालना: फिर कारीगर अपने हाथों से खिलौनों पर रंग लगाता है। कारीगर फलों के रंगों और मसालों जैसे जैविक रंगों का उपयोग करते हैं। लाह डालना: इसके बाद कारीगर इस पर लाख की परत लगाता है जिससे यह चमकदार हो जाता है निष्कर्ष चन्नापटना खिलौने केवल खेलने की चीजें नहीं हैं; वे सदियों से विकसित हुई एक भारतीय सांस्कृति का एक बहुत बड़ा हिस्सा है। टीपू सुल्तान के संरक्षण में उनकी उत्पत्ति से लेकर उनके आधुनिक समय के पुनस्थान के लिया प्रयासों तक, ये लकड़ी के खिलौने भारत की कलात्मक भावना और शिल्प कला का प्रमाण है। जैसे-जैसे वे अपने पारंपरिक सार को बनाए रखते हुए समकालीन मांगों के अनुकूल होते रहते हैं, चन्नापटना खिलौने बचपन की यादों और सांस्कृतिक पहचान का एक पसंदीदा हिस्सा है।   संदर्भ