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पाकिस्तान में जैन धर्म
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thumb|एक जैन मंदिर सिरकप, इंडो-ग्रीक राज्य का हिस्सा, आधुनिक दिन तक्षशिला, पंजाब , पाकिस्तान
पाकिस्तान में जैन धर्म (پاکستان میں جین مت) की एक व्यापक विरासत और इतिहास है, लेकिन जैन समुदाय का इस देश में आज एक बहुत छोटा हिस्सा ही बाकि है।
इतिहास
thumb|गुजरांवाला में विजयनंदसूरी का स्मारक मंदिर। अब सब्जी मंडी क्षेत्र के पुलिस स्टेशन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
इस देश भर में कई प्राचीन जैन मंदिर बिखरे पड़े हुए हैं। बाबा धरम दास एक संत व्यक्ति थे जिनकी समाधि पाकिस्तान के पंजाब में सियालकोट शहर के पास, पसरूर में कृषि मुख्य कार्यालय के पीछे, चावंडा फाटिक के पास एक नाले के किनारे स्थित है जिसे देओका या देओके या देग नाम से भी जाना जाता हैं। इस क्षेत्र के एक अन्य प्रमुख जैन भिक्षु गुजरांवाला के विजयनंदसूरी थे, जिनकी समाधि (स्मारक मंदिर) आज भी शहर में उपस्थित है। http://www.dawn.com/news/1282025/ Sacred geography: Why Hindus, Buddhist, Jains, Sikhs should object to Pakistan being called hell Haroon Khalid 4 September 2016 4 September 2016 Dawn https://web.archive.org/web/20160905041935/http://www.dawn.com/news/1282025 5 सितंबर 2016 live
भाबरा
भाबरा (या भाभरा) पंजाब का एक प्राचीन व्यापारी समुदाय था जो मुख्य रूप से जैन धर्म का अनुसरण करता है। Final Report of Revised Settlement, Hoshiarpur District, 1879-84 By J. A. L. Montgomery, p. 35Census of India, 1901 By India Census Commissioner, Sir Herbert Hope Risley, p. 137-140
भाबरा का मूल गृह क्षेत्र अब पाकिस्तान में है। जबकि व्यावहारिक रूप से सभी भाबरों ने पाकिस्तान छोड़ दिया है, कई शहरों में अभी भी भाबरों के नाम पर क्षेत्र हैं।
सियालकोट यहाँ के सभी जैन भाबरा थे और मुख्य रूप से सियालकोट और पसरूर में रहते थे। उनही के नाम पर सराय भाब्रियन और भाब्रियन वाला इलाकों के नाम रखे गए थे। भारत के विभाजन से पहले यहाँ कई जैन मंदिर थे। Gazetteer of the Sialkot District, 1920 - Page 51
पसरूर: पसरूर का विकास एक जैन जमींदार द्वारा किया गया था, जिसे राजा मान सिंह ने जमीन दी थी। बाबा धरम दास उसी जमींदार परिवार से थे, उनकी एक व्यापारिक यात्रा के दौरान हत्या कर दी गई थी। http://www.pasrur.info/JainDeoka.htm Baba Dharam Dass Tomb in Pasrur 21 दिसंबर 2019 https://web.archive.org/web/20160303200408/http://www.pasrur.info/JainDeoka.htm 3 मार्च 2016 live
गुजरांवाला लाला करम चंद भाबरा द्वारा प्रबंधित दो पुराने जैन पुस्तकालय यहां मौजूद थे, जिन्हें रामकृष्ण गोपाल भंडारकर ने देखा था। The two Jain Libraries at Gujranwala by Ramkrishna Gopal Bhandarkar in A Catalogue of Sanskrit Manuscripts in the Library of the Deccan College, by Deccan College Library, Franz Kielhorn- 1884 -- Page 12
लाहौर: यहां कुछ मोहल्लों में जैन मंदिर थे जिन्हें आज भी थारी भाबरियन और गाली बभ्रियन कहा जाता है। http://abafna.googlepages.com/jainrelicsinpakistan jainrelicsinpakistan - abafna Abafna.googlepages.com 2012-04-20 https://web.archive.org/web/20090711110736/http://abafna.googlepages.com/jainrelicsinpakistan 11 जुलाई 2009 live
रावलपिंडी: भाबरा बाजार का नाम उनके नाम पर ही रखा गया है।
मियांवाली: एक जानी-मानी जाती आजकल भी बहुमत में मौजूद है।
और कुछ लोग सिंध में भी रहते थे। A gazetteer of the province of Sindh by Albert William Hughes - 1876, - Page 224
जैन मंदिर
पंजाब
thumb|नगरपारकर का एक प्राचीन जैन मंदिर
जैन मंदिर, थारी भाबरियन लाहौर शहर।
जैन दिगंबर मंदिर शिखर के साथ, पुराना अनारकली जैन मंदिर चौक: http://www.dailytimes.com.pk/default.asp?page=2007%5C06%5C01%5Cstory_1-6-2007_pg13_6 TEPA to remodel roads leading to Jain Mandir Chowk 21 दिसंबर 2019 https://web.archive.org/web/20120302033257/http://www.dailytimes.com.pk/default.asp?page=2007%5C06%5C01%5Cstory_1-6-2007_pg13_6 2 मार्च 2012 live यह मंदिर 1992 के दंगों में नष्ट कर दिए गये थे। http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/2546373.stm BBC News Aamir Ghauri Demolishing history in Pakistan 5 December 2002 21 दिसंबर 2019 https://web.archive.org/web/20190721084348/http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/2546373.stm 21 जुलाई 2019 live अब यहां एक इस्लामिक स्कूल इस पूर्व मंदिर से चलाया जाता है। 31.561389 74.308056 region:PK_type:landmark_scale:2000_source:wikimapia.http://wikimapia.org/#y=31561389&x=74308056&z=18&l=0&m=h&v=2 Wikimapia 10 दिसंबर 2018 https://www.webcitation.org/61CZ2O6Sc?url=http://wikimapia.org/#y=31561389&x=74308056&z=18&l=0&m=h&v=2 25 अगस्त 2011 live LIST OF JAIN TEMPLES IN PAKISTAN https://web.archive.org/web/20070927215541/http://jainsamaj.org/temples/pakistan.htm 27 September 2007
सिंध
thumb|52 गुंबदों वाला मूल गोरी मंदिर, नगरपारकर
thumb|मूल गोरी मंदिर में प्रतीकात्मक और ऐतिहासिक कलाकृति
नागर बाज़ार मंदिर नागर पारकर शहर के मुख्य बाजार में मौजूद है। शिखर और तोरण द्वार सहित मंदिर की संरचना पूरी तरह से बरकरार है। 1947 में पाकिस्तान की स्वतंत्रता तक, और शायद उसके कुछ समय बाद भी कुछ वर्षों तक इसका उपयोग किया गया। शहर के बाहर भी एक खंडहर मंदिर है।
भोडसर जैन मंदिर नगर से 7.2 किलोमीटर दूर भोडसर जैन मंदिर, सोढ़ा शासनकाल के दौरान बना इस क्षेत्र की राजधानी थी। तीन मंदिरों के अवशेष, अब भी मौजूद हैं। 1897 में, उनमें से दो गौशाला के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे थे और तीसरे बुरी हालत में था। सबसे प्राचीन मंदिर, पत्थरों के शास्त्रीय शैली में बनाया गया था, जो लगभग 9 वीं शताब्दी में बनाया गया था। यह एक ऊँचे मंच पर बनाया गया था जहां पत्थर को काटकर बनये गए सीढ़ियों से पहुंचा जाता था। इसमें पत्थर के सुंदर विशाल स्तंभ और अन्य संरचनात्मक तत्व हैं। शेष दीवारें अस्थिर हैं और आंशिक रूप से ढह गई हैं। भवन के कुछ हिस्सों को स्थानीय लोगों ने खंडित कर दिया था, जिन्होंने ईंटों और पत्थरों का इस्तेमाल अपने घरों के निर्माण के लिए किया था। यह शायद सिंध के स्मारकों में सबसे शानदार है। कहा जाता है कि दो अन्य जैन मंदिरों का निर्माण 1375 ईस्वी और 1449 ईस्वी में कंजूर और लाल पत्थर से किया गया था, जिनमें नक्काशी और खूँटीदार गुंबद थे।
करौंजर जैन मंदिर पहाड़ के आधार पर है।
वीरवा जैन मंदिर, यहां जैन मंदिरों के कई खंडहर हैं। मंदिरों में से एक में 27 देवकुलिक थे। पौराणिक परिनगर भी इसी खंडहर के पास में हैं। इन मंदिरों में से एक अच्छे संरक्षण में है।
विरवा गोरी मंदिर विरवा से 14 मील की दूरी पर है। 52 सहायक मंदिरों के साथ पौराणिक मंदिर 1375-76 ईस्वी में बनाया गया था। यह जैन तीर्थंकर गोरी पार्श्वनाथ को समर्पित है।
जैन श्वेताम्बर मंदिर शिखर के साथ, रणछोर रेखा, कराची List of Jain temples in Pakistan https://web.archive.org/web/20161215153537/http://www.jainworld.com/jaintemples/pakistan_temples.asp 15 दिसंबर 2016 , Jain World
जैन श्वेताम्बर मंदिर, हैदराबाद, सिंध
जैन समुदाय
1947 से पहले, पंजाब और सिंध क्षेत्रों में जैनियों के छोटे समुदाय थे। 1947 में विभाजन के दौरान उनमें से लगभग सभी भारत आ गए। पाकिस्तान में जैन इतिहास के पाँच हज़ार वर्षों में लोगों ने ज़ेरक्स के आक्रमण, श्वेत हूण आक्रमण से अपने आप को बचा लिया। लेकिन इस्लामी आक्रमण के साथ जजिया, धमकी, और इस्लामी कानून आते हैं, जैन धर्म पाकिस्तान से गायब हो गया है।Kaminsky Arnold P. Long Roger D. India Today: An Encyclopedia of Life in the Republic https://archive.org/details/indiatodayvolume00kami 2011 ABC-CLIO 978-0-31337-462-3 372
उल्लेखनीय लोग
विभाजन पूर्व पाकिस्तान से प्रमुख जैन:
बाबा धरम दास
गुलु लालवानी
विजयनंदसूरी
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
List of Jain Temples in Pakistan
Baba Dharam Dass Tomb in Pasrur
Jainism in
श्रेणी:पाकिस्तान में जैन धर्म