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प्लेट विवर्तनिकी
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thumb|300px|विश्व की प्रमुख प्लेट्स
thumb|300px|right| पृथ्वी के गर्भ में मैंटल का भाग
प्लेट विवर्तनिकी एक वैज्ञानिक सिद्धान्त है जो पृथ्वी के स्थलमण्डल में बड़े पैमाने पर होने वाली गतियों की व्याख्या प्रस्तुत करता है। साथ ही महाद्वीपों, महासागरों और पर्वतों के रूप में धरातलीय उच्चावच के निर्माण तथा भूकम्प और ज्वालामुखी जैसी घटनाओं के भौगोलिक वितरण की व्याख्या प्रस्तुत करने का प्रयास करता है।
यह सिद्धान्त बीसवीं शताब्दी के प्रथम दशक में अभिकल्पित महाद्वीपीय विस्थापन नामक संकल्पना से विकसित हुआ जब 1960 के दशक में ऐसे नवीन साक्ष्यों की खोज हुई जिनसे महाद्वीपों के स्थिर होने की बजाय गतिशील होने की अवधारणा को बल मिला। इन साक्ष्यों में सबसे महत्वपूर्ण हैं पुराचुम्बकत्व से सम्बन्धित साक्ष्य जिनसे सागर नितल प्रसरण की पुष्टि हुई। हैरी हेस के द्वारा सागर नितल प्रसरण की खोज से इस सिद्धान्त का प्रतिपादन आरंभ माना जाता हैप्लेट विवर्तन/विवर्तनिक सिद्धांत या प्लेट विवर्तनिकी http://hindi.indiawaterportal.org/प्लेट-विवर्तनविवर्तनिक-सिद्धांत-या-प्लेट-विवर्तनिकी-plate-tectonic-theory-or-plate-tectonics इण्डिया वाटर पोर्टल 11 जनवरी 2015 https://web.archive.org/web/20160305094950/http://hindi.indiawaterportal.org/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%9f-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a4-%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%9f-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%80-plate-tectonic-theory-or-plate-tectonics 5 मार्च 2016 dead और विल्सन, मॉर्गन, मैकेंज़ी, ओलिवर, पार्कर इत्यादि विद्वानों ने इसके पक्ष में प्रमाण उपलब्ध कराते हुए इसके संवर्धन में योगदान किया।
इस सिद्धान्त अनुसार पृथ्वी की ऊपरी लगभग 80 से 100 कि॰मी॰ मोटी परत, जिसे स्थलमण्डल कहा जाता है ओरेस्कस , नाओमी Plate Tectonics: An Insider's History of the Modern Theory of the Earth 2003 https://books.google.co.in/books?id=8VoAv-jn9ngC&dq=plate+tectonics&source=gbs_navlinks_s प्लेट विवर्तनिकी: पृथ्वी के आधुनिक सिद्धांत के अंदरूनी सूत्र का इतिहास गूगल पुस्तक Westview Press en https://web.archive.org/web/20150108160910/https://books.google.co.in/books?id=8VoAv-jn9ngC&dq=plate+tectonics&source=gbs_navlinks_s 8 जनवरी 2015 live, और जिसमें भूपर्पटी और भूप्रावार के ऊपरी हिस्से का भाग शामिल हैं, कई टुकड़ों में टूटी हुई है जिन्हें प्लेट कहा जाता है। ये प्लेटें नीचे स्थित एस्थेनोस्फीयर की अर्धपिघलित परत पर तैर रहीं हैं और सामान्यतया लगभग 10-40 मिमी/वर्ष की गति से गतिशील हैं हालाँकि इनमें कुछ की गति 160 मिमी/वर्ष भी है।जेन शाओ, हुआंग 1997 http://hypertextbook.com/facts/ZhenHuang.shtml द फिजिक्स फैक्टबुक en Speed of the Continental Plates महाद्वीपीय प्लेटों की गति 8 जनवरी 2015 https://www.webcitation.org/65EJD0m8X?url=http://hypertextbook.com/facts/ZhenHuang.shtml 5 फ़रवरी 2012 dead इन्ही प्लेटों के गतिशील होने से पृथ्वी के वर्तमान धरातलीय स्वरूप की उत्पत्ति और पर्वत निर्माण की व्याख्या प्रस्तुत की जाती है और यह भी देखा गया है कि प्रायः भूकम्प इन प्लेटों की सीमाओं पर ही आते हैं और ज्वालामुखी भी इन्हीं प्लेट सीमाओं के सहारे पाए जाते हैं।
प्लेट विवर्तनिकी में विवर्तनिकी (लातीन:tectonicus) शब्द यूनानी भाषा के τεκτονικός से बना है जिसका अर्थ निर्माण से सम्बंधित है।मरियम वेबस्टर शब्दकोश https://web.archive.org/web/20150128151235/http://www.merriam-webster.com/dictionary/tectonic 28 जनवरी 2015 मेंडिक्शनरी डॉट कॉम https://web.archive.org/web/20150302195654/http://dictionary.reference.com/browse/tectonic 2 मार्च 2015 पर प्लेट शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग कनाडा के भूविज्ञानी टुजो विल्सन (Wilson) ने किया था और प्लेट टेक्टोनिक्स शब्द का पहली बार प्रयोग मोर्गन (Morgan) द्वारा किया गया था।
परिचय
पृथ्वी का बाह्य भाग (भूपर्पटी तथा प्रावार का उपरी भाग) दृंढ खंडो का बना है। इसकी मोटाई 100-150 किलोमीटर तक होती है।
प्लेट शव्द का सर्वप्रथम प्रयोग 1955 मे टूजो विल्सन ने किया था। 1967 मे मैकेन्जी एवं पारकर प्लेट के संचलन के बारे मे बताया। 1967 मे ही विद्वान आइजक एवं साईक्स ने मैकेंजी एवं पारकर के कर्यो का समर्थन किया। 1968 मे प्लेट प्रक्रिया के बारे मे अध्ययन प्रारंभ हुआ। इसी वर्ष वैज्ञानिक डब्ल्यू.जे.मॉर्गन एवं ली.पिचान ने प्लेट विवर्तनकि के विभिन्न पहलुओ का अध्ययन किया।
प्लेटों की संख्या
इस सिद्धांत के अनुसार पृथ्वी की ऊपरी परत के रूप में स्थित स्थलमण्डल, जिसमें क्रस्ट और ऊपरी मैंटल का कुछ हिस्सा शामिल है, कई टुकड़ों में विभाजित है जिन्हें प्लेट कहा जाता है। सामान्यतया इन प्लेटों में बड़ी प्लेटों की संख्या 12 मानी जाती है। इसके अलावा कुछ मझले और छोटे आकार की प्लेट्स भी हैं। इनकी एक सूची निम्नवत् है:
अफ़्रीकी प्लेट
यूरेशियाई प्लेट
उत्तर अमेरिकी प्लेट
दक्षिण अमेरिकी प्लेट
प्रशांत प्लेट
हिन्द-ऑस्ट्रेलियाई प्लेट
अंटार्कटिक प्लेट
मध्यम और छोटी प्लेटें
अरबी प्लेट
कैरिबियन प्लेट
जोन दे फूका प्लेट
कोकोस प्लेट
नाजका प्लेट
फिलिपीन सागर प्लेट
स्कोश्या प्लेट
ईरानी प्लेट
कुछ विद्वान उत्तरी अमेरिकी प्लेट और दक्षिणी अमेरिकी प्लेट को एक ही मानते हुए बड़ी प्लेटों की संख्या छह मनाते हैं। छोटी प्लेट्स की संख्या में भी कई मतान्तर हैं परन्तु सामान्यतः इनकी संख्या 100 से भी अधिक स्वीकार की जाती है।
प्लेटों की गतिशीलता
इतिहास
पर्वत निर्माण के सन्दर्भ में प्रथमतया दो मत प्रचलित थे, ऊर्ध्वाधर संचलन द्वारा और क्षैतिज संचलन द्वारा। अर्थात कुछ लोग यह मानते थे कि पृथ्वी का आकार उत्पत्ति के बाद संकुचन द्वारा छोटा हुआ और इस संकुचन के परिणामस्वरूप पृथ्वी की सतह में बल पड़ गये और मुड़ाव पर्वतों के रूप में स्थित है। यूरोप में सर्वप्रथम ऑस्ट्रियाई एडवर्ड स्वेस ने इस तरह की संकल्पना को प्रचारित किया था। इसके विपरीत कुछ का मानना था कि महाद्वीपों का क्षैतिज स्थानातरण हुआ है और इनके टकराने से ऊपरी सतह में बल पड़ जाने से पर्वतों का निर्माण हुआ है। संकुचनवादियों को पहली चुनौती तभी मिली थी जब महाद्वीपों के क्षैतिज स्थानान्तरण की संकल्पना का उद्भव हुआ।
शुरूआती सोलहवीं सदी में ही विद्वानों ने अटलांटिक महासागर के दोनों किनारों की एक दूसरे से समानता को चिह्नित किया था। फ्रिश्च वोल्फगैंग मार्टिन मेश्चेडे, रोनाल्ड सी ब्लेकी Plate Tectonics: Continental Drift and Mountain Building प्लेट विवर्तनिकी: महाद्वीपीय बहाव और पर्वतीय निर्माण https://books.google.co.in/books?id=vx1oiTMOTRcC&lpg=PP1&dq=plate%20tectonics&pg=PA2#v=onepage&q=plate%20tectonics&f=false गूगल पुस्तक 7 जनवरी 2015 en 2 https://web.archive.org/web/20150108165407/https://books.google.co.in/books?id=vx1oiTMOTRcC&lpg=PP1&dq=plate%20tectonics&pg=PA2#v=onepage&q=plate%20tectonics&f=false 8 जनवरी 2015 live अंग्रेज़ दार्शनिक फ्रांसिस बेकन (1561-1626) ने पहली बार सटीक नक्शों के अध्ययन से यह समानता चिह्नित की, मानचित्र विज्ञानी अब्राहम ओर्टेलियस ने 1596 में पहली बार यह कहा कि अमेरिका (दोनों) यूरोप और अफ़्रीका से टूट कर अलग हुए हैं और जर्मन धर्मशास्त्री थियोडोर लिलिएनथल ने 1756 में ओर्टेलियस के कथन की पुष्टि बाइबिल के एक कथन (First Book of Moses 10:25) के आधार पर करने का प्रयास किया।
बाद में अमेरिकी भूवेत्ता एफ़॰ बी॰ टेलर ने 1908-10 में चन्द्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल के द्वारा महाद्वीपों के एक तरह के प्रवाह की बात कही, और इसे तृतीयक युग के पर्वतों की उत्पत्ति का कारण भी बताया।टेलर, एफ.बी. 1910 Bearing of the tertiary mountain belt on the origin of the earth's plan GSA Bulletin 21 2 179–226 10.1130/1052-5173(2005)015[29b:WTCCA]2.0.CO;2 ftp://rock.geosociety.org/pub/GSAToday/gt0507.pdf पीडीऍफ 11 जनवरी 2015 पृथ्वी की योजना के मूल पर तृतीयक पहाड़ बेल्ट के असर en 1 जून 2018 https://web.archive.org/web/20180601200620/ftp://rock.geosociety.org/pub/GSAToday/gt0507.pdf dead 1052-5173 पर उनकी बात पर किसी ने बहुत ध्यान नहीं दिया।
वैगनर ने, जो एक पुरा-वनस्पति विज्ञानी और पुरा-जलवायु विज्ञानी थे, यह विचार प्रस्तुत किया कि प्राचीन काल में जलवायु का वितरण प्रतिरूप व्याख्यायित हो सकता है यदि महाद्वीपों को गतिशील मान लिया जाय और उन्होंने 1912 में महाद्वीपीय विस्थापन का सिद्धान्त प्रतिपादित किया जो उनकी 1915 में छपी पुस्तक महाद्वीपों एवं महासागरों की उत्पत्ति में प्रकाशित हुआ।वेगेनर, अल्फ्रेड 1929 https://de.wikisource.org/wiki/Die_Entstehung_der_Kontinente_und_Ozeane edition=4 Braunschweig: Friedrich Vieweg & Sohn Akt. Ges 3-443-01056-3 de जर्मन विकिसोर्स पर Die Entstehung der Kontinente und Ozeane महाद्वीपों और महासागरों की उत्पत्ति) 8 जनवरी 2015 https://web.archive.org/web/20150108160752/https://de.wikisource.org/wiki/Die_Entstehung_der_Kontinente_und_Ozeane 8 जनवरी 2015 live वैगनर ने ही सबसे पहले "महाद्वीपीय विस्थापन" जर्मन में "die Verschiebung der Kontinente" – 1922 में अंग्रेज़ी में अनूदित "Continental drift" - अंग्रेज़ी से हिन्दी में अनुदित शब्द का प्रयोग कियाWegener, Alfred (6 जनवरी 1912), ["Die Herausbildung der Grossformen der Erdrinde (Kontinente und Ozeane), auf geophysikalischer Grundlage", Petermanns Geographische Mitteilungen 63: 185–195, 253–256, 305–309.
वैगनर के इसी सिद्धान्त से आगे चलकर प्लेट विवर्तनिकी का विकास संभव हो पाया हालाँकि लगभग आधी सदी तक उनके विचारों को भी विद्वानों द्वारा नकारा जाता रहाEarth Systems: Processes and Issues, Wallace Gary Ernst, pp. 82, Cambridge University Press, 2000, ISBN 978-0-521-47895-3, ... The idea of continental drift was proposed seriously approximately eighty years ago by Alfred Wegener; however, the concept was almost universally rejected by scientists and was ignored for nearly half a century ... जब तक 1960 के दशक में प्रमाण नहीं उपलब्ध हुए।
सागर तल प्रसरण
सागर नितल प्रसरण और महाद्वीपीय विस्थापन
प्लेट सीमायें
thumb|right|250px|प्लेट सीमाओं के तीन प्रकार
प्लेटों की गतिशीलता के कारण इनके के किनारे या सीमायें तीन प्रकार के पाए जाते हैंMeissner, Rolf (2002). The Little Book of Planet Earth. New York: Copernicus Books. p. 202. ISBN 978-0-387-95258-1 http://www.gns.cri.nz/Home/Learning/Science-Topics/Earthquakes/Earthquakes-at-a-Plate-Boundary/Tectonic-Plates-and-Plate-Boundaries Tectonic Plates and Plate Boundaries 1 दिसम्बर 2015 https://web.archive.org/web/20150114053405/http://www.gns.cri.nz/Home/Learning/Science-Topics/Earthquakes/Earthquakes-at-a-Plate-Boundary/Tectonic-Plates-and-Plate-Boundaries 14 जनवरी 2015 dead:
विनाशात्मक/अभिसारी किनारा
इस प्रकार के किनारों के सहारे दो प्लेटें एक दूसरे की ओर गति करती हैं और टकराकर उनमें से भारी प्लेट हलकी प्लेट के नीचे क्षेपित होती है। मुड़कर नीचे की ओर क्षेपित होने वाला यह हिस्सा गहराई में जा कर ताप और दाब की अधिकता के कारण पिघलकर मैग्मा में परिवर्तित होता है। जिस गहराई पर यह घटना होती है उसे क्षेपण मण्डल या बेनीऑफ़ ज़ोन कहते हैं। ऐसे किनारों के सहारे भूसन्नतियों के पदार्थ दबाव के कारण मुड़कर पर्वतों का निर्माण करते हैं। नीचे जाकर पिघला पदार्थ मैग्मा प्लूम के रूप में ऊपर उठ कर ज्वालामुखीयता भी उत्पन्न करता है।
रचनात्मक/अपसारी किनारा
thumb|right|250px|अपसारी किनारे के सहारे एक रिफ्ट घाटी, आइसलैंड में
जहाँ दो प्लेटें एक दूसरे के विपरीत गतिशील होती हैं, अर्थात एक दूसरे से दूर हटती हैं वहाँ नीचे से मैग्मा ऊपर उठकर नयी प्लेट का निर्माण करता है। इन किनारों पर पाए जाने वाले सबसे प्रमुख स्थलरूप मध्य महासागरीय कटक हैं। जब यह किनारा किसी महाद्वीप पर स्थित होता है तो रिफ्ट घाटियों का निर्माण होता है। नयी प्लेट के निर्माण के कारण इसे रचनात्मक किनारा भी कहते हैं।
संरक्षणात्मक किनारा
thumb|center|upright = 5|600px|प्लेट सीमाओं का वैश्विक निरूपण
संरक्षी किनारा वह है जिसके सहारे दो प्लेटे एक दूसरे को रगड़ते हुए गतिशील हों, अर्थात न तो अपसरण हो रहा हो न ही अभिसरण। सामान्यतः इस किनारे के सहारे एक दूसरे को रगड़ते हुये विपरीत दिशाओं में गतिशील होती हैं किन्तु यह अनिवार्य नहीं है, यदि दो प्लेटें एक ही दिशा में गतिशील हों और उनकी गति अलग-अलग हो तब भी उनके किनारे रगड़ते हुये संरक्षी किनारा बना सकते हैं। इनके सहारे ट्रांसफोर्म भ्रंश पाए जाते हैं। चूँकि इनके सहारे न तो प्लेट (क्रस्ट या स्थलमण्डल) का निर्माण होता है और न ही विनाश, अतः इन्हें संरक्षी/संरक्षणात्मक किनारे कहते हैं जहाँ निर्माण/विनाश के सन्दर्भों में यथास्थिति संरक्षित रहती है।
प्लेट विवर्तनिकी और पर्वत निर्माण
पर्वत निर्माण
thumb|right|250px|दो महाद्वीपीय प्लेटों का टकराना और पर्वत निर्माण
thumb|left|150px|भारतीय प्लेट का उत्तर की ओर खिसकाव
प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत वलित पर्वतों के निर्माण की सबसे नयी व्याख्या प्रस्तुत करता है। उदाहरण के लिये अल्पाइन पर्वत तन्त्र के पर्वतों की उत्पत्ति की व्यख्या को प्रस्तुत किया जा सकता है। इस सिद्धांत के अनुसार यह माना जाता है कि भूमध्य सागर के उत्तरी और दक्षिणी ओर बने पर्वतों की शृंखलायें टर्शियरी युग में हुए विवर्तनिक घटनाओं का परिणाम हैं जिनमें टेथीज सागर में जमा अवसादों के अफ्रीकी और यूरोपीय प्लेटों के बीच संपीडन द्वारा इनका निर्माण हुआ।DEWEY JOHN F. Plate Tectonics and the Evolution of the Alpine System http://gsabulletin.gsapubs.org/content/84/10/3137.short Bulletin, The Geological Society of America 31 जनवरी 2015 https://web.archive.org/web/20151011221424/http://gsabulletin.gsapubs.org/content/84/10/3137.short 11 अक्तूबर 2015 dead हिमालय की उत्पत्ति के बारे में भी इस सिद्धांत की यही मान्यता है कि इस पर्वतमाला की उत्पत्ति तिब्बत प्लेट (या यूरेशियन प्लेट) और भारतीय प्लेट के पास आने और टेथीज सागर या भूसन्नति में जमा अवसादों के संपीडन से हुआ है।Cela A.M. Plate tectonics and orogenic research after 25 years: A Tethyan perspective http://www.sciencedirect.com/science/article/pii/001282529090002D साइंस डायरेक्ट Earth-Science Reviews, एल्सेवियर 31 जनवरी 2015 https://web.archive.org/web/20150924130037/http://www.sciencedirect.com/science/article/pii/001282529090002D 24 सितंबर 2015 live
सन्दर्भ
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