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कौमार्य परीक्षण
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right|thumb|200px|योनिच्छद की विभिन्न स्थितियाँ
कौमार्य परीक्षण यह निर्धारित करने की प्रक्रिया है कि क्या कोई महिला कुंवारी है या नहीं, यानी कि क्या उसने कभी भी संभोग किया है या नहीं? इस परीक्षण में महिला की योनिद्वार की झिल्ली (अर्थात् योनिच्छद) का परीक्षण इस धारणा पर किया जाता है कि उसकी योनिद्वार की झिल्ली केवल संभोग के परिणामस्वरूप ही फट सकती है। इस परीक्षण को सामान्यतः दो उँगली परीक्षण (Two-Finger Test) के नाम से भी जाना जाता है। जे॰एन॰यू॰ के सेंटर फॉर लॉ ऐंड गवर्नेंस में प्राध्यापक प्रतीक्षा बख्शी के अनुसार फ्रांसीसी मेडिकल विधिवेत्ता एल॰ थोइनॉट ने 1898 के आसपास नकली और असली कुंआरी लड़कियों में फर्क करने वाली जाँच के लिए इस तरह का टेस्ट ईजाद किया था। नकली कुंआरी उस महिला को कहा जाता था, जिसकी हाइमन लचीलेपन के कारण सेक्स के बाद भी नहीं टूटती है।http://aajtak.intoday.in/story/rape-evidence-insult-after-assault-1-721275.html संग्रहीत प्रति 7 मार्च 2013 https://web.archive.org/web/20130302073414/http://aajtak.intoday.in/story/rape-evidence-insult-after-assault-1-721275.html 2 मार्च 2013 live भारत में मेडिकल विधिशास्त्र की लगभग हर पुस्तक में टी॰एफ॰टी॰ को बढ़ावा दिया गया है, जिनमें जयसिंह पी॰ मोदी की लिखी किताब ए टेक्स्ट बुक ऑफ मेडिकल ज्यूरिसप्रूडेंस ऐंड टॉक्सीकोलॉजी भी शामिल है।http://aajtak.intoday.in/story/rape-evidence-insult-after-assault-1-721275.html संग्रहीत प्रति 7 मार्च 2013 https://web.archive.org/web/20130302073414/http://aajtak.intoday.in/story/rape-evidence-insult-after-assault-1-721275.html 2 मार्च 2013 live
लड़कियों के लिए इसके विपरीत प्रभाव और इस जाँच में प्रामाणिकता एवं सटीकता का अभाव होने के कारण कौमार्य परीक्षण एक बहुत ही विवादास्पद जाँच है।University of California at Santa Barbara's SexInfo – The Hymen https://web.archive.org/web/20120311102103/http://www.soc.ucsb.edu/sexinfo/article/the-hymen 11 मार्च 2012 . Retrieved 4 मार्च 2009. एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा यह अपमानजनक और मानव अधिकारों का उल्लंघन माना गया है।http://www.amnesty.org/en/library/asset/ACT77/001/2005/en/dom-ACT770012005en.html Amnesty International 17 जनवरी 2013 https://web.archive.org/web/20131209084141/http://www.amnesty.org/en/library/asset/ACT77/001/2005/en/dom-ACT770012005en.html 9 दिसंबर 2013 live और कई देशों में यह अवैध घोषित है।
देश में प्रचलित दो उँगली परीक्षण (टी॰एफ॰टी॰) से बलात्कार पीड़ित महिला की वजाइना के लचीलेपन की जाँच की जाती है। अंदर प्रवेश की गई उँगलियों की संख्या से डॉक्टर अपनी राय देता है कि ‘महिला सक्रिय सेक्स लाइफ’ में है या नहीं। भारत में ऐसा कोई कानून नहीं है, जो डॉक्टरों को ऐसा करने के लिए कहता है। 2002 में संशोधित साक्ष्य कानून बलात्कार के मामले में सेक्स के पिछले अनुभवों के उल्लेख को निषिद्ध करता है। सुप्रीम कोर्ट ने 2003 में टी॰एफ॰टी॰ को ‘दुराग्रही’ कहा था। ज्यादातर देशों ने इसे पुरातन, अवैज्ञानिक, निजता और गरिमा पर हमला बताकर खत्म कर दिया है।http://aajtak.intoday.in/story/rape-evidence-insult-after-assault-1-721275.html संग्रहीत प्रति 7 मार्च 2013 https://web.archive.org/web/20130302073414/http://aajtak.intoday.in/story/rape-evidence-insult-after-assault-1-721275.html 2 मार्च 2013 live
जस्टिस जे॰एस॰ वर्मा समिति ने भी इसकी तीखी आलोचना की है। समिति ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर आपराधिक कानूनों पर 23 जनवरी 2013 को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, “सेक्स अपराध कानून का विषय है, न मेडिकल डायग्नोसिस का।” रिपोर्ट में कहा गया है कि महिला की वजाइना के लचीलेपन का बलात्कार से कोई लेना-देना नहीं है। इसमें टू फिंगर टेस्ट न करने की सलाह दी गई है। रिपोर्ट में डॉक्टरों के यह पता लगाने पर भी रोक लगाने की बात कही गई है जिसमें पीड़िता के ‘यौन संबंधों में सक्रिय होने’ या न होने के बारे में जानकारी दी जाती है।http://aajtak.intoday.in/story/rape-evidence-insult-after-assault-1-721275.html संग्रहीत प्रति 7 मार्च 2013 https://web.archive.org/web/20130302073414/http://aajtak.intoday.in/story/rape-evidence-insult-after-assault-1-721275.html 2 मार्च 2013 live
सन्दर्भ
इन्हें भी देखें
कौमार्य
योनिच्छद पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा (ह्य्मेनोप्लास्टी)
श्रेणी:शारीरिक परीक्षण
श्रेणी:कामुकता और समाज