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सर सोराबजी पोचखानवाला
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thumb|सेण्ट्रल बैंक ऑफ़ इण्डिया मुम्बई की पुरानी बिल्डिंग (इसी में बैंक की स्थापना की गयी थी)
सर सोराबजी पोचखानवाला (अंग्रेजी: Sir Sorabji Pochkhanawala, जन्म: 9 अगस्त 1881, मृत्यु: 4 जुलाई 1937)pg 2695, Who's Who, 1936 एक भारतीय पारसी बैंकर थे। स्वदेशी आन्दोलन से प्रभावित होकर उन्होंने 109 वर्ष पूर्व 1911 में सेण्ट्रल बैंक ऑफ़ इण्डिया की स्थापना की थी जो आज भारत का एक प्रमुख बैंक है।
सोराबजी पोचखानवाला को उनकी बैकिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवाओं के लिये ब्रिटिश राज द्वारा 1 मार्च 1935 को सर की उपाधि दी गयी थी।
संक्षिप्त जीवनी
सोराबजी पोचखानवाला का जन्म 9 अगस्त 1881 को ब्रिटिश भारत के बम्बई महानगर में एक पारसी परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम नासरवनजी पोचखानवाला और माँ का नाम बाई गुलबाई था। सोराबजी जब छ: वर्ष के तभी उनके पिता की मृत्यु हो गयी। सबसे बड़े भाई हीरजी भाई ने, जो चार्टर्ड बैंक ऑफ इण्डिया में एक मामूली से क्लर्क थे, सोराबजी, उनके एक छोटे भाई एदुलजी और एक बहन - तीनों की परवरिश की।http://www.bankipedia.in/focus-now_story-of-sorabji.htm Bankipedia: Biography of Sir Sorabji Pochkhanawala 10 अगस्त 2013 https://web.archive.org/web/20120707190827/http://www.bankipedia.in/focus-now_story-of-sorabji.htm 7 जुलाई 2012 dead 1897 में 16 वर्ष की आयु में बम्बई विश्वविद्यालय से मैट्रिक करने के बाद उन्होंने सेण्ट स्टीफन कॉलेज बम्बई से स्नातक (बी॰ए॰) करना चाहा लेकिन प्रथम वर्ष की परीक्षा में असफल रहने के कारण उन्होंने अपना इरादा बदल दिया।
अपने भाई की सहायता से उन्हें 20 रुपये मासिक तनख्वाह पर चार्टर्ड बैंक में क्लर्क की नौकरी मिल गयी। नौकरी करते हुए उन्होंने बैंकिंग से सम्बन्धित विषयों की परीक्षाएँ पास करने का संकल्प किया और व्यावसायिक बैंकर के लिए सहायक परीक्षा उत्तीर्ण करने में सफलता प्राप्त की। लन्दन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकर्स का सी॰ए॰आई॰बी॰ प्रमाण पत्र प्राप्त करने वाले वे पहले भारतीय थे।http://www.bankipedia.in/focus-now_story-of-sorabji.htm Bankipedia: Biography of Sir Sorabji Pochkhanawala 10 अगस्त 2013 https://web.archive.org/web/20120707190827/http://www.bankipedia.in/focus-now_story-of-sorabji.htm 7 जुलाई 2012 dead बाद में इसी इंस्टीट्यूट को भारत में भी खोला गया जिसे इण्डियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकर्स के नाम से जाना जाता है। और इस इंस्टीट्यूट से परीक्षा पास करने पर सी॰ए॰आई॰आई॰बी॰ का प्रमाण पत्र मिलता है।
७ साल तक चार्टर्ड बैंक में सर्विस करने के बाद उन्होंने 1905 में त्याग पत्र दे दिया और भारतीय व्यापारियों द्वारा स्थापित बैंक ऑफ इण्डिया में एकाउण्टेण्ट के रूप में ज्वाइन किया। बैंक ऑफ इण्डिया में काम करते हुए उन्हें भारतीय बैंकिंग की मूलभूत समस्याओं को अध्ययन करने का पर्याप्त अवसर मिला।http://www.bankipedia.in/focus-now_story-of-sorabji.htm Bankipedia: Biography of Sir Sorabji Pochkhanawala 10 अगस्त 2013 https://web.archive.org/web/20120707190827/http://www.bankipedia.in/focus-now_story-of-sorabji.htm 7 जुलाई 2012 dead
1910 में उन्होंने बाई सकरबाई रतनजी से विवाह किया। सकरबाई सोराबजी दम्पति के दो बेटे व तीन बेटियाँ हुईं।pg 2695, Who's Who, 1936
सेण्ट्रल बैंक की स्थापना
कल्याणजी वर्धमान जेतसी से आर्थिक सहयोग प्राप्त कर उन्होंने एक ऐसे बैंक की स्थापना करने का संकल्प किया जो पूर्णत: स्वदेशी हो और जिसे भारतीयों की आवश्यकता को ध्यान में रखकर विशुद्ध रूप से भारतीयों ने ही बनाया हो। पोचखानवाला ने कुछ नामी-गिरामी हस्तियों को जुटाकर एक अच्छी बिल्डिंग का चयन किया और हिन्दू मुस्लिम व पारसी लोगों के व्यावसायी प्रतिष्ठानों से चुने हुए लोगों का एक निदेशक मण्डल बनाया। उस समय के प्रख्यात वकील फिरोजशाह मेहता को इस निदेशक मण्डल का अध्यक्ष नियुक्त किया और 21 दिसम्बर 1911 को 50 लाख रुपये की प्रारम्भिक पूँजी से सेण्ट्रल बैंक ऑफ इण्डिया की स्थापना कर डाली। शुरुआत में 50-50 रुपये के 40000 शेयर जारी किये गये। पहले सप्ताह में ही 70 खाते खोले गये जिनमें डेढ़ लाख रुपये जमा हुए थे।http://www.bankipedia.in/focus-now_story-of-sorabji.htm Bankipedia: Biography of Sir Sorabji Pochkhanawala 10 अगस्त 2013 https://web.archive.org/web/20120707190827/http://www.bankipedia.in/focus-now_story-of-sorabji.htm 7 जुलाई 2012 dead
पोचखानवाला ने सेण्ट्रल बैंक ऑफ इण्डिया की पूरे 9 साल तक एक प्रबन्धक के रूप में सेवा की। 1920 में वे इसके प्रबन्ध निदेशक बने।pg 2695, Who's Who, 1936
सर की उपाधि के बाद का जीवन
सन 1934 में ब्रिटेन के महाराजा के जन्मदिन पर दिये जाने वाले सम्मानों की सूची में पोचखानवाला का नाम शामिल किया गया। यह सम्मान उन्हें भारत में स्वदेशी बैंकिंग व्यवस्था स्थापित करने के लिये दिया गया था।The London Gazette, 4 जून 1934 1 मार्च 1935 को नई दिल्ली के तत्कालीन वायसराय हाउस में, जिसे आजकल राष्ट्रपति भवन के रूप में जाना जाता है, लॉर्ड विलिंग्डन द्वारा उन्हें सर की उपाधि दी गयी।The London Gazette, 19 अप्रैल 1935सितंबर 2021 InternetArchiveBot
4 जुलाई 1937 को 55 वर्ष की आयु में लम्बी बीमारी के बाद उनका निधन हुआ।pg 2695, Who's Who, 1936http://www.bankipedia.in/focus-now_story-of-sorabji.htm Bankipedia: Biography of Sir Sorabji Pochkhanawala 10 अगस्त 2013 https://web.archive.org/web/20120707190827/http://www.bankipedia.in/focus-now_story-of-sorabji.htm 7 जुलाई 2012 dead
पोचखानवाला के नाम पर बैंकर्स ट्रेनिंग कॉलेज
पोचखानवाला के नाम पर सर सोराबजी पोचखानवाला बैंकर्स ट्रेनिंग कॉलेज मुम्बई के विले पार्ले क्षेत्र में स्थापित किया गया जिसमें सेण्ट्रल बैंक और देना बैंक के अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। एस॰पी॰बी॰टी॰ कॉलेज के नाम से विख्यात यह ट्रेनिंग कॉलेज पूरी तरह आवासीय है और बैकों के पुराने ट्रेनिंग कॉलेजों में से एक है।
सन्दर्भ
इन्हें भी देखें
भारत के गवर्नर जनरल
सेण्ट्रल बैंक ऑफ़ इण्डिया
बाहरी कड़ियाँ
सर पोचखानवाला ने सेंट्रल बैंक को दिया नया मुकामनवंबर 2024 InternetArchiveBot
SPBT College विकीमैपिया पर एस॰पी॰बी॰टी॰ कॉलेज, मुम्बई (महाराष्ट्र)
Pochkhanawala, Sorabji सर सोराबजी पोचखानवाला Indian banker अगस्त 9, 1881 Mumbai जुलाई 4, 1937 Mumbai
श्रेणी:बैंक
श्रेणी:पारसी व्यक्ति
श्रेणी:पारसी भारत के