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आहूखाना
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sanam songs Mere_Mehboob_Qayamat_Hogi_ मुम्बई, 16 वीं शताब्दी मुगल वास्तुकला लगभग 6 मील मुमताज महल प्रति माह 80 से 100 आगंतुक भारत सरकार
बुरहानपुर के जैनाबाद में स्थित आहूखाना वह स्थान है जो मध्यकाल में बादशाहों और सुल्तानों के लिए शिकारगाह के साथ पनाहगाह भी था। ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक बुरहानपुर में मुगल बादशाह की बेगम मुमताज महल के निधन के बाद उसके शव को इसी जगह पर छह महीने तक सुरक्षित रखा गया था।http://hindi.webdunia.com/%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B6%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%B9%E0%A5%82%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B5-%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE-112010600048_1.htm रोशनी में नहाएगा आहूखाना व शाही किला hindi.webdunia.com 2017-06-29 https://web.archive.org/web/20180809185450/http://hindi.webdunia.com/%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B6%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%B9%E0%A5%82%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B5-%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE-112010600048_1.htm 9 अगस्त 2018 deadhttp://bhaaratdarshan.com/mp/travel/ahukhana/ Ahukhana bharatdarshan.com 2017-06-29जून 2020 InternetArchiveBot
इतिहास
आहूखाने का इतिहास फारूकी शासनकाल से संबद्ध है। जैनाबाद को इसी काल-खंड में बसाया गया था। फारूकी राजाओं ने अपने शासनकाल में इस विशाल बाड़े का निर्माण करवाया था, जिसमें हिरण रहा करते थे। इसी वजह से इस जगह का नाम आहूखाना रखा गया। आहूखाने का अर्थ ही होता है हिरणों का बाड़ा। फारुकी राजाओं को हराने के बाद अकबर ने अपने पुत्र दानियाल को इस इलाके का सूबेदार नियुक्त किया। दानियाल अक्सर यहां शिकार के लिए आया करता था।
नूरजहाँ का आहूखाना से लगाव
दानियाल की मृत्यु के बाद आहूखाना थोड़े समय के लिए उजाड़ हो गया लेकिन जहांगीर के शासन संभालते ही नूरजहाँ के लिए ये सबसे प्रिय जगह बन गई। जहांगीर के शासनकाल में आहूखाने में एक महल का निर्माण करवाया गया।
शिकारगाह से गुलाब बाग में रुपांतरण
जहांगीर के बाद शाहजहाँ के हाथ में सत्ता आ गई, जो पहले बुरहानपुर का सूबेदार रह चुका था। मुमताज महल को यह जगह बेहद पसंद थी। उसने कश्मीर के निशातबाग की तरह ही आहूखाने को गुलाबबाग में बदल दिया। पूरे मुगलकाल में यह जगह हिंदुस्तान का दूसरा सबसे सुंदर गुलाबबाग कहा जाता था। इस जगह का जिक्र फारसी कवि फिरदौसी ने अपनी किताब शाहनामा में भी किया है। मुमताज महल ने यहां एक बारादरी का निर्माण भी करवाया था, जहाँ अक्सर नृत्य और संगीत के आयोजन हुआ करते थे।http://m.dabangdunia.in/news/9622-story.html छह महीने नौ दिन आहूखाना में था शव m.dabangdunia.in 2017-06-29 https://web.archive.org/web/20181118164925/http://m.dabangdunia.in/news/9622-story.html 18 नवंबर 2018 deadhttp://timesofindia.indiatimes.com/city/bhopal/State-ignores-but-Burhanpur-residents-remember-Mumtaz/articleshow/20487923.cms State ignores, but Burhanpur residents remember Mumtaz timesofindia.indiatimes.com 2017-06-29 https://web.archive.org/web/20190217002903/https://timesofindia.indiatimes.com/city/bhopal/State-ignores-but-Burhanpur-residents-remember-Mumtaz/articleshow/20487923.cms 17 फ़रवरी 2019 live
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
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