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बियॉन्ड बिलीफ़
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बियॉन्ड बिलीफ : इस्लामिक एक्सकर्शन्स एमांग द कन्वर्टेड पीपल्सBeyond Belief: Islamic Excursions among the Converted Peoples File:BeyondBelief.jpg प्रथम संस्करण (यूके) हाँ विद्यासागर सूरजप्रसाद नैपाल युनाइटेड किंगडम अंग्रेजी लिटिल ब्राउन (यूके)रैण्डम हाउस (यूएसए) 1998 प्रिन्ट (हार्डबैक एवं पेपरबैक) 408 पृष्ट (प्रथम संस्करण, पेपरबैक)
बियॉन्ड बिलीफ : इस्लामिक एक्सकर्शन्स एमांग द कन्वर्टेड पीपल्स, विद्यासागर सूरजप्रसाद नैपाल की एक गैर-काल्पनिक पुस्तक है। इसे 1998 में विंटेज बुक्स द्वारा प्रकाशित किया गया था। यह विद्यासागर नैपाल की 'एमांग द बिलीवर्स : एन इस्लामिक जर्नी' (1981) की अगली कड़ी के रूप में लिखी गई थी।
सारांश
विद्यासागर नैपाल अरब देश और "धर्मान्तरित लोगों" के देशों के बीच एक बड़ा अंतर दर्शाते हैं और कहते हैं कि धर्मान्तरित लोगों के देशों में इस्लाम को अपनाने में कुछ हद तक अरबी संस्कृति को अपनाना भी शामिल है। इस पुस्तक में 1995 में चार मुस्लिम देशोंः इंडोनेशिया, ईरान, पाकिस्तान और मलेशिया में उनकी पांच महीने की यात्रा का वर्णन किया गया है। विद्यासागर नैपाल ने देशी संस्कृतियों के चल रहे इस्लामीकरण का भी दस्तावेजीकरण किया हैः इंडोनेशिया और मलेशिया की कहानियों के केंद्र में इस्लामी कट्टरपंथियों की उपस्थिति है जो मूल संस्कृतियों के बचे हुए हिस्से को 'शुद्ध' करने की कोशिश कर रहे हैं।
इस पुस्तक में नैपाल का मानना है कि "ब्रिटिश काल -जो कुछ स्थानों पर दो सौ वर्ष रहा और अन्य देशों में सौ वर्ष से भी कम रहा, हिंदू पुनर्जन्म का काल था।"
सन्दर्भ
इन्हें भी देखें
एमांग द बिलीभर्स (विद्यासागर नैपाल की दूसरी रचना जो 'एमांग द बिलीभर्स' की अगली कड़ी के रूप में लिखी गयी है।
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