411 REFERENCE · Wikipedia
प्रवीणराय
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
नवम्बर 2013
प्रवीणराय एक वेश्या थी जो गायन और नृत्यकला में प्रवीण होने के साथ साथ काव्यरचना में भी चतुर थी। वह ओड़छा के महाराज इंद्रजीतसिंह के महल में रहती थी। वह महाकवि केशवदास की शिष्या थी। इसकी प्रशंसा सुनकर अकबर ने इसे अपने दरबार में बुला भेजा किंतु इंद्रजीतसिंह ने इसे वहाँ भेजने से इनकार कर दिया। इसपर उन्हें अकबर का कोपभाजन बनना पड़ा। अकबर ने उनपर एक करोड़ का जुरमाना ठोंक दिया और प्रवीणराय को जबरन बुलवा मँगाया। प्रवीणराय ने दरबार में उपस्थित होकर अपनी कविता सुनाई और शाह की धाक का वर्णन करते हुए अंत में निवेदन किया:
बिनती राय प्रवीन की सुनिए शाह सुजान। जूठी पातर चखत हैं बारी बायस स्वान।
इसपर अकबर बड़ा प्रसन्न हुआ और उसने प्रवीणराय को ओड़छा में ही रहने की अनुमति दे दी। प्रवीणराय द्वारा रचित कोई काव्यग्रंथ देखा नहीं गया किंतु उसके बनाए हुए कई छंद उपलब्ध हैं जिनसे उसका काव्य-कला-कौशल प्रकट होता है।
इन्हें भी देखें
ओरछा
श्रेणी:हिन्दी साहित्यकार
श्रेणी:प्रसिद्ध वेश्याएँ
श्रेणी:भारतीय हिंदी साहित्यकार