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इश्क़
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इश्क़ (अरबी: عشق, रोमनकृत: 'ishq) एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ 'प्रेम' या 'आसक्ति' है। यह शब्द इस्लामी दुनिया और भारतीय उपमहाद्वीप की अन्य भाषाओं में व्यापक रूप से प्रयुक्त होता है।Arkoun, M. 1997 ʿIs̲h̲ḳ Encyclopaedia of Islam 2nd Brill P. Bearman 4
इस्लाम के केंद्रीय धर्मग्रंथ क़ुरआन में "इश्क़" शब्द नहीं मिलता। इसके स्थान पर क़ुरआन में हब्ब (حَبَّ) धातु से व्युत्पन्न शब्द जैसे हुब्ब (حُبّ) प्रयुक्त हुए हैं। पारंपरिक व्युत्पत्ति के अनुसार यह शब्द अरबी धातु अशक़ (عَشَقَ - "चिपकना, लगाव रखना") से निकला है और अशक़ा (عَشَقَة, एक प्रकार की लता) से संबंधित है। शास्त्रीय व्याख्या में इश्क़ माशूक़ (प्रियतम) को प्राप्त करने की अदम्य इच्छा को दर्शाता है, जो प्रेमी (आशिक़) की उस कमी को उजागर करता है जिसे पूर्णता (कमाल) प्राप्त करने हेतु दूर करना होता है। प्रेम की यह अवधारणा उस सौंदर्य (अल-हुस्न) की ओर आकर्षण है, जिसे ईश्वर ने आदम को अपने स्वरूप में सृजित कर प्रकट किया। यूनानी दर्शन के प्रभाव से इसमें सत्य (अल-हक़्क़), शिव और सुंदर की अविभाज्य एकता (वह्दा) का आयाम जुड़ा।
प्राचीन मुस्लिम विद्वानों ने प्रेम को तीन स्तरों पर व्याख्यायित किया:
प्राकृतिक प्रेम
बौद्धिक प्रेम
दैवीय प्रेम
अंदलूसी विद्वान इब्न हज़्म ने अपने ग्रंथ तौक़ अल-हमामा (طوق الحمامة, "कबूतर की अंगूठी") में स्नेह (मवद्दा) से उत्कट प्रेम (इश्क़) तक की यथार्थवादी विवेचना प्रस्तुत की। सूफ़ी साहित्य में इश्क़ ईश्वर के प्रति "निःस्वार्थ दाहक प्रेम" का पर्याय है और यह मानव-ईश्वर संबंध का केंद्रीय आधार माना जाता है। कुछ सूफ़ी परंपराओं में इश्क़ को "सृष्टि का मूल" भी कहा गया है। सिख धर्म के पवित्र ग्रंथों में भी इस शब्द का प्रयोग हुआ है।Arkoun, M. 1997 ʿIs̲h̲ḳ Encyclopaedia of Islam 2nd Brill P. Bearman Th. Bianquis C.E. Bosworth E. van Donzel W.P. Heinrichs 4 119
व्युत्पत्ति
पारंपरिक फ़ारसी कोशकारियों के अनुसार फ़ारसी शब्द एश्क़ और अरबी इश्क़ (عشق) अरबी धातु अशक़ (عَشَق) से व्युत्पन्न हैं। इन्होंने इसकी उत्पत्ति अशक़ा (عَشَقَه) नामक लता से जोड़ी, क्योंकि यह पेड़ों के चारों ओर लिपटकर चिपक जाती है (ज़मख़्शरी, ताज़ अल-उरुस)। भाषाविद् हेदारी-मलायरी के अनुसार इश्क़ की जड़ें इंडो-यूरोपीय भाषा परिवार में हो सकती हैं और यह अवेस्ता भाषा के शब्द इश्- ("इच्छा करना, खोजना") तथा इश्क़ा से संबंधित है। अवेस्ता का इश्- मध्य फ़ारसी में इश्त (इच्छा) के रूप में विद्यमान है।M. Heydari-Malayeri On the origin of the word ešq https://web.archive.org/web/20140118025638/http://aramis.obspm.fr/~heydari/dictionary/esq_eng.html 18 जनवरी 2014 M. Heydari-Malayeri On the origin of the word ešq https://web.archive.org/web/20140118025638/http://aramis.obspm.fr/~heydari/dictionary/esq_eng.html 18 जनवरी 2014
विभिन्न भाषाओं में प्रयोग
इश्क़ उन भाषाओं में प्रचलित है जो सूफ़ीवाद या फ़ारसी साहित्य से प्रभावित रही हैं:
भाषालिपिरोमनकृतविशेषताहिन्दीइश्क़ishqउर्दू समान लिपि/अर्थ, काव्य-सूफ़ी सन्दर्भ प्रमुख। "इश्क़-ए-इलाही" जैसे प्रयोगअरबीعشقʿishqमूल शब्द, आधुनिक प्रयोग कमउर्दूعشقishqधार्मिक सन्दर्भ: इश्क़-ए-हक़ीक़ी/मजाज़ीफ़ारसीعشقešq"आशिक़" (प्रेमी), "माशूक़" (प्रियतम)तुर्कीयाईaşkaşk'क़' → 'क' (कंठ्य ध्वनि का अभाव)पंजाबीਇਸ਼ਕ/عشقishqगुरुमुखी लिपि और शाहमुखी लिपि बांग्लाএশ্কeśkसिंधीعشقishq
फ़ारसी में इश्क़ क्रियाओं बाख़्तन (باختن - दाँव पर लगाना), ख़्वास्तन (خواستن - चाहना), सन्जीदन (سنجیدن - तौलना) आदि के साथ प्रयुक्त होता है। फ़ारसी में "आशिक़" (عاشق) प्रेमी को और "माशूक़" (معشوق) प्रियतम को दर्शाता है, जबकि "माशूक़ा" (معشوقه) अरबी में स्त्रीलिंग प्रियतम है किंतु फ़ारसी में इसका अर्थ अश्लील हो जाता है।M. Heydari-Malayeri On the origin of the word ešq https://web.archive.org/web/20140118025638/http://aramis.obspm.fr/~heydari/dictionary/esq_eng.html 18 जनवरी 2014
उर्दू में इश्क़ (عشق) किसी भी वस्तु, व्यक्ति या ईश्वर के प्रति उत्कट प्रेम को दर्शाता है, परंतु इसका प्रमुख प्रयोग धार्मिक सन्दर्भ में होता है। उर्दू में इश्क़ से व्युत्पन्न तीन सामान्य धार्मिक शब्दावली हैं:
इश्क़-ए-हक़ीक़ी (सत्य/ईश्वर का प्रेम)
इश्क़-ए-मजाज़ी (ईश्वर की सृष्टि अर्थात् मनुष्य का प्रेम)
इश्क़-ए-रसूल / इश्क़-ए-मुहम्मदी (पैग़म्बर मुहम्मद का प्रेम) ग़ैर-धार्मिक सन्दर्भ में इश्क़ उन्मत्त प्रेम का पर्याय है।
तुर्कीयाई में आश्क (aşk) प्रेम, आसक्ति या भक्ति को दर्शाने के लिए प्रयुक्त होता है। तुर्की रूप में अरबी 'क़' (ق) का स्थान 'क' ने ले लिया है क्योंकि तुर्की में कंठ्य 'क़' ध्वनि नहीं है, और 'ş' अक्षर (सेडिल युक्त) "श" ध्वनि देता है। अरबी या उर्दू की तुलना में तुर्की में यह शब्द कम प्रतिबंधित है तथा प्रेम या रोमांस के विविध रूपों को दर्शा सकता है। यह तुर्की गीतों के बोलों में आम है।
उर्दू भाषा में, विशेषकर लॉलीवुड फ़िल्मों (पाकिस्तानी सिनेमा) में इश्क़ का प्रयोग होता है, जो प्रायः फ़ारसी से लिए गए औपचारिक, साहित्यिक उर्दू शब्दों का उपयोग करते हैं। हिन्दी जैसे, उर्दू का अधिक बोलचाल वाला शब्द 'प्यार' है। उर्दू में इश्क़ (عشق) निर्लोभ प्रेम को दर्शाता है। अरबी में यह केवल संज्ञा है, जबकि हिन्दी-उर्दू में इसका प्रयोग संज्ञा और क्रिया दोनों रूपों में होता है।
आधुनिक अरबी में रोमांटिक प्रेम के लिए प्रायः हब्ब (حَبّ) तथा इससे व्युत्पन्न शब्द जैसे हुब्ब (حُبّ), हबीब (حَبِيْب - प्रिय), महबूब (مَحْبُوْب - प्रियतम) प्रयुक्त होते हैं।M. Heydari-Malayeri On the origin of the word ešq https://web.archive.org/web/20140118025638/http://aramis.obspm.fr/~heydari/dictionary/esq_eng.html 18 जनवरी 2014
सूफ़ीवाद में
धार्मिक सन्दर्भ में इश्क़ (जिसके तीन प्रकार हैं) इस्लाम की सूफ़ी परंपरा की एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण किंतु जटिल संकल्पना है।
इश्क़-ए-मजाज़ी
इश्क़-ए-मजाज़ी (फ़ारसी: عشق مجازی) का शाब्दिक अर्थ "प्रतीकात्मक प्रेम" है। यह ईश्वर की सृष्टि (जैसे स्त्री-पुरुष या दो व्यक्तियों के बीच प्रेम) के प्रति आसक्ति को दर्शाता है। यह प्रियतम के बाह्य सौंदर्य से उत्पन्न होता है, किंतु चूँकि यह कामना से जुड़ा है, इसे अवैध माना जाता है। अतः फ़क़्र (सूफ़ी साधना) में इश्क़-ए-मजाज़ी का लक्ष्य केवल इश्क़-ए-मुरशिद (आध्यात्मिक गुरु का प्रेम) होना चाहिए। यह प्रेम अंततः पैग़म्बर मुहम्मद और फिर ईश्वर के प्रेम की ओर ले जाता है, जहाँ व्यक्ति समझ पाता है कि इश्क़-ए-हक़ीक़ी वास्तव में समस्त 'प्रतीकात्मक प्रेम' का स्रोत है।
इश्क़-ए-रसूल या इश्क़-ए-मुहम्मदी
इश्क़-ए-रसूल (फ़ारसी: عشق رسول) अर्थात "पैग़म्बर मुहम्मद का प्रेम", एक मुसलमान के लिए अनिवार्य है। सूफ़ीवाद में इश्क़-ए-मजाज़ी, मुहम्मद के प्रति गहन प्रेमभाव विकसित होने पर इश्क़-ए-रसूल का रूप ले लेता है। चूँकि मुहम्मद अल्लाह के सर्वाधिक प्रिय हैं, सच्चा प्रेमी उनके प्रति इतना इश्क़ रखता है कि "पैग़म्बर उसके जीवन, पत्नी, संतान, घर और समस्त संपत्ति से अधिक प्रिय हो जाते हैं" (सहीह बुख़ारी व सहीह मुस्लिम)। http://www.virtualmosque.com/islam-studies/prophet-muhammad/loving-the-messenger-%EF%B7%BA-peace-be-upon-him-above-all-else/ Hadith of Hazrat Mohammad pbuh Muslim Bukhari
इश्क़-ए-हक़ीक़ी
इश्क़-ए-हक़ीक़ी (फ़ारसी: عشق حقیقی) यानी "वास्तविक प्रेम" अर्थात ईश्वर के प्रति प्रेम। इसका सिद्धांत है कि केवल ईश्वर प्रेम के योग्य हैं और वही अपने भक्त के प्रेम का प्रतिदान कर सकते हैं। हृदय में स्थित इस सूक्ष्म भावना का अनुभव केवल ईश्वर का सच्चा साधक ही कर पाता है। यही वह तत्व है जो मनुष्य को पशु से भिन्न करता है - पशुओं में इंद्रियबोध होता है, जबकि अंतर्दृष्टि मनुष्य की विशेषता है।https://books.google.com/books?id=hlyMAwAAQBAJ&q=ishq+meaning&pg=PA230 Ishq-e-Haqeeqi (Divine Love) Mohammad Najib ur Rehman Hazrat Sakhi Sultan 11 March 2015 Sultan ul Faqr Publications Regd. 9789699795183
"और जो सच्चे ईमान वाले हैं, वे अल्लाह से प्रगाढ़ प्रेम रखते हैं।" (क़ुरआन २:१६५, अल-बक़रा १६५) http://corpus.quran.com/translation.jsp?chapter=2&verse=165 Al Baqarah (The Cow) 165 7 Renowned Translations Arabic to English Translation
सिख धर्म में
इश्क़ (पंजाबी: ਇਸ਼ਕ) शब्द का प्रयोग गुरु ग्रंथ साहिब तथा भाई गुरदास एवं भाई नंद लाल के रचनाओं में अनेक बार हुआ है। सिख धर्म में इश्क़ की अवधारणा सूफ़ीवाद के इश्क़-ए-हक़ीक़ी के समान है। गुरु ग्रंथ साहिब (पृष्ठ ३७) पर उल्लेख है:http://www.srigranth.org/servlet/gurbani.gurbani?Action=KeertanPage&K=37&L=5&id=1518 Sri Granth: Shabad/Paurhi/Salok SGGS Page 37 www.srigranth.org 2021-08-23
"वह स्वयं हमें अपने प्रेम के रंग में रंगता है; अपने शब्द (दिव्य ज्ञान) द्वारा वह हमें स्वयं से मिलाता है।"
(श्री राग, तृतीय महला)
यह भी देखें
सूफ़ीवाद
प्रेम
प्यार
सन्दर्भ
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