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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

ऑन लिबर्टी

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ऑन लिबर्टी (अंग्रेज़ी: On Liberty) अंग्रेज़ी दार्शनिकों हैरियट टेलर मिल और जॉन स्टुअर्ट मिल द्वारा रचित एक प्रसिद्ध निबंध है, जो 1859 में जॉन स्टुअर्ट मिल के नाम से प्रकाशित हुआ। यह पुस्तक व्यक्तिगत स्वतंत्रता, राज्य और समाज के अधिकार-क्षेत्र की सीमाओं तथा विचार-अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर राजनीतिक दर्शन के सबसे महत्त्वपूर्ण ग्रंथों में से एक मानी जाती है।Claeys Gregory 4. The values of On Liberty (1859) 2022-02-24 https://doi.org/10.1093/actrade/9780198749998.003.0004 John Stuart Mill: A Very Short Introduction 66–83 Oxford University Press 978-0-19-874999-8 2026-08-20 पृष्ठभूमि यह निबंध 1859 में प्रकाशित हुआ। मिल ने इसे ऐसे समय में लिखा जब औद्योगिक समाज, लोकतंत्र के विस्तार और सामाजिक नैतिकता को लेकर नए विचारों का विकास हो रहा था। पुस्तक का मुख्य उद्देश्य यह प्रश्न उठाना था कि समाज और राज्य को व्यक्ति की स्वतंत्रता पर कितनी सीमा तक हस्तक्षेप करने का अधिकार होना चाहिए। मुख्य विचार ऑन लिबर्टी में मिल ने तर्क दिया कि व्यक्ति को तब तक स्वतंत्र रहना चाहिए जब तक उसके कार्य दूसरों को प्रत्यक्ष हानि न पहुँचाएँ। इस विचार को सामान्यतः हानि सिद्धांत कहा जाता है। निबंध में मिल ने निम्न विषयों पर बल दियाDe la liberté 2014 https://doi.org/10.4000/books.enseditions.5565 John Stuart Mill et Harriet Taylor : écrits sur l'égalité de sexes ENS Éditions 978-2-84788-579-8 2026-08-20: विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता व्यक्तिगत जीवन में राज्य के हस्तक्षेप की सीमा बहुसंख्यकवाद (majority tyranny) के खतरे व्यक्ति की मौलिकता और स्वायत्तता मिल के अनुसार, असहमति और विविध विचारों का संरक्षण समाज की बौद्धिक प्रगति के लिए आवश्यक है। उनका मानना था कि यदि किसी मत को गलत भी माना जाए, तब भी उसे व्यक्त करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए, क्योंकि सत्य की बेहतर समझ अक्सर बहस और टकराव से विकसित होती है। हिन्दी अनुवाद ऑन लिबर्टी का हिन्दी में पहला महत्त्वपूर्ण अनुवाद महावीर प्रसाद द्विवेदी ने किया। द्विवेदी जी आधुनिक हिन्दी के प्रवर्तक और नवजागरण काल के प्रमुख साहित्यकार थे। उन्होंने इस निबंध का अनुवाद स्वाधीनता शीर्षक से किया, जो उनके प्रयासों को दर्शाता है कि पश्चिमी राजनीतिक विचारों को भारतीय पाठकों तक पहुँचाया जाए।स्वाधीनता (On Liberty का हिन्दी अनुवाद) द्विवेदी महावीर प्रसाद काशी: नागरी प्रचारिणी सभा 1910 द्विवेदी के अनुवाद ने हिन्दी-भाषी बुद्धिजीवियों के बीच मिल के विचारों को लोकप्रिय बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई और यह भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के दौरान व्यक्तिगत स्वतंत्रता और समाज सुधार की बहसों को प्रभावित करने वाला एक प्रमुख ग्रंथ बना। संदर्भ श्रेणी:नवजागरण