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411 समाचार
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नदी सिंदूरी

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नदी सिंदूरी नदी सिंदूरी002.jpg नदी सिंदूरी के दूसरे संस्करण के अवसर पर 'राजपाल प्रकाशन' की मीरा जौहरी के साथ लेखक शिरीष खरे शिरीष खरे हिंदी ग्राम जीवन, लोक और स्मृतियाँ संस्मरणात्मक कथाएँ राजपाल एण्ड सन्ज़, दिल्ली 160 9393267391 ‘नदी सिंदूरी’ शिरीष खरे की 2023 में प्रकाशित हिंदी पुस्तक है, जिसमें एक छोटी नदी के जरिए एक भूगोल, समाज और समय की कहानी सामने आती है। मध्य प्रदेश के नर्मदांचल के मदनपुर और उसके आसपास बहने वाली सिंदूरी नदी यहाँ लोक और मानवीय संबंधों की साक्षी है। तेरह परस्पर जुड़ी कथाएँ गाँव के जीवन, उसके अंतर्विरोधों और बदलते दौर को दर्ज करती हैं। बुंदेली लोकभाषा, गीतों और आंचलिकता में रची-बसी यह पुस्तक एक गाँव की कथा के माध्यम से ग्रामीण जीवन को उकेरती है। नदी सिंदूरी by Shirish Khare reviewed by Jai Prakash Pandey in Sahitya Tak Book Cafe https://www.aajtak.in/literature/review/story/nadi-sinduri-by-shirish-khare-reviewed-by-jai-prakash-pandey-in-sahitya-tak-book-cafe-1688239-2023-05-04 Aaj Tak 4 मई 2023 23 अगस्त 2026 पुस्तक के बारे में ‘नदी सिंदूरी’ की खूबी उसके पात्रों की विविधता में है। गाँव यहाँ किसी एकरंगी तस्वीर की तरह नहीं उभरता, बल्कि अलग-अलग स्वभाव, सामाजिक हैसियत और जीवनानुभवों से बने लोगों के रिश्तों से आकार लेता है। अवधेश, बसंत, खूंटा, सत्य पंडित, यादव मास्साब और रामकली जैसे वास्तविक चरित्र अपने-अपने प्रसंगों से निकलकर गाँव का हिस्सा बनते हैं। उनके बीच अपनापन है, ठिठोली है, प्रेम है, विश्वास है, चालाकी है, साहस है और जीवन को अपने ढंग से जीने की जिद भी। कोई जाति की दीवारों से टकराता है, कोई बदलते समय के साथ अपनी जगह तलाशता है। ये किसी सामाजिक समस्या के उदाहरण भर नहीं हैं, बल्कि अपनी कमजोरियों, आदतों और फैसलों के साथ पूरे मनुष्य हैं। नदी सिंदूरी: पीछे छूटे गांव को शब्दों से खींचते शिरीष खरे https://ndtv.in/literature/book-nadi-sindoori-shirish-khare-pulls-the-village-left-behind-with-words-5369584 NDTV India 4 अप्रैल 2024 23 अगस्त 2026 22 अगस्त 2026 https://web.archive.org/web/20260822221238/https://ndtv.in/literature/book-nadi-sindoori-shirish-khare-pulls-the-village-left-behind-with-words-5369584 dead इसी संसार में स्त्रियाँ कथा के किनारे खड़ी नहीं रहतीं। दलित समुदाय की बस-मालकिन रामकली इसका सशक्त उदाहरण है। वह केवल अपने जीवन की कहानी नहीं जीती, बल्कि दूसरों के जीवन में भी अपनी भूमिका तय करती है। एक लड़की की शादी टूटने से बचाने की उसकी पहल उसके चरित्र की दृढ़ता और आत्मीयता को उजागर करती है। ।गांव, यादें और प्रेम का दस्तावेज़: शिरीष खरे की ‘नदी सिंदूरी’ https://hindi.feminisminindia.com/2025/06/05/shirish-khares-book-review-nadi-sindoori-hindi/ Feminism in India 5 जून 2025 23 अगस्त 2026 मनुष्य और मवेशियों का रिश्ता भी इसी ग्रामीण संसार का एक अहम हिस्सा है। ‘नदी सिंदूरी’ में मवेशी घर, काम और दिनचर्या के बीच मौजूद ऐसे साथी हैं जिनके साथ संबंध इस्तेमाल से आगे जाता है। ‘कल्लो तुम बिक गईं’ में गाय के बिकने का प्रसंग इस लगाव और बिछोह को मार्मिक ढंग से रखता है। खरीद-बिक्री की एक साधारण घटना धीरे-धीरे उस रिश्ते की गहराई खोल देती है। पशु यहाँ सिर्फ जीवन-यापन का सहारा नहीं, घर और स्मृतियों से जुड़े हुए हैं। नदी सिंदूरी: पीछे छूटे गांव को शब्दों से खींचते शिरीष खरे https://ndtv.in/literature/book-nadi-sindoori-shirish-khare-pulls-the-village-left-behind-with-words-5369584 NDTV India 4 अप्रैल 2024 23 अगस्त 2026 22 अगस्त 2026 https://web.archive.org/web/20260822221238/https://ndtv.in/literature/book-nadi-sindoori-shirish-khare-pulls-the-village-left-behind-with-words-5369584 dead गांव, यादें और प्रेम का दस्तावेज़: शिरीष खरे की ‘नदी सिंदूरी’ https://hindi.feminisminindia.com/2025/06/05/shirish-khares-book-review-nadi-sindoori-hindi/ Feminism in India 5 जून 2025 23 अगस्त 2026 इस संसार की अपनी एक आवाज भी है। ‘नदी सिंदूरी’ में गाँव सिर्फ दिखाई नहीं देता, बोलता भी है। उसकी अपनी लय है, अपने संबोधन हैं, अपनी गालियाँ, हँसी, मुहावरे, गीत और चुप्पियाँ हैं। बुंदेली के निकट स्थानीय बोलचाल के शब्द पात्रों को उनकी मिट्टी से जोड़े रखते हैं। ‘महतारी’, ‘गइया’, ‘मोड़ी’, ‘टेम’, ‘मुंडी’ जैसे शब्द सजावट की तरह नहीं आते; वे उस जीवन के स्वर हैं, जिसे किसी दूसरी भाषा में कहने पर उसका बहुत कुछ छूट सकता था। साहित्य तक बुक कैफे में शिरीष खरे की पुस्तक 'नदी सिंदूरी' की जय प्रकाश पाण्डेय द्वारा समीक्षा https://www.aajtak.in/literature/review/story/nadi-sinduri-by-shirish-khare-reviewed-by-jai-prakash-pandey-in-sahitya-tak-book-cafe-1688239-2023-05-04 Aaj Tak 4 मई 2023 23 अगस्त 2026नदी सिंदूरी: पीछे छूटे गांव को शब्दों से खींचते शिरीष खरे https://ndtv.in/literature/book-nadi-sindoori-shirish-khare-pulls-the-village-left-behind-with-words-5369584 NDTV India 4 अप्रैल 2024 23 अगस्त 2026 22 अगस्त 2026 https://web.archive.org/web/20260822221238/https://ndtv.in/literature/book-nadi-sindoori-shirish-khare-pulls-the-village-left-behind-with-words-5369584 dead लेकिन यह स्वर एक ठहरे हुए समय का नहीं है। कथाओं के भीतर एक ऐसा गाँव भी है जो बदलाव की आहट सुन रहा है। बाजार, कस्बे और नई आकांक्षाएँ धीरे-धीरे उसकी पुरानी गति को बदल रही हैं। इस बदलाव में बहुत कुछ नया आता है, लेकिन उसके साथ कुछ ऐसा भी पीछे छूटता जाता है जिसे लौटकर पाना आसान नहीं। इसलिए ‘नदी सिंदूरी’ किसी बीते समय का सिर्फ भावुक स्मरण नहीं, बल्कि उस संक्रमण को पकड़ने वाली किताब है जिसमें एक गाँव अपनी पुरानी दुनिया और नए बदलावों के बीच खड़ा दिखाई देता है। साहित्य तक बुक कैफे में शिरीष खरे की पुस्तक 'नदी सिंदूरी' की जय प्रकाश पाण्डेय द्वारा समीक्षा https://www.aajtak.in/literature/review/story/nadi-sinduri-by-shirish-khare-reviewed-by-jai-prakash-pandey-in-sahitya-tak-book-cafe-1688239-2023-05-04 Aaj Tak 4 मई 2023 23 अगस्त 2026नदी सिंदूरी: पीछे छूटे गांव को शब्दों से खींचते शिरीष खरे https://ndtv.in/literature/book-nadi-sindoori-shirish-khare-pulls-the-village-left-behind-with-words-5369584 NDTV India 4 अप्रैल 2024 23 अगस्त 2026 22 अगस्त 2026 https://web.archive.org/web/20260822221238/https://ndtv.in/literature/book-nadi-sindoori-shirish-khare-pulls-the-village-left-behind-with-words-5369584 dead